Sachin Kumar Jain

आदिवासी समाज के बिना पर्यावरण संरक्षण एक आत्मघाती सोच है...

आदिवासी समाज के बिना पर्यावरण संरक्षण एक आत्मघाती सोच है...

क्या समाज का बहिष्कार करके पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण किया जा सकता है? यह असंभव है. हमें यह सवाल पूछना ही होगा कि भारत में वर्ष 1927 में भारतीय वन कानून बनाए जाने के पीछे मंशा क्या थी?

हम भीड़तंत्र की ओर बढ़ रहे हैं, खामोशी से नहीं, ढोल-नगाड़ों के साथ

हम भीड़तंत्र की ओर बढ़ रहे हैं, खामोशी से नहीं, ढोल-नगाड़ों के साथ

नफरत की शिक्षा, नफरत के रिश्ते, व्यापार में नफरत, कलाओं में नफरत, कलम में नफरत और व्यवहार में नफरत, सियासत की नफरत.

आरसीईपी - मुनाफे के व्यापार के सामने कहीं देश हार न जाए!

आरसीईपी - मुनाफे के व्यापार के सामने कहीं देश हार न जाए!

आसियान देशों समेत 16 देशों के बीच चल रही क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी (रीजनल काम्प्रीहेंसिव इकोनोमिक पार्टनरशिप-आरसीईपी) बातचीत के भारत पर गहरे असर होंगे.

आरसीईपी यानी समग्र संकट के व्यापार समझौते

आरसीईपी यानी समग्र संकट के व्यापार समझौते

पूरी दुनिया में पिछले दो दशकों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौते किये जा रहे हैं.

लड़के बलात्कार के आसान शिकार क्यों हैं?

लड़के बलात्कार के आसान शिकार क्यों हैं?

पुणे के 22 साल के एक युवक का कहना है कि “जब मैं पांच साल का था, तब लगातार दो साल तक एक पुरुष ने मेरे साथ यौनिक दुराचार किया.

लड़कों से होने वाले बलात्कार को छिपाना सामाजिक नियम है!

लड़कों से होने वाले बलात्कार को छिपाना सामाजिक नियम है!

कुछ बातें हम भूल जाते हैं और कुछ बातें हम याद नहीं रखना चाहते हैं, कुछ बातें याद रहती हैं, पर हम उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहते हैं; ये कोई दार्शनिक निष्कर्ष नहीं हैं.

खाद्य सुरक्षा पर अमेरिकी चाल और सस्ते उत्पाद की डम्पिंग

खाद्य सुरक्षा पर अमेरिकी चाल और सस्ते उत्पाद की डम्पिंग

4 मई 2018 को अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन में एक शिकायती माहौल बनाने की कोशिश की है कि भारत खाद्य सुरक्षा के लिए जो राजकीय सहायता दे रहा है, वह डब्ल्यूटीओ में तय मानकों से बहुत ज्यादा है.

Opinion: बच्चों की सुरक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं है!

Opinion: बच्चों की सुरक्षा अब भी प्राथमिकता नहीं है!

नई दिल्ली: भारत में वर्ष 2001 (संख्या–10814) से 2016 (106958) के बीच बच्चों के प्रति अपराधों की संख्या 889 प्रतिशत बढ़ गई.

बाल विवाह के पक्ष में होना यानी बच्चों के खिलाफ होना

बाल विवाह के पक्ष में होना यानी बच्चों के खिलाफ होना

27 मार्च 2018 को शक्तिवाहिनी बनाम भारत सरकार एवं अन्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने साफ किया है कि 'जब दो वयस्क अपनी मर्जी से विवाह करना चाहते हैं, अपना रास्ता चुनना चाहते हैं, अपना लक्ष्य तय क

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close