Lalit Fulara

मां नंदा को कुमाऊं लाया था यह राजा, जीता था कैलाश मानसरोवर

मां नंदा को कुमाऊं लाया था यह राजा, जीता था कैलाश मानसरोवर

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सम्मुख सभागार में हाल ही में 'बाज बहादुर चंद' नाटक देखने का मौका मिला. बाज बहादुर चंद सिर्फ एक नाटक का पात्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के इतिहास का अभिन्न हिस्सा है.

उसकी झूमती आंखों ने मुझे 'ठग' लिया

उसकी झूमती आंखों ने मुझे 'ठग' लिया

यह कहानी ज़रा पुरानी है. इतनी पुरानी नहीं कि आदम के ज़माने की सैर करा लाये. इतनी सच्ची भी नहीं कि झूठ के लिए जगह ही न हो. फिल्म सिटी से चार कदम की दूरी पर डिजिटल युग का मेट्रो स्टेशन है.

जिंदगी को सिर्फ काटिए नहीं, इसे यूं सहज और सुंदर बनाइए!

जिंदगी को सिर्फ काटिए नहीं, इसे यूं सहज और सुंदर बनाइए!

'जिंदगी कैसी चल रही है?' 'बस कट रही है।'

वो दिन दूर नहीं जब रोबोट वोट डालेंगे, सरकारें चुनेंगे और नागरिक अधिकारों की मांग करेंगे

वो दिन दूर नहीं जब रोबोट वोट डालेंगे, सरकारें चुनेंगे और नागरिक अधिकारों की मांग करेंगे

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता) क्या इंसानों को अपना गुलाम बना सकती है? कृत्रिम बुद्धि की वजह से क्या मनुष्यता का विनाश हो सकता है.

मेरे पांव में चमचमाते शहर की बेड़ियां, आंगन वीरान और गांव खाली हैं...

मेरे पांव में चमचमाते शहर की बेड़ियां, आंगन वीरान और गांव खाली हैं...

शहर हमें अपनी जड़ों से काट देता है. मोहपाश में जकड़ लेता है. मेरे पांव में चमचमाते शहर की बेड़ियां हैं. आंगन विरान पड़ा है. वो आंगन जिसमें पग-पैजनिया थिरकती थीं.

ताकि पेड़ों की छांव बनी रहे

विकास के नाम पर जहां एक तरफ हम पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के लिए 'कुल्हाड़ी' उठाए तत्पर हैं। वहीं, दूसरी तरफ विभिन्न शहरों में कुछ हाथ पेड़ों के संरक्षण के लिए मुठ्ठी बांधे बुलंद हैं। मेरी दिलचस्पी ऐस

दवा में 'ब्रांड' के नाम पर लूट का काला कारोबार

दवा में 'ब्रांड' के नाम पर लूट का काला कारोबार

दवाएं हमारे अनमोल जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन, जब इन दवाओं में घालमेल होने लगे, कालाबाजारी का साया मंडराने

ट्रेड फेयर में पहली बार कमोडिटी मार्केट की स्टॉल, जागरुकता के लिए क्विज कॉम्पटिशन

ट्रेड फेयर में पहली बार कमोडिटी मार्केट की स्टॉल, जागरुकता के लिए क्विज कॉम्पटिशन

नई दिल्ली: पैंतीसवें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में इस साल पहली बार सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) ने अपनी स्टॉल लगाई है। सेबी ने लोगों को कमोडिटी और शेयर बाजार के

आखिर क्यों उदासीन हो गई है पुलिस....?

 पुलिस अपनी छवि कब सुधारेगी? या पुलिस की छवि कब सुधरेगी?

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