निदा रहमान

निर्भया कांड के 5 साल भी कुछ नहीं बदला, अब भी दिल्ली में लगता है डर...

निर्भया कांड के 5 साल भी कुछ नहीं बदला, अब भी दिल्ली में लगता है डर...

निर्भया हादसे के बाद आनन-फानन में सरकारों ने कई गाइडलाइन जारी की और महिला सुरक्षा के लिए कदम उठाए. लेकिन वह उठाए गए कदम वहीं ठहर गए और उसके बाद हालात वही हो गए जैसे 16 दिसबंर की उस काली रात के पहले थे.

मासूमों के प्रति कोई इतना वहशी कैसे हो सकता है?

मासूमों के प्रति कोई इतना वहशी कैसे हो सकता है?

16 दिसंबर को पूरा देश निर्भया कांड की 5वीं बरसी मनाएगा. दिल्ली में निर्भया के साथ जो दरिंदगी हुई उससे पूरा देश हिल गया, निर्भया के दोषियों को फांसी की सज़ा भी हुई, लेकिन इन पांच सालों में बदला कुछ भी नहीं है. 

क्या हम महिला हिंसा को लेकर पेरू जैसे छोटे देश की मॉडलों से सबक लेंगे!

क्या हम महिला हिंसा को लेकर पेरू जैसे छोटे देश की मॉडलों से सबक लेंगे!

देश में 100 साल से लेकर डेढ़ साल की बच्ची तक बलात्कार का शिकार होती हैं और लोग चर्चा तक नहीं करते. फुटपाथ पर बलात्कार हो रहा होता है और लोग आंखें मूंदकर निकल जाते हैं. किसी के घर से महिला के पिटने की आवाज़ आती है तो लोग कानों में तकिया लगाकर सोते जाते हैं.

दिनदहाड़े सड़क किनारे हुए बलात्कार को देखने वालों ने अपनी पत्नी, बेटी, मां से क्या कहा होगा!

दिनदहाड़े सड़क किनारे हुए बलात्कार को देखने वालों ने अपनी पत्नी, बेटी, मां से क्या कहा होगा!

एक नौजवान लड़का एक लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाता है. लेकिन यह बलात्कार किसी बंद कमरे में नहीं, अंधेरी रात में नहीं, किसी बस में नहीं, कार में नहीं, जंगल में नहीं, सुनसान इलाके में नहीं बल्कि सरेआम दिनदहाड़े रेलवे स्टेशन के पास भीड़भाड़ वाली सड़क के किनारे फुटपाथ पर हुआ है.

#MeToo: पांच साल की उम्र में मुझे नहीं पता था 'बैड टच' या 'गुड टच'

#MeToo: पांच साल की उम्र में मुझे नहीं पता था 'बैड टच' या 'गुड टच'

सोशल मीडिया पर #MeToo अभियान चल रहा है. बहुत से लोगों को पता ही नहीं है कि आखिर इस अभियान का मतलब क्या है. दरअसल ये अभियान हॉलीवुड एक्‍ट्रेस एलिसा मिलानो ने शुरू किया है.  #MeToo अभियान के तहत दुनियाभर की महिलाएं अपने साथ हुई यौन शोषण की घटनाओं का खुलासा कर रही हैं. #MeToo के जरिए महिलाएं अब खुलकर कह रही हैं कि हां मैं भी. लेकिन क्या इतना आसान है ये बोलना कि मैं भी यौन शोषण का शिकार हुई हूं.

डियर आरुषि, वक़्त तुम्हारे क़ातिल को ज़रूर सज़ा देगा

डियर आरुषि, वक़्त तुम्हारे क़ातिल को ज़रूर सज़ा देगा

आरुषि, तुम चलीं गईं लेकिन तुम्हारा मासूम चेहरा अब भी आंखों के सामने घूमता है. 14 साल की मासूम बच्ची को इतनी बेहरमी से क्यों मारा गया?

बीएचयू में छात्राओं का गुस्‍सा लंबी खामोशी के बाद का तूफान है...

बीएचयू में छात्राओं का गुस्‍सा लंबी खामोशी के बाद का तूफान है...

बीएचयू में छात्राएं जो मांगे कर रही थीं उन्हें यूनिवर्सिटी के कुलपति बड़ी आसानी से पूरा कर सकते थे. लेकिन उन्होंने शायद मामले की गंभीरता को नहीं समझा और यूनिवर्सिटी में पुलिस बुलाकर अपनी ही भद्द पिटवा ली.

ब्‍लू व्‍हेल : इस खूनी खेल से फिलहाल जागरुकता ही बचाव है

ब्‍लू व्‍हेल : इस खूनी खेल से फिलहाल जागरुकता ही बचाव है

गूगल ट्रेंड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ये गेम अभी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में सर्च हो रहा है. नॉर्थ राज्य मणिपुर, नगालैंड, मेघालय, केरल और झारखंड में इसे सबसे ज्यादा सर्च और डाउनलोड किया गया.

इंसान के भेष में घूमते दरिंदों से कैसे महफूज़ हों हमारे बच्चे!

इंसान के भेष में घूमते दरिंदों से कैसे महफूज़ हों हमारे बच्चे!

समाज में घूमते दरिंदों की कोई अलग पहचान तो होती नहीं. वह भी तो साधारण मनुष्य जैसे ही दिखते हैं हमारी आपकी तरह. फिर क्या तरीका है अपने बच्चों को इन दरिंदों से बचाने का.