Suvigya Jain

विश्व खुशहाली दिवस पर क्या बात करें?

विश्व खुशहाली दिवस पर क्या बात करें?

आज विश्व खुशहाली दिवस है. संयुक्त राष्ट्र्र के सदस्य देश होने के नाते हमें भी इस दिवस पर खुशहाली की चर्चा करनी चाहिए. हालांकि मुख्यधारा के मीडिया में होती दिख नहीं रही है.

एक नज़र महिला दिवस के इतिहास पर

एक नज़र महिला दिवस के इतिहास पर

महिलाओं के पास भी अपना एक दिवस है. हर साल आठ मार्च को आजकल अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है. हम भी अपने देश में जहां-तहां आज के दिन समारोह आयोजित करते हैं.

चुनावी मुद्दों की शर्तें : क्या 2019 का मुख्य मुद्दा किसान होगा?

चुनावी मुद्दों की शर्तें : क्या 2019 का मुख्य मुद्दा किसान होगा?

सबसे रोमांचकारी भविष्य की अटकलें होती हैं. अगले लोकसभा चुनाव की भविष्यवाणी भी रोचक हो सकती है.

मसला बेरोज़गारी का (भाग दो) : कहां से सोचना शुरू हो बेरोज़गारी का समाधान

मसला बेरोज़गारी का (भाग दो) : कहां से सोचना शुरू हो बेरोज़गारी का समाधान

अब ये निर्विवाद है कि बेरोज़गारी एक इमरजेंसी समस्या बन गई है.

मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

सरकारों के यहां समस्याओं की सूची बनने का रिवाज़ नहीं पाया जाता.

बजट 2018: क्या महिलाओं की जरूरतें वाकई यही थीं

बजट 2018: क्या महिलाओं की जरूरतें वाकई यही थीं

महिलाओं को देश की आधी आबादी के रूप में देखा जाता है. वंचित तबकों में सांख्यिकी आधार पर यह सबसे बड़ा तबका है.

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

बजट आने से पहले देश के हर वर्ग को अपने लिए कुछ मिल जाने की उम्मीद थी. सबकी अपनी समस्याएं थीं और सबने उन समस्याओं के समाधान की आस इस बजट से लगाई हुई थी.

बजट 2018: देसी निवेशकों को लुभा नहीं पाए वित्त मंत्री अरुण जेटली

बजट 2018: देसी निवेशकों को लुभा नहीं पाए वित्त मंत्री अरुण जेटली

इस बार के बजट की फौरन ही समीक्षा का काम बहुत कठिन लग रहा है.

बजट 2018: उद्योग और व्यापार जगत बोझ के अंदेशे से चिंतित

बजट 2018: उद्योग और व्यापार जगत बोझ के अंदेशे से चिंतित

बजट आने में दो दिन बचे हैं. बजट यानी वह सरकारी दस्तावेज़ जिसमें हिसाब होता है कि जनता के किस तबके से पैसे की उगाही करे और उस पैसे से जनता के किस तबके का दुख कम करे.

Zee Analysis : बजट में महिलाओं के हिस्से को तौलेंगे कैसे?

Zee Analysis : बजट में महिलाओं के हिस्से को तौलेंगे कैसे?

देश का बजट बन चुका है. उसकी छपाई चल रही है. एक फरवरी को पेश होगा. ये पहली बार दिख रहा है कि देश की दिशा तय करने वाले इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के बारे में इस बार मीडिया का ध्यान सबसे कम है.

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