Suvigya Jain

Zee Analysis: सौ बात की एक बात, स्वास्थ्य पर खर्च कितना?

Zee Analysis: सौ बात की एक बात, स्वास्थ्य पर खर्च कितना?

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हर देश अपने स्वास्थ्य की समीक्षा करता है. विश्व समुदाय के सदस्य होने के नाते हमें भी करना चाहिए. वैसे ये काम छोटा-मोटा काम नहीं है.

बॉल टेंपरिंग : क्या माफी का ऐसा दुर्लभ रूप देखा है?

बॉल टेंपरिंग : क्या माफी का ऐसा दुर्लभ रूप देखा है?

क्रिकेटर स्टीव स्मिथ ने शुक्रवार को सिसकते हुए माफी मांगी. करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह करुण दृश्य था. स्मिथ को फूटफूट कर रोते देख उनके प्रशंसक भी रोते दिखे. घटना ही वैसी थी.

जैन परंपरा में सम्‍यक ज्ञान का आशय

जैन परंपरा में सम्‍यक ज्ञान का आशय

लगभग हर धर्म में भक्ति और पूजा पाठ की प्रवृत्ति बढ़ रही है. जबकि हर धर्म के पास अपना अपना एक नैतिक पाठ भी होता है. इसी नैतिक पाठ में ज्ञान होता है.

विश्व खुशहाली दिवस पर क्या बात करें?

विश्व खुशहाली दिवस पर क्या बात करें?

आज विश्व खुशहाली दिवस है. संयुक्त राष्ट्र्र के सदस्य देश होने के नाते हमें भी इस दिवस पर खुशहाली की चर्चा करनी चाहिए. हालांकि मुख्यधारा के मीडिया में होती दिख नहीं रही है.

एक नज़र महिला दिवस के इतिहास पर

एक नज़र महिला दिवस के इतिहास पर

महिलाओं के पास भी अपना एक दिवस है. हर साल आठ मार्च को आजकल अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है. हम भी अपने देश में जहां-तहां आज के दिन समारोह आयोजित करते हैं.

चुनावी मुद्दों की शर्तें : क्या 2019 का मुख्य मुद्दा किसान होगा?

चुनावी मुद्दों की शर्तें : क्या 2019 का मुख्य मुद्दा किसान होगा?

सबसे रोमांचकारी भविष्य की अटकलें होती हैं. अगले लोकसभा चुनाव की भविष्यवाणी भी रोचक हो सकती है.

मसला बेरोज़गारी का (भाग दो) : कहां से सोचना शुरू हो बेरोज़गारी का समाधान

मसला बेरोज़गारी का (भाग दो) : कहां से सोचना शुरू हो बेरोज़गारी का समाधान

अब ये निर्विवाद है कि बेरोज़गारी एक इमरजेंसी समस्या बन गई है.

मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

मसला बेरोज़गारी का (भाग एक) : क्या आपातकालिक समस्या बन गई है बेरोज़गारी?

सरकारों के यहां समस्याओं की सूची बनने का रिवाज़ नहीं पाया जाता.

बजट 2018: क्या महिलाओं की जरूरतें वाकई यही थीं

बजट 2018: क्या महिलाओं की जरूरतें वाकई यही थीं

महिलाओं को देश की आधी आबादी के रूप में देखा जाता है. वंचित तबकों में सांख्यिकी आधार पर यह सबसे बड़ा तबका है.

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

बजट आने से पहले देश के हर वर्ग को अपने लिए कुछ मिल जाने की उम्मीद थी. सबकी अपनी समस्याएं थीं और सबने उन समस्याओं के समाधान की आस इस बजट से लगाई हुई थी.

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