Rakesh Kumar Malviya

फादर्स डे स्पेशल: पिता जो पलायन पर हैं...

फादर्स डे स्पेशल: पिता जो पलायन पर हैं...

फादर्स डे पर बधाई देने-लेने वाले मेरे ब्लॉग को पढ़ कर बिलकुल भी निराश न हों, यह नकारात्मकता नहीं है. बल्कि इस दिन के बहाने पितृत्व की चुनौतियों की एक अलग नजरिये से समीक्षा भर है.

क्या राहुल गांधी भी वही कह रहे जो दूसरे नेता कहते आए हैं ?

क्या राहुल गांधी भी वही कह रहे जो दूसरे नेता कहते आए हैं ?

मंदसौर में राहुल गांधी ने आखिर वही कहा, जो दशकों से दूसरे नेता कहते चले आए हैं.

एक पिता का पत्र जो हर स्कूल के लिए एक सबक है

एक पिता का पत्र जो हर स्कूल के लिए एक सबक है

प्रवेश प्रक्रिया के दौरान मैंने यह महसूस किया कि स्कूल प्रबंधन की मानसिकता सिर्फ अंको की दौड़ तक ही सीमित है और अंकीय आधार का यह क्रूर पैमाना कक्षा 1 के स्तर पर कितना उचित है.

Opinion : मूर्तियां बनाने-तोड़ने के दौर में याद रखनी होगी एक भारतीय आत्मा की इच्छा

Opinion : मूर्तियां बनाने-तोड़ने के दौर में याद रखनी होगी एक भारतीय आत्मा की इच्छा

आज एक भारतीय आत्मा पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का जन्मदिन है.

हम बुनियाद गढ़ने में ही तो गलती नहीं कर रहे

हम बुनियाद गढ़ने में ही तो गलती नहीं कर रहे

हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों का तनाव कम करने, अवसाद से बचाने और आत्महत्या की प्रवृत्तियों को रोकने के लिए एक समिति का गठन किया. इस समिति ने चार पन्नों में अपने सुझाव दिए हैं.

सोचिए और ऐसी मिसालों से सबक लीजिए

सोचिए और ऐसी मिसालों से सबक लीजिए

आज सुबह यदि आपने अपने कम्प्यूटर को ऑन करने के बाद गूगल किया हो और उसके सामने दिख रहे डूडल पर गौर किया हो तो निश्चित ही

सूख गया भवानी दादा की यादों का जंगल

सूख गया भवानी दादा की यादों का जंगल

29 मार्च को भवानी दादा का जन्मदिन था.

बेघरों की छाती पर कील ठोंकते बैंक

बेघरों की छाती पर कील ठोंकते बैंक

देश के एक बड़े बैंक ने ऊंची इमारतों के शहर मुंबई में अपने सामने बड़ी-बड़ी कीलें ठुकवा दी. ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसके सामने गरीब-गुरबे बैठ, लेट नहीं पाएं और बैंक की सुरक्षा चाक-चौबंद रहे.

नर्मदा खुद कहां से पानी लाएगी ?

नर्मदा खुद कहां से पानी लाएगी ?

नर्मदा से कई सौ किलोमीटर दूर यह बात सुनकर मैं भौंचक रह गया था कि लोग अपनी पानी की जरूरत के लिए नर्मदा का नाम ले रहे हैं.

क्या जया बच्चन की जगह दूसरी महिला के अपमान पर भी इतना ही विरोध होता?

क्या जया बच्चन की जगह दूसरी महिला के अपमान पर भी इतना ही विरोध होता?

जया बच्चन के खिलाफ जो कुछ भी कहा सुना गया वह निंदनीय है. जयाजी के साथ अपनी राजनीतिक सीमाओं से भी परे विपक्षी दलों की महिला राजनीतिज्ञों का आना सुखद है, आखिर आधी आबादी के सवाल हैं.

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