Suvigya Jain

पहले बाढ़ और फिर सूखे की खबरें सुनने की तैयारी

पहले बाढ़ और फिर सूखे की खबरें सुनने की तैयारी

इस साल भी मानसून आने में देरी हो रही है. वैसे विशेषज्ञों ने एक महीने पहले अनुमान ये लगाया था कि मानसून अपने तय समय पर ही आएगा और इस साल सामान्य वर्षा होगी. समय का अनुमान तो गड़बड़ा गया.

पहले बाढ़ और फिर सूखे की खबरें सुनने के लिए कितने तैयार हैं हम...

पहले बाढ़ और फिर सूखे की खबरें सुनने के लिए कितने तैयार हैं हम...

इस साल भी मानसून आने में देरी हो रही है. वैसे विशेषज्ञों ने एक महीने पहले अनुमान ये लगाया था कि मानसून अपने तय समय पर ही आएगा और इस साल सामान्य वर्षा होगी. समय का अनुमान तो गड़बड़ा गया.

फ़ौरन सोचना होगा कूड़ा प्रबंधन का कुछ नया उपाय

फ़ौरन सोचना होगा कूड़ा प्रबंधन का कुछ नया उपाय

अखबारों और टीवी पर कूड़े-कचरे की खबरें अचानक बढ़ गई हैं. दिल्ली और नोएडा में कचरा इस समय अदालती नज़र में है. जब-तब अफसरों को अदालती झाड़ पड़ जाती है.

 हिंदी पत्रकारिता दिवस : बात ज्यादा हिंदी की करें या पत्रकारिता की

हिंदी पत्रकारिता दिवस : बात ज्यादा हिंदी की करें या पत्रकारिता की

हर साल आज का दिन हमें हिंदी पत्रकारिता पर बात करने के लिए मिलता है. दशकों से इस दिन आमतौर पर हिंदी पत्रकारिता की दिशा और दशा पर चिंता जताते हुए आयोजन होते हुए दिखते हैं.

येदियुरप्पा के भाषण में सिर्फ किसान पर जोर के मायने

येदियुरप्पा के भाषण में सिर्फ किसान पर जोर के मायने

कर्नाटक विधानसभा में येदियुरप्पा के भाषण से कर्नाटक प्रकरण के रोमांच का अंत हो गया. येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया. और सबका पूरा ध्यान अगली सरकार और उसकी स्थिरता के विश्लेषण में लग गया.

Opinion : खंडित जनादेश की व्याख्या का एक नियम क्यों नहीं?

Opinion : खंडित जनादेश की व्याख्या का एक नियम क्यों नहीं?

कर्नाटक कांड गुत्थी बन गया. दो दिन पहले राजनीतिक पहेली बन गया था और इस समय कानूनी मसला बनकर हमारे सामने है.

मज़दूर दिवस पर विशेष: बेरोज़गारी बनाम श्रम के घंटे

मज़दूर दिवस पर विशेष: बेरोज़गारी बनाम श्रम के घंटे

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर मज़दूरों की बातें की जाती हैं. कुछ साल से आज के दिन को मनाने के लिए एक विषय भी घोषित किया जाने लगा था. लेकिन हर साल यह विषय घोषित हो नहीं पाता.

पृथ्वी दिवस : कई मोर्चों पर जूझ रही है पृथ्वी

पृथ्वी दिवस : कई मोर्चों पर जूझ रही है पृथ्वी

पृथ्वी की रचना और इसका रचानाकाल आज भी कुतूहल का विषय है. कोई 500 वर्ष पहले ही हम वैज्ञानिक ढंग से पर्यवेक्षण करने लायक हो पाए. हालांकि पृथ्वी की उम्र के अनुमान पहले भी लगाए गए.

बात उठी एक आदिवासी गांव के संपूर्ण अध्ययन की

बात उठी एक आदिवासी गांव के संपूर्ण अध्ययन की

प्रबंधन प्रौद्योगिकी की विशेषज्ञ होने के नाते एक बहुत ही सनसनीखेज काम का प्रस्ताव मेरे सामने आया.

Opinion : नकदी की समस्या को 'अचानक' कहना कितना सही?

Opinion : नकदी की समस्या को 'अचानक' कहना कितना सही?

एटीएम में नकदी की कमी की खबरें सनसनीखेज हैं. मीडिया में जितनी खबरें हैं उन्हें देखकर तो नहीं लगता कि अफरातफरी जैसा माहौल है, लेकिन समस्या तो गंभीर है ही.

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