खास मुद्दे
पंजाब: कई ज्‍वलंत मुद्दे तय करेंगे सियासत का रुख

पंजाब विधानसभा के इस बार के चुनाव में कई ज्लवंत मुद्दे है जो अहम होंगे। अकाली-बीजेपी गठबंधन की इस सरकार में 75 हजार करोड़ का ऋण हो गया है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। दूसरी तरफ धान घोटाले का मुद्दा भी चुनाव में अहम होगा जिसका आरोप शिरोमणि अकाली दल के नेता जगतार सिंह राजीना के बेटे मंदीप सिंह बरार पर लगा है। यह घोटाला 18 करोड़ रुपये का है। इस बार के चुनाव में 6 करोड़ का शगुन घोटाले के वजह से भी पंजाब सरकार की भारी किरकिरी हुई है। शिरोमणि अकाली दल को उस मौके पर भी शर्मसार होना पड़ा है जब एसी बस के मामले में लोकायुक्त जांच की अनुमित दे दी गई है। पंजाब में हर बार एंटी-इंकमबेंसी फैक्टर का योगदान रहा है और इस भी माना जा रहा है कि यह चुनाव में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। इस सरकार पर कई बार आरोप लगे हैं कि यह किसानों के मुद्दे को सुलझा पाने में पूरी तरह नाकाम रही है। लिहाजा कांग्रेस इस बार के चुनाव में यह मुद्दा भुनाने की पुरजोर कोशिश करेगी।


भारत के उत्तर पश्चिम में पंजाब राज्य की सीमायें पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में जम्मू और कश्मीर राज्य, उत्तर पूर्व में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में हरियाणा और राजस्थान राज्य हैं। `पंजाब` शब्द फारसी के `पंज` से लिया गया है जिसका अर्थ होता है `पांच` और `आब` जिसका अर्थ होता है `पानी` के मेल से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ `पांच नदियों का क्षेत्र` है। इसलिए इसे पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है।
ये पांच नदियां हैं-सतलुज नदी,व्यास नदी,रावी नदी,चिनाव नदी और झेलम नदी। भूमि उपजाऊ होने और पानी की अच्छी व्यवस्था होने के कारण एक मुहावरा प्रयोग में लाया जाता है कि पंजाब में `धरती सोना उगलती` है। पंजाब का क्षेत्रफल 50,362 वर्ग किलोमीटर है। पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ है जो संयुक्त रूप से पंजाब और हरियाणा प्रदेश की राजधानी है। और 2001 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 243.59 लाख है। राज्य में साक्षरता 52 प्रतिशत है। पंजाब में मुख्य रूप से पंजाबी और हिन्दी भाषा बोली जाती हैं। राज्य के मुख्य नगर अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला हैं।


पंजाब का अधिकांश हिस्सा समतल मैदानी है, जो पूर्वोत्तर में समुद्र तल से लगभग 275 मीटर से दक्षिण-पश्चिम में लगभग 168 मीटर की ऊँचाई की अनुवर्ती ढलान वाला है। भौतिक रूप से इस प्रदेश को तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है। पूर्वोत्तर में 274-914 मीटर की ऊँचाई पर स्थित शिवालिक पहाड़ियाँ राज्य का बहुत ही छोटा हिस्सा हैं। दक्षिण में शिवालिक पहाड़ियाँ संकरे और लहरदार तराई क्षेत्र के रूप में फैली हुई हैं, जिनसे होकर कई मौसमी धाराएँ बहती हैं। इनका स्थानीय नाम चोस है और इनमें से कई मैदानों में किसी नदी में शामिल हुए बिना ही समाप्त हो जाती हैं। तीसरा क्षेत्र जलोढ़ उपजाऊ मिट्टी वाला विशाल समतल मैदान है। प्राचीन समय में पंजाब भारत और ईरान का क्षेत्र था। यहाँ मौर्य, बैक्ट्रियन, यूनानी, शक, कुषाण, गुप्त आदि अनेक शक्तियों का उत्थान और पतन हुआ। पंजाब मध्यकाल में मुस्लिम शासकों के अधीन रहा। यहाँ सबसे पहले गज़नवी, ग़ोरी, ग़ुलाम वंश, ख़िलजी वंश, तुग़लक,लोदी और मुग़ल वंश के शासकों ने यहाँ राज किया।


