'अल्पसंख्यकों को आरक्षण राजनीतिक खेल'

भाजपा ने ओबीसी के 27 प्रतिशत कोटा के भीतर अल्पसंख्यकों को 4. 5 प्रतिशत कोटा दिए जाने के सरकार के फैसले को कांग्रेस रचित ‘खतरनाक राजनीतिक खेल’ बताया।

अंतिम अपडेट: शुक्रवार दिसम्बर 23, 2011 - 12:40 PM IST

नई दिल्ली : भाजपा ने ओबीसी के 27 प्रतिशत कोटा के भीतर अल्पसंख्यकों को 4. 5 प्रतिशत कोटा दिए जाने के सरकार के फैसले को कांग्रेस रचित ‘खतरनाक राजनीतिक खेल’ बताया, वहीं जद(यू) ने इसे उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर उठाया गया कदम करार देते हुए कांग्रेस नीत सरकार को सच्चर आयोग और रंगनाथ मिश्रा समिति की सिफारिशों को लागू करने की चुनौती दी।

 

माकपा ने केंद्र के फैसले को अपर्याप्त और दिखावटी करार देते हुए अल्पसंख्यकों को 15 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के लिए संविधान संशोधन करने की मांग की। माकपा पोलित ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि संप्रग सरकार ने जो फैसला किया है वह दिखावटी है और उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। ओबीसी के लिए 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए जद (यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि कांग्रेस ने यह निर्णय उत्तरप्रदेश में चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया है। उन्होंने केन्द्र को चुनौती दी कि वह सच्चर आयोग और रंगनाथ मिश्रा समिति की सिफारिशों को लागू करके दिखाए।

 

वहीं, भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कोटा के भीतर कोटा कांग्रेस का खतरनाक राजनीतिक खेल है। यह विभिन्न समुदायों और जातियों को गृह युद्ध की ओर ढकेल सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने कल देर रात किए निर्णय में अन्य पिछड़े वर्गो के 27 प्रतिशत आरक्षण में अल्पसंख्यकों को 4. 5 प्रतिशत कोटा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। संविधान के अनुच्छेद 2 सी के अंतर्गत अल्पसंख्यकों में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी आते हैं।

 

जद (यू) अध्यक्ष ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 52 प्रतिशत किया जाना चाहिए क्योंकि 1931 की जनगणाना के आधार पर ओबीसी का कोटा तय किया गया था और उस समय ओबीसी की आबादी 52 प्रतिशत थी। जारी जद (यू) अध्यक्ष ने कहा कि संविधान के तहत ओबीसी की जनसंख्या के अनुरुप आरक्षण दिया जाना चाहिए और यह 52 प्रतिशत होता है। उन्होंने कहा कि हम यह मांग करते हैं कि ओबीसी कोटा 52 प्रतिशत किए जाने के लिए संविधान में संशोधन किया जाए।

 

उधर, नकवी ने कहा कि भाजपा मुसलमानों का सामाजिक-आर्थिक विकास करने के उपाए किए जाने के पक्ष में है, लेकिन कांग्रेस पिछले 60 साल से मुस्लिम समुदाय का महज़ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।
ओबीसी कोटा के भीतर अलपसंख्यकों को कोटा दिए जाने को उन्होंने मुसलमानों का राजनीतिक शोषण किए जाने के लिए कांग्रेस की ओर से दिया गया लालीपॉप बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसकी संप्रग सरकार द्वारा मुसलमानों और संविधान के साथ किया गया यह सबसे बड़ा धोखा है। नकवी ने कहा कि कांग्रेस ने कोकीन का इंजेक्शन लगा कर मुस्लिम वोट के अपहरण का षडयंत्र रचा है।

 

दूसरी ओर, शरद ने कहा कि आरक्षण पेचीदा विषय है। कांग्रेस नीत संप्रग ने बंटवारा किया है, हक नहीं दिया है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए यह फैसला किया है। हम लगातार मांग करते रहे हैं कि सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्र समिति की रिपोर्ट पर सरकार कार्यवाही रिपोर्ट पेश कर संसद में इस पर चर्चा कराए। उन्होंने कहा कि सरकार ने जाति आधारित जनगणना के बीच में ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे में कटौती कर दी।

 

अगर केंद्र सरकार की मुसलमानों को आरक्षण देने की इच्छा है तो सच्चर समिति और रंगनाथ समिति की सिफारिशों पर चर्चा कराये और उस पर अमल करे।  सरकार के फैसले को उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले ‘चुग्गा’ डालने जैसा करार देते हुए शरद यादव ने कहा कि ओबीसी कोटा में क्रीमी लेयर को आरक्षण असंवैधानिक है, इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

(एजेंसी)