Pankaj Ramendu

चंदा मामा बहुत दूर के

चंदा मामा बहुत दूर के

एक बार एक मां अपने बच्चे को लेकर एक संत के पास पहुंची.

Opinion: मुझे गंगा के प्रति न प्यार है, न श्रद्धा बल्कि नफरत है

Opinion: मुझे गंगा के प्रति न प्यार है, न श्रद्धा बल्कि नफरत है

भारत में गंगा नदी की तरह नहीं, विचारों की तरह बहती है, संस्कारों की तरह बहती है. इस नदी के किनारे जो भी बसा, उसे इस नदी ने भरपूर दिया.

बिरजू और शंभू को ‘हल’ दीजिए

बिरजू और शंभू को ‘हल’ दीजिए

मदर इंडिया में बिरजू का बाप अपने दूध पीते बच्चे और जवान बीवी को छोड़ कर चला गया और बाद में उसका बेटा जब कुछ नहीं कर पाया तो डाकू बन गया.

Opinion: मास्क पहनने मात्र से प्रदूषण खत्म हो जाता है!

Opinion: मास्क पहनने मात्र से प्रदूषण खत्म हो जाता है!

अगर आप दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर कार चला रहे हैं तो कानों में एफएम पड़ ही जाता होगा.

घने जंगलों के बीच भारत की तीसरी सबसे प्रदूषित दुनिया

घने जंगलों के बीच भारत की तीसरी सबसे प्रदूषित दुनिया

उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला जिससे भारत के चार राज्यों की सीमा जुड़ती है.

पानी का जनरल सफर

पानी का जनरल सफर

बरूनी से गोंदिया की ट्रेन में बैठकर सरजू सिंह अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ जा रहे हैं. ट्रेन के आने में देरी है.

स्टेन ली और कॉमिक्स की दुनिया: सुपर हीरो जिनसे पढ़ना सीखा...

स्टेन ली और कॉमिक्स की दुनिया: सुपर हीरो जिनसे पढ़ना सीखा...

सन नब्बे की बात है. सुबह के कोई 2 बज रहे होंगे. मैं अपनी पढ़ाई में लगा हुआ था. अगले दिन से पांचवी की परीक्षा शुरू होने वाली थी. पिताजी की रात में जगने की आदत थी, तो वो आदत हमारे अंदर भी आ गई.

Pollution : खुद को बचाइए, धरती कहीं नहीं जा रही...

Pollution : खुद को बचाइए, धरती कहीं नहीं जा रही...

फिल्म 'स्वदेश' का एक सीन है- किसी कार्यक्रम के दौरान लाइट चली जाती है. पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है. गांववाले मिलकर भजन गाने लगते हैं.

सबरीमाला विवाद: जिस मंदिर के कपाट बंद हों, उसमें जाना ही क्यों

सबरीमाला विवाद: जिस मंदिर के कपाट बंद हों, उसमें जाना ही क्यों

एक गांव में या शहर में एक आदमी रहता था. धार्मिक था, संवेदनशील था. वो जहां रहता था, उस गांव में एक मंदिर था. अब मंदिर था, तो मंदिर के चौकीदार भी थे.

स्वामी साणंद जैसे समर्पित लोगों का बलिदान ज़ाया नहीं जाना चाहिए

स्वामी साणंद जैसे समर्पित लोगों का बलिदान ज़ाया नहीं जाना चाहिए

पिछले महीने के आखिरी सप्ताह में ही उनसे मिलना हुआ था. तब इस बात की उम्मीद भी नहीं थी कि ये सब इतना जल्दी हो जाएगा. जल्दी वैसे नहीं, क्योंकि पिछले 112 दिनों से वो भूख हड़ताल पर बैठे थे.