Chinmay Mishra

गांधी@150: बड़े कमाल की थी पत्रकार गांधी की शख्सियत

गांधी@150: बड़े कमाल की थी पत्रकार गांधी की शख्सियत

“भाषण स्वातंत्र्य, सभा सम्मलेन की स्वतंत्रता और मुद्रण स्वातंत्र्य इन तीनों अधिकारों की पुनः स्थापना लगभग पूर्ण स्वराज्य के सामान है.”

गांधी के विरोध की एक ही वजह है कि वे सबके हैं किसी एक के नहीं

गांधी के विरोध की एक ही वजह है कि वे सबके हैं किसी एक के नहीं

‘‘इस बात से बड़ी और कोई उपलब्धि नहीं है कि लोग हमारी अच्छाई तक को हिकारत की नजर से देखें और हम तब भी विचतिल न हों. -मरकस ओरेलियस

उपवासों की नाकामी के दौर में गांधी के उपवास दर्शन को समझना जरूरी है

उपवासों की नाकामी के दौर में गांधी के उपवास दर्शन को समझना जरूरी है

प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी सानंद) की अविरल गंगा की मांग को लेकर चल रहे अनशन के 111वें दिन मृत्यु हो गई.

#Gandhi150: गांधी जी को संसदीय लोकतंत्र तो चाहिए था, लेकिन सत्य और अहिंसा की कीमत पर नहीं

#Gandhi150: गांधी जी को संसदीय लोकतंत्र तो चाहिए था, लेकिन सत्य और अहिंसा की कीमत पर नहीं

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही देश भर में अगले वर्ष मई में होने वाले आम चुनावों की तैयारी और रणनीति बनने-बिगड़ने का दौर प्रारंभ हो गया है.

#Gandhi150: बीसवीं सदी के दो ही अविष्कार हैं महात्मा गाँधी और परमाणु बम

#Gandhi150: बीसवीं सदी के दो ही अविष्कार हैं महात्मा गाँधी और परमाणु बम

व्यक्ति कितना व्यापक हो सकता है, कितना सर्वज्ञ हो सकता है और इस सबके रहते कितना अकेला भी हो सकता है, इसका सर्वश्रेष्ठ या कहें तो एकमात्र उदाहरण

धारा 377 के खत्म होने से हर अल्पसंख्यक तबके को मिली मौलिक अधिकारों की गारंटी

धारा 377 के खत्म होने से हर अल्पसंख्यक तबके को मिली मौलिक अधिकारों की गारंटी

‘‘दासता का सबसे बुरा रूप ग्लानि की दासता है, क्योंकि तब लोग अपने में विश्वास खोकर निराशा की जंजीरों में जकड़ जाते हैं.’’ 

पाताल में समाती नैतिकता

पाताल में समाती नैतिकता

सोचा था, अब कुछ समय तक भारत के बुनकरों, छपाइगरों और तमाम शिल्पकारों की स्थितियों, उनकी आर्थिक बर्बादी को लेकर लिखूंगा! किसानों की बदहाली पर बातचीत करेंगे!

केरल बाढ़: क्या भगवान ही नाराज हैं? आखिर कौन जिम्मेदार है इस प्रलय के लिए...

केरल बाढ़: क्या भगवान ही नाराज हैं? आखिर कौन जिम्मेदार है इस प्रलय के लिए...

तभी पानी की कुछ बूंदें मेरे माथे पर पड़ीं, ‘‘बारिश शुरू हो गई है, सर निकल चलिए’’ साथी इंजीनियरों ने कहा,

जो बच्चे हमारे नहीं हैं

जो बच्चे हमारे नहीं हैं

‘‘एक अधेड़ उम्र औरत ने अपनी तीनों बेटियों सहित  कीटनाशक खा लिया’’ नहीं तो क्या अमर फल खाती  कीड़े - मकौड़े से बदतर जिंदगी  और विस्थापित करने नाचने वाले 

कबीर : प्रेम न खेतों नीपजै

कबीर : प्रेम न खेतों नीपजै

हद तपे तो औलिया, बेहद तपे फकीर. हद बेहद दोनूं तपे, बाको नाम कबीर ..

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