राजस्थान और तेलंगाना में मतदान आज, सुबह 8 बजे से डाले जाएंगे वोट

राजस्थान में 199 सीटों पर मतदान होने जा रहा है. वहीं, नए राज्य के गठन के बाद पहली बार तेलंगाना की 119 सीटों पर मतदान होगा.

राजस्थान और तेलंगाना में मतदान आज, सुबह 8 बजे से डाले जाएंगे वोट
राजस्थान में पोलिंग बूथ के लिए रवाना होने से पहले. ( फोटो साभार : PTI)
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नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव 2018 के आखिरी चरण में शुक्रवार को राजस्थान और तेलंगाना में मतदान किए जाएंगे. राजस्थान में 199 सीटों के लिए मतदान होगा, जबकि तेलंगाना में 119 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. निर्वाचन विभाग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. मतदान सुबह 8 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा.

राजस्थान की बात करें तो भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इस राज्य में सुरक्षा चाक चौबंद है. राज्य में 20 लाख से अधिक मतदाता पहली बार वोट डालेंगे. मतदान के लिए दो लाख से ज्यादा ईवीएम-वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा और ईवीएम के साथ-साथ पूरे राज्य में वीवीपैट मशीनों का उपयोग पहली बार हो रहा है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने यहां संवाददाताओं को बताया कि राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं. मतदान निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण ढंग से करवाने का जिम्मा 1,44,941 जवानों पर होगा जिनमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की 640 कंपनियां शामिल हैं. राज्य में कुल 387 नाके और चैक पोस्ट लगाए गए हैं.

राजस्थान में 199 विधानसभा सीटों के लिए 51687 मतदान केंद्रो पर होगी वोटिंग

उन्होंने बताया कि 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए कुल 4,74,37,761 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इनमें 2,47,22,365 पुरुष तथा 2,27,15,396 महिला मतदाता है. इनमें से पहली बार मतदान कर रहे युवा मतदाताओं की संख्या 20,20,156 हैं.

राज्य के 199 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से कुल 2,274 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इंडियन नेशनल कांग्रेस से 194, भारतीय जनता पार्टी से 199 उम्मीदवार, बहुजन समाज पार्टी से 189, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से 01, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से 16 एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से 28 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं जबकि 817 गैर मान्यता प्राप्त दलों के प्रत्याशी एवं 830 निर्दलीय उम्मीदवार हैं. 

राजस्थान में विधानसभा की कुल सीटों की संख्या 200 है लेकिन एक सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है.कुमार ने बताया कि अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह का 29 नवम्बर को निधन हो गया है. वहां का चुनाव स्थगित कर दिया गया है. राज्य के चार लाख से ज्यादा दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा की गयी है. उनको मतदान के लिए घर से लाने की व्यवस्था की गयी है. 259 मतदान केंद्रों का जिम्मा महिलाओं के हवाले होगा जहां मतदान दलकर्मी, सुरक्षाकर्मी इत्यादि सभी महिलाएं होंगी. इस बीच विभाग को सी-विजिल एप से अब तक 3,784 से अधिक शिकायतें मिलीं जिनमें से 3,098 शिकायतें सही पाई गई है.

वहीं, तेलंगाना विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए अग्निपरीक्षा होंगे क्योंकि 2014 के विपरीत इस बार यह पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है. सात दिसंबर यानी शुक्रवार को होने वाला मतदान केन्द्र में सत्तारूढ पार्टी के लिए 2019 लोकसभा चुनावों से पहले दक्षिण भारतीय राज्य में जड़ें मजबूत करने का मौका भी होगा.
वर्ष 2014 में भाजपा, तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी और उसने कुल 119 में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी. जीती गईं सभी पांच सीटें उप्पल, मुशीराबाद, अंबरपेट, गोशामहल और एलबी नगर हैदराबाद में आती हैं.

विधानसभा की ज्यादातर सीटों पर सत्तारूढ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआएस) और कांग्रेस नीत महागठबंधन ‘प्रजाकुटमी’ के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है लेकिन भाजपा भी 2014 में बने देश के सबसे नये राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और अपनी सीटों की संख्या बढाने के प्रयास में है. कांग्रेस नीत गठबंधन में टीडीपी, तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) और भाकपा के भी शामिल होने से इसे और मजबूती मिली है. चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि कुछ सीटों पर भाजपा भी कांग्रेस की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है.

चुनाव मुख्य रूप से स्थानीय मुद्दों पर लड़ा रहा है और टीआरएस सरकार के कामकाज को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. टीआरएस ने तेलंगाना के भावुक मुद्दे को भुनाते हुए 2014 में बहुमत हासिल किया था. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘भाजपा की तेलंगाना में मजबूत पकड़ है. पारंपरिक रूप से, हमारा मतदान प्रतिशत हैदराबाद क्षेत्र में ज्यादा रहा है. इस बार हमारे पक्ष में मतदान प्रतिशत में निश्चित रूप से बढोत्तरी होगी.’’ 

उनका मानना है कि तेलंगाना की जनता वैचारिक और राजनीतिक रूप से टीआरएस के ‘‘असली विकल्प’’ के रूप में भाजपा की ओर देखेगी और ‘‘टीआरएस विरोधी जगह’’ कांग्रेस नहीं भर पाएगी. राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के अन्य प्रमुख नेताओं ने राज्य में पार्टी के लिए प्रचार किया है.

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने टीडीपी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया था और 45 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से पांच सीटें जीती थीं. टीडीपी ने लड़ी गईं 72 सीटों में से 15 पर जीत हासिल की थी. हालांकि उसके 12 विधायक टीआरएस और बाद में एक कांग्रेस में शामिल हो गये थे. टीआरएस ने 63 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. वर्ष 2014 लोकसभा चुनावों में, टीआरएस ने 17 में से 11 सीटें जीती थीं.

(इनपुट-भाषा)

 

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