15वीं और 16वीं शती में गुरु नानकदेव जी की शिक्षाओं से भक्ति आंदोलन ने ज़ोर पकड़ा। सिख पंथ ने एक धार्मिक और सामाजिक आंदोलन को जन्म दिया, मूल रूप से जिसका उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों को दूर करना था। दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने सिखों को `खालसा पंथ` के रूप में संगठित किया। मुग़लों के दमन और अत्याचार के ख़िलाफ़ सिक्खों को एकत्र करके `पंजाबी राज` की स्थापना की। पंजाब में ही बनवारीदास ने उत्तराडी साधुओं की मंडली बनाई थी। एक फ़ारसी लेखक ने लिखा है कि `महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब को `मदम कदा`(`बाग़-ए-बहिश्त`)` अर्थात स्वर्ग में बदल दिया था। उनके देहांत के बाद अंग्रेज़ों की साज़िशों से यह साम्राज्य समाप्त हो गया। 1849 में दो युद्धों के बाद पंजाब ब्रिटिश साम्राज्य में आ गया था।

गांधी जी के स्वतंत्रता आन्दोलन से पहले ही ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ पंजाब में संघर्ष प्रारम्भ हो गया था। स्वतंत्रता संग्राम में लाला लाजपतराय ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के नागरिकों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। देश हो या विदेश, पंजाब बलिदान में सबसे आगे रहा। विभाजन का कष्ट भी उठाना पड़ा जिसके कारण बड़े पैमाने पर रक्तपात और विस्थापन का दंश उठाया और पुनर्वास के साथ साथ राज्य के नये सिरे से संगठित करने की चुनौती का बख़ूबी सामना किया।

पूर्वी पंजाब की आठ रियासतों को मिलाकर नया राज्य `पेप्सू` बनाया गया और `पूर्वी पंजाब राज्य संघ, पटियाला` का निर्माण करके पटियाला को इसकी राजधानी बनाया गया। 1956 में `पेप्सू` को पंजाब में मिला दिया गया। 1966 में पंजाब के कुछ भाग से `हरियाणा` राज्य का निर्माण किया गया। पंजाब की अर्थव्यवस्था में उत्पादन और वाणिज्यिक कृषि की प्रमुखता है और यहाँ विभिन्न लघु व मध्यम आकार के उद्योग हैं। भारत के मुख्य राज्यों में से पंजाब में प्रति व्यक्ति आय सबसे अधिक है। भारत के कुल क्षेत्रफल के मात्र 1.6 प्रतिशत भू-भाग वाला पंजाब लगभग भारत के कुल अन्न उत्पादन का 12 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है। पंजाब कृषि प्रधान राज्य है। पंजाब की भूमि बहुत ही उपजाऊ है। यहाँ गेंहू और चावल की फ़सल मुख्य रूप से होती है्। पंजाब राज्य में दिश के भौगोलिक क्षेत्र के सिर्फ़ 1.5 प्रतिशत भाग में देश के गेहूँ के उत्पादन का 22 प्रतिशत, चावल का 12 प्रतिशत और कपास की भी 12 प्रतिशत पैदावार का उत्पादन करता है। आजकल पंजाब में फ़सल गहनता 186 प्रतिशत से भी अधिक है। लोकगीत, प्रेम और युद्ध के नृत्य मेले और त्योहार, नृत्य, संगीत तथा साहित्य इस राज्य के सांस्कृतिक जीवन की विशेषताएं हैं। पंजाबी साहित्य की उत्पत्ति को 13 वीं शताब्दी के मुसलमान सूफी संत शेख़ फरीद के रहस्यवादी और धार्मिक दोहों तथा सिक्ख पंथ के संस्थापक, 15वीं-16वीं शताब्दी के गुरु नानक से जोड़ा जा सकता है। जिन्होंने पहली बार काव्य अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में व्यापक रुप से पंजाबी भाषा का उपयोग किया। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पंजाबी साहित्य को समृद्ध बनाने में वारिस शाह की भूमिका अतुलनीय है। 20वीं शताब्दी के आरंभ में कवि व लेखन भाई वीरसिंह तथा कवि पूरण सिंह और धनी राम चैत्रिक के लेखन के साथ ही पंजाबी साहित्य ने आधुनिक काल में प्रवेश किया।
Previous  Next 
 
खास मुद्दे स्‍लाइडशो
यूपीमुद्दों में उलझा यूपी का मतदाता
उत्तराखंडउत्तराखंड में लोकायुक्त का जाप
पंजाबपंजाब: कई ज्‍वलंत मुद्दे तय करेंगे सियासत का रुख
तस्‍वीरों में चुनाव और...
यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत के बाद लखनऊ में जश्‍न मनातीं पार्टी की महिला कार्यकर्ता।
यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत के बाद लखनऊ में जश्‍न मनातीं पार्टी की महिला कार्यकर्ता।
ज्‍यादा देखें»
पोल
क्‍या यूपी विधानसभा चुनाव में इस बार शहरी मतदाताओं के ज्‍यादा वोटिंग से मतदान प्रतिशत बढ़ा है?
हां   नहीं   कह नहीं सकते