पंकज रामेंदु

Assembly Elections : क्या कहता है गुजरात का राजनीतिक इतिहास...

Assembly Elections : क्या कहता है गुजरात का राजनीतिक इतिहास...

शुरुआती दौर में पटेल और क्षत्रिय हर दल में प्रभावी थे. बाद में कांग्रेस के नेता माधवसिंह सोलंकी और झीनाभाई दारजी ने गठबंधन ने एक नया सामाजिक गठबंधन दिया जिसका नाम रहा- क्षाम (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम).

गुजरात चुनाव: GST के खिलाफ उग्र आंदोलन के बाद भी नहीं बदली सूरत की 'सूरत'

गुजरात चुनाव: GST के खिलाफ उग्र आंदोलन के बाद भी नहीं बदली सूरत की 'सूरत'

606 साल पुराना अहमदाबाद शहर भारत का एकमात्र ऐसा शहर है जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया है, इस किलेबंद शहर के 16 विधानसभा क्षेत्रों में से दो ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जमालपुर-खड़िया और दरियापुर जिन पर निगाहें बनी रहती हैं.

Gujarat Elections : 5 कारण जिनसे गुजरात में BJP का किला अभेद्य है...

Gujarat Elections : 5 कारण जिनसे गुजरात में BJP का किला अभेद्य है...

गुजरात में भाजपा की जीत के मिशन को तोड़ पाना बेहद मुश्किल रहा है. गुजरात ने भाजपा को हमेशा से सिर आंखों पर बैठाया है. खासकर पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर गुजरात का रवैया बहुत सकारात्मक रहा है.

Gujarat Election Results: कांग्रेस की 'तरक्की' के 5 कारण...

Gujarat Election Results: कांग्रेस की 'तरक्की' के 5 कारण...

कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में जिस तरह से इस बार गुजरात में जनसंपर्क किया वो कहीं न कहीं कांग्रेस की छवि के विपरीत रहा. राहुल गांधी ज्यादा आक्रामक नजर आए. उनके भाषण में ज्यादा परिपक्वता दिखाई दी.

‘खुशनसीब हूं कि किसी ने मुझ पर एसिड नहीं फेंका..’

‘खुशनसीब हूं कि किसी ने मुझ पर एसिड नहीं फेंका..’

क्या हम जो नारी की शक्ति, नारी की स्वंतत्रता, कानून की बात करते हैं. क्या हम जो बात-बात पर यह कहते नजर आते हैं कि आखिर लड़की क्यों अकेले नहीं जा सकती है. लेकिन क्या हम सभी अपनी बेटियों को घर से बाहर भेजते वक्त डरे हुए नहीं रहते हैं, क्या हम उन्हें ये हिदायत नहीं देते हैं कि ऐसी जगह मत जाना जहां कोई अंजान हो.

भोपाल गैस त्रासदी: पिंटू को नहीं भूलती वो हांफती हुई रात

भोपाल गैस त्रासदी: पिंटू को नहीं भूलती वो हांफती हुई रात

सुबह के तीन बज चुके थे. मामला धीरे धीरे साफ हो गया था टीला जमालपुरा से चंद किमी दूर पर बने यूनियन कार्बाइड से गैस का रिसाव हुआ था जिसने हवा में ज़हर घोल दिया था. लोग अब संभलने की कोशिश कर रहे थे. इसी जद्दोज़हद में सूरज की किरणों ने पड़ना शुरू कर दिया था. पिंटू गीली रजाई को समेटे सो रहा था, उसकी मां ने अब धीरे से गीली रज़ाई को हटा कर घर से लाकर एक कंबल उसे ओढ़ा दिया था.

Book Review : धीरे-धीरे पढ़ें, इतवार को छोटा होने दें

Book Review : धीरे-धीरे पढ़ें, इतवार को छोटा होने दें

अगर गज़ल को माशूक से बात करने का ज़रिया भी माना जाए या विवशता या किसी तरह की मन की कचोट के बाहर निकलने के माध्यम के तौर पर भी देखा जाए तो भी बात एक ही हो जाती है.

बाल दिवस विशेष : क्या हुआ जो नोबिता को ‘पिंक’ कलर पसंद है...

बाल दिवस विशेष : क्या हुआ जो नोबिता को ‘पिंक’ कलर पसंद है...

हमने कपड़ों से लेकर खाने तक, बातों से लेकर सीरियल्स तक सबकुछ स्त्री-पुरुष में बांट दिया है. यहां तक कि रंग भी स्त्रीलिंग और पुल्लिंग होते हैं. अगर कहीं किसी लड़के को गुलाबी रंग पसंद आ गया तो उसे तुरंत बता दिया जाता है कि वह इस रंग को पसंद करके बहुत बड़ी गलती कर रहा है.

Delhi Smog : सीने में जलन और आंखों का तूफान जारी है...

Delhi Smog : सीने में जलन और आंखों का तूफान जारी है...

बताया जाता है कि 'स्मॉग' इस शब्द को सबसे पहले डॉ. हेनरी अंतोइन दे वू ने 1905 में इस्तेमाल किया था.

