Vinay Upadhyay

नए उत्कर्ष का आलोक

नए उत्कर्ष का आलोक

‘‘कठिनाइयों से रीता जीवन मेरे लिए नहीं है. मेरे तूफ़ानी मन को यह स्वीकार नहीं है. मुझे तो चाहिए एक महान ऊंचा लक्ष्य और उसके लिए उम्र भर संघर्षों का अटूट क्रम. ओ कला! तू खोल मानवता की धरोहर.

सुरमई पंखों पर सवार होकर आई संजा परंपरा का लोक स्वर

सुरमई पंखों पर सवार होकर आई संजा परंपरा का लोक स्वर

मौसम की चौखट से भादों विदा ले रहा है. क्वार के आसमान से कजरारे-कपसीले बादल छंटने लगे हैं. शामें रंगीन होकर घर-आंगन में उतरने लगी हैं. खेत की बागुड़ों पर फूलों की झालर झिलमिला उठी है.

यादों में : नीरज ने कहा था, 'जीवन का अध्यात्म गाया है मैंने गीतों में'

यादों में : नीरज ने कहा था, 'जीवन का अध्यात्म गाया है मैंने गीतों में'

गोपालदास नीरज जैसे कवि का अवसान एक ऐसे शब्द-पुरुष का महाप्रयाण है जो अपने लिखे-कहे से सदियों तक रुहों में अपना वजूद बनाए रखेंगे.

यादें शेष: लोकमन में भीगा अमृत छलका गए वेगड़

यादें शेष: लोकमन में भीगा अमृत छलका गए वेगड़

सुगंध की तरह फैल रही है धूप. उजले से हो रहे हैं कई धुंधलाए से चित्र. दूर कहीं बज रहा है वही पुराना सा गीत और भर रहा है रंग उन्हीं चित्रों में.

मधुकली वृंद : नई कविता को जनसंवादी बनाता वृंदगान

मधुकली वृंद : नई कविता को जनसंवादी बनाता वृंदगान

कविता का अपना भाषिक और भाविक विन्यास होता है. वह अपनी सर्जना में परम स्वायत्त होती है. ठीक उसी तरह संगीत की सुरीली सत्ता भी अपने आप में निराली होती है. उसका नाद अनहद के अनोखे क्षितिज खोलता है.

धन्यता के गीत गाती आवाज़ें

धन्यता के गीत गाती आवाज़ें

‘करूणेश्वरी मंडम’ के पावन परिसर में वह भक्ति रस में आकंठ भिगोती सांझ के सुरभीने क्षण निश्चय ही दिव्य आनंद की अलौकिक यात्रा का रूहानी अहसास बनकर प्रकट हुए.

यादों में पं. ओमप्रकाश चौरसिया : अदम्य जिजीविषा की मिसाल

यादों में पं. ओमप्रकाश चौरसिया : अदम्य जिजीविषा की मिसाल

पंछी  उड़ गया, डाल हिलती रही, फूल मुरझा गया, खुशबू बहती रही

थिएटर ओलंपियाड : सांस्‍कृतिक हस्‍तक्षेप का विश्‍वमंच

थिएटर ओलंपियाड : सांस्‍कृतिक हस्‍तक्षेप का विश्‍वमंच

दुनिया के अमनचैन के लिए दुआएं करता विश्‍व रंगमंच दिवस (27 मार्च)

विश्व रंगमंच दिवस : भरोसा अब भी कायम है...

विश्व रंगमंच दिवस : भरोसा अब भी कायम है...

दौर मीडिया की महिमा का है, होड़ का है, रिझाने का है, वर्चस्व का है. और इन सबके केन्द्र में है- अवाम.

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