ओलंपिक में अपनी काबिलियत साबित करने उतरेंगे भारतीय पहलवान

Last Updated: Wednesday, July 11, 2012 - 14:13

नई दिल्ली : पहलवान सुशील कुमार ने जब चार साल पहले बीजिंग ओलम्पिक में 56 सालों के बाद कुश्ती का कांस्य पदक रपेचेज के जरिये जीता था तो उसे भाग्यशाली विजेता माना गया था लेकिन दो सप्ताह बाद लंदन ओलम्पिक में भारत के पांच पहलवानों को बेहतर प्रदर्शन कर यह साबित करना होगा कि वे कुश्ती में पदक के वाकई हकदार हैं।
महिला पहलवान गीता सहित भारतीय प्रदर्शन का दारोमदार एक बार फिर महाबली सतपाल के शिष्य सुशील कुमार और योगेश्वर दत पर जाता है दोनों ने बीजिंग ओलम्पिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया था और उनहे अनेक अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगताओं का अनुभव है। दोनों का यह लगातार तीसरा ओलम्पिक होगा।
ओलम्पिक खेलों का कांस्य पदक जीतने वाले सुशील ने उसके बाद से पिछले चार सालों में इस बार के इस महाकुंभ के लिये खास तैयारियां की हैं जबकि उसका बचपन का दोस्त योगेश्वर दत अपनी बीजिंग ओलम्पिक की पराजय कभी भी नहीं भुलाना चाहेगा। वह क्वार्टर फाइनल में हार जाने से पदक जीतने चूक गया था लिहाजा वह उस टीस को खत्म करने के लिये इस बार कोई कमी नहीं रखना चाहेगा। इसके अलावा उसका संभवत यह अन्तिम ओलम्पिक होगा।
राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता योगेश्वर की टीस अनुमान इसी से होता है कि उसने एक बार कहा था कि अगर वह बीजिंग ओलम्पिक में पदक जीत लेता तो शायद वह इस लंदन नहीं जा रहा होता।
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित महाबली सतपाल ने अपने शिष्य के बारे में कहा कि पिछले चार सालों में हमने ओलम्पिक खेलों के लिये अपने पहलवानों को आधुनिक तरीाके से प्र्शिक्षण दिलाया है । उनकी ‘‘स्पीड और स्टैमिना ’’ पर पूरा पूरा ध्यान दिया है और उनको सिखाया है कि कैसे सामने वाले की कमजोरी को भांपते हुए आक्रमण करना है । सुशील कुमार :66किलो:के बारे में उनका मानना है कि वह पैरो की लडाई लडता है और एक बार विरोधी के पैर पकड ले तो उसे आसानी छोडता नहीं है। वहीं योगेश्वर (60किलो) सामने से वार करता है उसकी कलाजंग और धोबी पछाड देखने लायक होती है । इसके अलावा अमित की खास बात यह है कि वह ‘‘काउंटर अटैक’’ में माहिर है।
सतपाल ने कहा लंदन ओलम्पिक में भाग लेने वाले ये पहलवान इस समय अमेरिका में ट्रैनिंग हासिल कर रहे है और रविवार को लौटेगे जबकि स्वदेश लौटने के बाद ये पांचों एक बार अ5यास के लिये रूस जाएगे और वहीं से लंदन ओलम्पिक के लिये रवाना होंगे।
अमित के अलावा नरसिंह यादव और महिला पहलवान गीता का यह भले ही यह पहला ओलम्पिक है लेकिन तीनों काफी प्रतिभाशाली हैं । 19 साल के अमित ने एशियाई क्वालीफाई टूर्नामेंट में 55 किलों वजन वर्ग का स्वर्ण पदक जिस आक्रामक तरीके से जीता था उससे उसके ओलम्पिक में शारदार प्रदर्शन की उम्मीद बन गयी थी।
महाराष्ट्र के नरसिंह पंचम यादव ने 74 किलो फ्री स्टाइल में अपने क्वालीफाई प्रतियोगिता में बहुत बडे पहलवानों हराया था जबकि भारत के लिये ओलम्पिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला पहलवान गीता फोगट (55किलो) के लिये भी काफी चुनौती है वह भी काफी उलटफेर करने की सक्षम है। (एजेंसी)



First Published: Wednesday, July 11, 2012 - 14:13


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