Book Review : 'जिंदगी लाइव' में टेक टू नहीं होता...

Book Review : 'जिंदगी लाइव' में टेक टू नहीं होता...

तीन दिन और तीन रात की घटनाओं को जोड़कर लिखा गया यह उपन्यास जितनी ईमानदारी के साथ मीडिया की स्थितियों को उघाड़ता है, उतना ही सफल ये मानवीय पहलुओं को समझाने में होता है.

'एक ये भी दीवाली है, रोता हुआ गुलशन हंसता हुआ माली है..'

'एक ये भी दीवाली है, रोता हुआ गुलशन हंसता हुआ माली है..'

'जब भी मैं इन बदसूरत खेतों की बदमस्त फसलों को झूमते हुए देखता हूं, तो मेरा सपना मेरी पलकें नोचने लगता है.

जाने भी दो यारो की फितरत नहीं रही अब

जाने भी दो यारो की फितरत नहीं रही अब

बीते कुछ सालों से कई जातियां आहत होकर देश के राष्ट्रीय राजमार्ग को अपने आंसुओं से गीला कर रही हैं, क्योंकि कोई उन्हें दलित मानने को ही तैयार नहीं हो रहा है. वह लगातार ये बोल रहे हैं कि वह पिछड़े हैं. देश कह रहा है कि नहीं आप विकसित हो रहे हैं. देश विकास कर रहा है.

करवा चौथ... ये आखिर कैसी बेड़ियां ?

करवा चौथ... ये आखिर कैसी बेड़ियां ?

फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे’ में समाज से छिप कर चल रहे प्यार की गहराई को दिखाने के लिए प्रेमी दिनभर भूखा रहता है और फिर रात में दुनिया से छिप कर प्रेमिका के साथ मिल कर व्रत खोलता है.

पहले चुनाव में पूरा देश ही था ‘न्यूटन’ का दंडकारण्य

पहले चुनाव में पूरा देश ही था ‘न्यूटन’ का दंडकारण्य

न्यूटन फिल्म का एक दृश्य 1952 के उस वक्त को जीवित कर देता है जब भारत में पहली बार चुनाव हुए. लेखक और इतिहासविद रामचंद्र गुहा अपनी किताब ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ में बताते हैं कि किस तरह वोट पड़ने से पहले वाली शाम को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने कहा था कि उन्होंने मानव इतिहास में लोकतंत्र का सबसे बड़ा प्रयोग किया है.

दुनिया में ‘राजाराम पु. जोशियों’ की भारी कमी है...

दुनिया में ‘राजाराम पु. जोशियों’ की भारी कमी है...

लगातार वर्चुअल दुनिया में सिमटते जा रहे हम लोग जो प्रतिक्रिया देने की जल्दी में तो हैं, लेकिन हमारा मानवीय पहलू तुलनात्मक होता जा रहा है.

सिनेमा की भाषा और साहित्य की लिपि

सिनेमा की भाषा और साहित्य की लिपि

भारतीय सिनेमा में 'प्यासा' फिल्म को अब तक की सबसे बेहतरीन और खूबसूरत कवितामयी फिल्म के रूप में देखा जाता है. फिल्म में एक गाना है - 'ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनिया' जब ये गाना फिल्माया जा रहा था उस वक्त फिल्म के लेखक अबरार अल्वी किसी कारण से सेट पर मौजूद नहीं थे. साहिर लुधियानवी जो उस दौर के या हिंदी सिनेमा में हर दौर के सबसे उम्दा गीतकार माने जाते हैं, उन्होंने यह गीत लिखा है.

बच्चों को 'पढ़ाएं' न कि सिर्फ कोर्स पूरा कराएं...

बच्चों को 'पढ़ाएं' न कि सिर्फ कोर्स पूरा कराएं...

1813 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में लाया गया चार्टर एक्ट वो शुरुआत थी जिसने हमारे देश में शिक्षा का भट्ठा बैठाना शुरू किया. लॉर्ड मैकाले ने जिस शिक्षा की बात की थी उसके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य ऐसे वर्ग को तैयार करना था जिसे नौकरियों पर रखा जा सके ताकि भारत की जनता पर शासन करने में आसानी हो सके.

कहीं प्रकृति का चक्र ‘शिशुपाल’ की गर्दन तो नहीं उतारने वाला?

कहीं प्रकृति का चक्र ‘शिशुपाल’ की गर्दन तो नहीं उतारने वाला?

2008 में आई ‘दि हैपनिंग’ फिल्म प्रकृति के उस भयानक रूप की कल्पना है जो कई मायनों में अब सच लगने लगी है. लेखक-निर्देशक नाइट श्यामलन की फिल्म हैपनिंग की कहानी का सार ये है कि किस तरह धरती पर मौजूद पेड़ एक साथ मिलकर इंसानों के खिलाफ एक जंग छेड़ देते हैं . वो एक ऐसा ज़हर छोड़ना शुरू कर देते हैं जो आदमी के दिमाग में मौजूद वायरिंग को पूरी तरह बदल कर रख देता है.