Jairam Shukla

 'श्रीनिवास तिवारी' अष्टधातुई देवों से अलग एक जन नेता

'श्रीनिवास तिवारी' अष्टधातुई देवों से अलग एक जन नेता

पिछले दो दशकों में पहली बार ऐसा होगा जब श्रीनिवास तिवारी का जन्मदिन बिना उनकी मौजूदगी के आसन्न विपन्नता के साथ मनाया जाएगा. तिवारीजी कांग्रेस के कद्दावर नेता थे.

हिंदी के दांत, खाने के कुछ दिखाने के कुछ

हिंदी के दांत, खाने के कुछ दिखाने के कुछ

दिलचस्प संयोग है कि हिंदी पक्ष हर साल पितरपक्ष के साथ या आगे पीछे आता है.

गणेश उत्सव के बहाने शिव के समाजवाद की सैर

गणेश उत्सव के बहाने शिव के समाजवाद की सैर

जैसा कि पिछले साल "अगले बरस तू लौटकर आ" का वायदा किया था, गणपत बप्पा घर-घर पधार गए. क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश आज से गणपति मय गया. बडे गणेशजी, छोटे गणेशजी, मझले गणेशजी.

कृष्ण: मुक्ति संघर्ष के महानायक

कृष्ण: मुक्ति संघर्ष के महानायक

सावन और भादौं तिथि-त्योहारों के महीने हैं. यह सिलसिला कार्तिक के डिहठोन (देवउठनी एकादशी) तक चलता है.

...क्योंकि ध्यानचंद हॉकी के 'भगवान' नहीं बने!

...क्योंकि ध्यानचंद हॉकी के 'भगवान' नहीं बने!

भारतीय इतिहास में दो महापुरुष ऐसे भी हैं जो भारत रत्नों से कई, कई, कई गुना ज्यादा सम्मानित और लोकमानस में आराध्य हैं. प्रथम हैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस और दूसरे मेजर ध्यानचंद.

अटलजी और गठबंधन धर्म: लोकतंत्र 51 बनाम 49 का खेल नहीं

अटलजी और गठबंधन धर्म: लोकतंत्र 51 बनाम 49 का खेल नहीं

भारतीय लोकतंत्र में गठबंधन की राजनीति की विवशता को गठबंधन धर्म विशेषता में बदलने का जो

आजादी के 71 साल: न हो कमीज तो पांवों से पेट ढंक लेंगे

आजादी के 71 साल: न हो कमीज तो पांवों से पेट ढंक लेंगे

लोकभाषा के बड़े कवि कालिका त्रिपाठी ने कभी रिमही में एक लघुकथा सुनाई थी. कथा कुछ ऐसी थी- दशहरे के दिन ननद और भौजाई एक खेत में घसियारी कर रही थी. घास काटते-काटते बात चल पड़ी..

शिवमंगल सिंह सुमन: कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

शिवमंगल सिंह सुमन: कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

आज राष्ट्रकवि डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन की जयंती है. सुमनजी, दिनकरजी की तरह ऐसे यशस्वी कवि थे जिनकी हुंकार से राष्ट्रअभिमान की धारा फूटती थी.

अपन के गुरुदेव तो बजरंग बली

अपन के गुरुदेव तो बजरंग बली

गोस्वामी जी कह गए.. अउर देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्व सुख करई...गोसाईं जी के लिए बजरंगबली देवता, ईश्वर नहीं बल्कि गुरु हैं.

 'नीरज' स्मृति शेष: कुछ सपनों के मर जानें से जीवन नहीं मरा करता है..!

'नीरज' स्मृति शेष: कुछ सपनों के मर जानें से जीवन नहीं मरा करता है..!

नीरज जी दिल में उतर जाने वाले साहित्यिक मनीषी थे. कवि सम्मेलनों के गैंगबाजी वाले दौर में भी, वे वैसे के वैसे ही रहे जैसे दिनकर, बच्चन के जमाने में थे.

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