Pankaj Shukla

तरक्‍की के झांझ-मंजीरे बाद में, पहले बीमार शिक्षा की फिक्र कर लें

तरक्‍की के झांझ-मंजीरे बाद में, पहले बीमार शिक्षा की फिक्र कर लें

अधिक दिन नहीं हुए, कुछ बरस पहले तक ही, बच्‍चे का हाथ शिक्षकों को सौंपते हुए कहा जाता था- ‘इसका भविष्‍य आपके हाथों में है. न पढ़े तो खाल खींच लीजिएगा और यह भरोसा शिक्षक की तरफ से भी होता था.

खोखले वादों के विपरीत नर्मदा को सदा नीरा रखने के जन यत्‍न

खोखले वादों के विपरीत नर्मदा को सदा नीरा रखने के जन यत्‍न

मप्र की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा संकट में है. धमनियों की तरह नर्मदा को पोषित करने वाली सहायक नदियां सूख चुकी हैं और इस कारण नर्मदा की लय भी कई जगह से टूट रही है.

मिशन 2018 और आदिवासी राजनीति की नई करवट

मिशन 2018 और आदिवासी राजनीति की नई करवट

विधानसभा चुनाव 2018 के पहले मप्र की राजनीति में इनदिनों एक नई तस्‍वीर में रंग भरे जा रहे हैं. ये रंग वास्‍तव में आदिवासी एकता के नारे के साथ उभरे हैं.

‘श्रीमंत’ के तंज से निजात का जतन सिंधिया का सहभोज

‘श्रीमंत’ के तंज से निजात का जतन सिंधिया का सहभोज

मप्र में वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव होना है. यहां भाजपा और कांग्रेस चुनावी मोड में आ चुके हैं.

विश्‍व जल दिवस: अच्‍छे-अच्‍छे काज करते जाना कि न कंठ प्‍यासे रहें, न जमीन

विश्‍व जल दिवस: अच्‍छे-अच्‍छे काज करते जाना कि न कंठ प्‍यासे रहें, न जमीन

प्रख्‍यात पर्यावरणविद् और 'आज भी खरे हैं तालाब' के लेखक स्‍व. अनुपम मिश्र ने लिखा है- 'न जाने कितने शहर, कितने सारे गांव इन्हीं तालाबों के कारण टिके हुए हैं.

हम ऐसी खोखली बहादुरी के गीत कब तक गाते रहेंगे?

हम ऐसी खोखली बहादुरी के गीत कब तक गाते रहेंगे?

36 फीट गहरे बोरिंग का गड्ढ़े, 36 घन्टे मौत से संघर्ष, 4 साल के बच्‍चे को बचाने के लिए जुटी सेना, देशभर में प्रार्थनाओं के दौर,... और जीत की जिंदगी.