Pankaj Ramendu

स्वार्थ के आगे बौनी है पर्यावरण की चिंता

स्वार्थ के आगे बौनी है पर्यावरण की चिंता

गेम ऑफ थ्रॉन्स में एक किरदार है टायरिन लेनिन्सटर. वो एक बौना है, लेकिन सबसे ताकतवर पिता की औलाद है, लेकिन उसके पिताजी उसे अपने खानदान पर एक कलंक मानते हैं.

शिक्षक वो जो ‘कहे ऐसा भी हो सकता है’

शिक्षक वो जो ‘कहे ऐसा भी हो सकता है’

स्कूल में नर्सरी की क्लास चल रही थी. व्यस्त मैडम ने सभी बच्चों को एक शीट और कुछ रंग दिए. शीट पर चांद का चित्र था. सभी बच्चों से कहा गया कि इसमें रंग भरें. बच्चों ने रंग भरना शुरू किया.

खुशियों का पीरियड

खुशियों का पीरियड

अस्सी के दशक में पैदा होने वाले बच्चों को अपने जीवन का एक अनुभव ज़रूर याद होगा. नवीं कक्षा में विज्ञान की पुस्तक में एक अध्याय था. मानव प्रजनन अंग औऱ उनके कार्य.

आजादी के 71 साल: 'खड़िया के घेरे' में हैं इंसान की आजादी

आजादी के 71 साल: 'खड़िया के घेरे' में हैं इंसान की आजादी

'गेम ऑफ थ्रॉन्स' में लेडी टार्गेरियन जब तीन देशों के लोगों को गुलामी से मुक्ति दिला देती है और उनके मालिकों को सजा दे देती है.

Opinion: बालिका गृह की लड़कियो, तुम्हारा 'वजूद' ही नहीं है...

Opinion: बालिका गृह की लड़कियो, तुम्हारा 'वजूद' ही नहीं है...

'गेम ऑफ थ्रोन्स' में एक किरदार है पीटर बेयलिश उर्फ लिटिलफिंगर.

गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रुबाई है दुखी और वो 'नीरज का दौर'

गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रुबाई है दुखी और वो 'नीरज का दौर'

बाबरी मस्जिद विध्वंस को हुए वक्त गुज़र चुका था. दंगों में झुलसे घर, गाड़ियां और लोग अब धीरे-धीरे समय की बारिश से धुल कर अपने धूसर रंग को उतार रहे थे.

सोशल मीडियाः कह दिया मतलब कह दिया

सोशल मीडियाः कह दिया मतलब कह दिया

मेरा एक दोस्त हुआ करता था. उसे बहस करने की खूब आदत थी. बहस करना मुझे भी बहुत भाता था. औऱ हमारे कई दोस्त थे जो देश दुनिया की इन बहसों में खुद को शामिल किया करते थे.

कौए के पीछे भागने से पहले कान देख लें...

कौए के पीछे भागने से पहले कान देख लें...

एक पेड़ के नीचे खरगोश सो रहा था. अचानक उसे धड़ाम की आवाज़ आई तो वो चौंक कर उठा और घबराकर बेतहाशा दौड़ने लगा. उसे इस तरह दौड़ता देख कर एक बंदर ने उससे पूछा कहां भाग रहे हो.

देखो बॉस हमें मत बताओ

देखो बॉस हमें मत बताओ

मीडिया का सबसे बड़ा फायदा क्या है? मीडिया का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे जुड़े रहने वाला ‘व्यक्ति’ जागरुक हो जाता है . मीडिया का काम भी यही है लोगों को जागरुक करना.

जिंदगी हो या फुटब़ॉल झेलना आना चाहिए

जिंदगी हो या फुटब़ॉल झेलना आना चाहिए

‘जानते हो मेरे पिताजी मुझसे क्या कहते थे, इस दुनिया में अगर कोई नंबर वन पर है तो वो ऊपर वाला है औऱ फिर कुछ है तो वो है फुटबॉल ‘.

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