Rakesh Kumar Malviya

भोपाल गैस त्रासदी: आंसू सूख गए, पर न्याय नहीं मिला

भोपाल गैस त्रासदी: आंसू सूख गए, पर न्याय नहीं मिला

उस काली रात के 34 साल बाद भोपाल गैस त्रासदी एक अराजनैतिक विषय बन गया है.

उमा भारती की पारंपरिक सीट पर विधायक बनने के फेर में 200 लोग

उमा भारती की पारंपरिक सीट पर विधायक बनने के फेर में 200 लोग

मध्य प्रदेश के चुनाव में वाकई गजब काम होते हैं. इस बार यहां के छतरपुर जिले की बड़ा मलहरा सीट पर सामाजिक संगठन लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण की एक नई तकनीक अपना रहे हैं.

उमा भारती की पारंपरिक सीट पर विधायक बनने के फेर में 200 लोग

उमा भारती की पारंपरिक सीट पर विधायक बनने के फेर में 200 लोग

छतरपुरः जि‍न पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें एमपी भी है और यह तो आप सभी को पता है कि एमपी अजब है सबसे गजब है.

मान लेना चाहिए कि हमारी जान हमारे हाथ में है

मान लेना चाहिए कि हमारी जान हमारे हाथ में है

अमृतसर ही क्यों, जरा एक पल को सोच लीजिए, क्या ऐसा ही कोई हादसा आपसे होकर नहीं गुजर सकत

विश्व खाद्य दिवस: क्या पेट भर राशन मिलना अब भी मुश्किल है

विश्व खाद्य दिवस: क्या पेट भर राशन मिलना अब भी मुश्किल है

यदि देश की एक पंचायत में किए गए सामाजिक संपरीक्षा यानी सोशल आॅडिट के नतीजों को सही मान लिया जाए तो देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लोगों के हकों पर बहुत बड़ा डाका डाला जा रहा है.

यह कहानी पढ़िए और जनका के हौसले को करिए सलाम

यह कहानी पढ़िए और जनका के हौसले को करिए सलाम

आज 'इंटरनेशनल डे आफ रूरल वुमन' है. यूनाइटेड नेशन्स की ओर से यह दिन 2008 से हर साल ग्रामीण महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है.

लोकतंत्र में बच्चों की आवाज सुना जाना सबसे जरूरी

लोकतंत्र में बच्चों की आवाज सुना जाना सबसे जरूरी

सनसनी के इस दौर में देश के राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में क्या कोई बच्चों की मजबूत आवाज है.

फादर्स डे स्पेशल: पिता जो पलायन पर हैं...

फादर्स डे स्पेशल: पिता जो पलायन पर हैं...

फादर्स डे पर बधाई देने-लेने वाले मेरे ब्लॉग को पढ़ कर बिलकुल भी निराश न हों, यह नकारात्मकता नहीं है. बल्कि इस दिन के बहाने पितृत्व की चुनौतियों की एक अलग नजरिये से समीक्षा भर है.

क्या राहुल गांधी भी वही कह रहे जो दूसरे नेता कहते आए हैं ?

क्या राहुल गांधी भी वही कह रहे जो दूसरे नेता कहते आए हैं ?

मंदसौर में राहुल गांधी ने आखिर वही कहा, जो दशकों से दूसरे नेता कहते चले आए हैं.

एक पिता का पत्र जो हर स्कूल के लिए एक सबक है

एक पिता का पत्र जो हर स्कूल के लिए एक सबक है

प्रवेश प्रक्रिया के दौरान मैंने यह महसूस किया कि स्कूल प्रबंधन की मानसिकता सिर्फ अंको की दौड़ तक ही सीमित है और अंकीय आधार का यह क्रूर पैमाना कक्षा 1 के स्तर पर कितना उचित है.

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