Suvigya Jain

बजट 2018: क्या महिलाओं की जरूरतें वाकई यही थीं

बजट 2018: क्या महिलाओं की जरूरतें वाकई यही थीं

महिलाओं को देश की आधी आबादी के रूप में देखा जाता है. वंचित तबकों में सांख्यिकी आधार पर यह सबसे बड़ा तबका है.

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

बजट 2018 Analysis : किसानों ने क्या पाया इस बजट में...

बजट आने से पहले देश के हर वर्ग को अपने लिए कुछ मिल जाने की उम्मीद थी. सबकी अपनी समस्याएं थीं और सबने उन समस्याओं के समाधान की आस इस बजट से लगाई हुई थी.

बजट 2018: देसी निवेशकों को लुभा नहीं पाए वित्त मंत्री अरुण जेटली

बजट 2018: देसी निवेशकों को लुभा नहीं पाए वित्त मंत्री अरुण जेटली

इस बार के बजट की फौरन ही समीक्षा का काम बहुत कठिन लग रहा है.

बजट 2018: उद्योग और व्यापार जगत बोझ के अंदेशे से चिंतित

बजट 2018: उद्योग और व्यापार जगत बोझ के अंदेशे से चिंतित

बजट आने में दो दिन बचे हैं. बजट यानी वह सरकारी दस्तावेज़ जिसमें हिसाब होता है कि जनता के किस तबके से पैसे की उगाही करे और उस पैसे से जनता के किस तबके का दुख कम करे.

Zee Analysis : बजट में महिलाओं के हिस्से को तौलेंगे कैसे?

Zee Analysis : बजट में महिलाओं के हिस्से को तौलेंगे कैसे?

देश का बजट बन चुका है. उसकी छपाई चल रही है. एक फरवरी को पेश होगा. ये पहली बार दिख रहा है कि देश की दिशा तय करने वाले इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के बारे में इस बार मीडिया का ध्यान सबसे कम है.

Zee Analysis : दावोस में अटकलों से हटकर था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण

Zee Analysis : दावोस में अटकलों से हटकर था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण

दावोस में प्रधानमंत्री के भाषण के पहले भारत के लावलश्कर ने अभूतपूर्व समा बांध दिया था.

विचार के लिए एक मुद्दा दे गई सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

विचार के लिए एक मुद्दा दे गई सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देश में सनसनी फैल गई. सनसनी क्यों न फैलती क्योंकि लोकतंत्र के चार खंभों में एक न्यायपालिका ही बची थी जिस पर खुलेआम आरोप नहीं लगते थे.

Analysis : विदेशी निवेश के लिए सरकार की नई कवायद से जुड़े कुछ तथ्य

Analysis : विदेशी निवेश के लिए सरकार की नई कवायद से जुड़े कुछ तथ्य

विदेशी व्यापारियों के लिए भारत में निवेश करना और आकर्षक बना दिया गया

देश की पांच बड़ी संस्थाओं के लिए कैसा रहा साल 2017

देश की पांच बड़ी संस्थाओं के लिए कैसा रहा साल 2017

साल के आखिरी हफ़्ते में पूरे साल की समीक्षा का रिवाज़ है. अलग-अलग क्षेत्रों में सालभर की गतिविधियों को याद करते हुए 'ईयरएंडर' लिखे जाते हैं.

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