डियर आरुषि, वक़्त तुम्हारे क़ातिल को ज़रूर सज़ा देगा

आरुषि, तुम चलीं गईं लेकिन तुम्हारा मासूम चेहरा अब भी आंखों के सामने घूमता है. 14 साल की मासूम बच्ची को इतनी बेहरमी से क्यों मारा गया?

निदा रहमान | Updated: Oct 12, 2017, 10:10 PM IST
डियर आरुषि, वक़्त तुम्हारे क़ातिल को ज़रूर सज़ा देगा

डियर आरुषि,

तुम्हें किसी ने नहीं मारा, ना ही हेमराज का कोई कातिल है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तुम्हारे मम्मी पापा को तुम्हारी हत्या के आरोप से बरी कर दिया है. वो अब खुली हवा में सांस ले पाएंगे. सालों से जेल की सलाखों में बंद तुम्हारे मम्मी-पापा अब वापस अपनी ज़िंदगी आज़ादी से जी सकेंगे. लेकिन आरुषि मैं परेशान हूं, बहुत सारे सवाल हैं मन में जिनके जवाब कहीं नहीं मिले, किसी के पास उनके जवाब हैं ही नहीं. तुम्हारा क़ातिल कौन है जिसने तुम्हारा गला रेता या फिर वो लोग जिन्होंने तुम्हारी और हेमराज की हत्या के बात तरह-तरह की बातें बनाईं. तुम्हारा और हेमराज का रिश्ता जोड़ा गया. तुम जैसी प्यारी बच्ची के चरित्र पर कीचड़ उछाला गया. तुम्हारे चले जाने के सालों बाद भी तरह तरह के सवाल उठाए गए तुम्हारे ऊपर. तुम चलीं गईं लेकिन तुम्हारा मासूम चेहरा अब भी घूमता है आंखों के सामने. 14 साल की मासूम बच्ची को इतनी बेहरमी से क्यों मारा गया?

16 मई 2008 को जब तुम्हारी हत्या हुई तो मैं तुम्हारे घर के रास्ते से होते हुए ही अपने ऑफिस जाती थी. सेक्टर 27 जलवायु विहार का वो गेट बहुत सन्नाटा पसरा सालों तक वहां. मुझसे फोन पर लोग पूछते थे कि किसने मारा होगा आरुषि को और हेमराज को, क्या लगता है. मैं भी दूसरों की तरह ही कयास लगाने लगती थी. और सवाल तैरते रहते थे जो अब भी तैर रहे हैं. प्यारी आरुषि मुझे नहीं पता तुम इस फैसले से खुश होगी या नहीं, मुझे ये भी नहीं पता कि तुम्हारे मम्मी-पापा ने तुम्हें मारा है कि नहीं लेकिन अब वो हाईकोर्ट से बरी हो गए हैं तो उन पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं.

आज जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तुम्हारे कत्ल के इल्ज़ाम से तुम्हारे मम्मी-पापा को बरी कर दिया है तो मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं खुश हूं या उदास. तुम्हारे लिए बहुत उदास हूं मैं. बहुत लोग खुश हैं कि तुम्हारे मम्मी-पापा बरी हो गए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वो बेकसूर हैं. लेकिन क्या तुम्हारा और हेमराज के क़ातिल इतने शातिर थे कि एक घर में वो दो दो हत्या कर देते हैं और फिर सारे सबूत मिटा देते हैं लेकिन तुम्हारे मम्मी-पापा को भनक तक नहीं लगती है. नहीं लगी होगी शायद गहरी नींद में रहे होंगे लेकिन मैं मां बनने के बाद कभी इतनी गहरी नींद में सो ही नहीं पाई कि अपने बेटे की आहट या करवट से नींद न टूटे और तुम्हें तो कोई बेहरमी से क़त्ल कर रहा था. फिर कैसे एक मां सोती रही? ख़ैर वो भी थक हारकर सो रही होंगी. तुम्हारा कत्ल हो गया और हेमराज को मारकर छत पर छुपा दिया गया लेकिन तब भी घर में मौजूद तुम्हारे मम्मी-पापा को भनक नहीं लगी. कोई बात नहीं शायद दिनभर की थकान ने उन्हें बेहोशी वाली नींद में सुला दिया होगा.

डियर आरुषि, 9 साल बाद अब तुम्हारा और हेमराज का कोई क़ातिल नहीं है. पता नहीं किसने तुम दोनों को मार दिया. न जाने कहां से कौन सा जादू हुआ था कि दो हत्याएं हो गई और कातिल कोई नहीं निकला. शायद किसी और ग्रह से आए थे तुम्हारे क़ातिल जो तुम दोनों को मारकर वापस अपने ग्रह पर चले गए. सब कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं लेकिन मैं निराश हूं कि तुम्हारे क़ातिल कानून से ज्यादा शातिर निकले. वो बच निकले या फिर उन्हें बचके निकल जाने दिया गया.

सॉरी आरुषि, हम शर्मिंदा हैं कि हमारा कानून, हमारी पुलिस हमारी देश की सबसे बेहतरीन जांच एजेंसियां भी तुम्हारे क़ातिल से हार गईं. सॉरी आरुषि हमें माफ़ करना. मुझे पता है तुम भी निराश होगी लेकिन अब तुम जहां भी होगी खुश रहना. तुम्हारे क़ातिल को कानून भले ही सज़ा न दे पाए लेकिन वक़्त ज़रूर सज़ा देगा. खुश रहना इस जहां से दूर जहां तुम्हारे क़ातिल खुली हवा में बेख़ौफ़ घूम रहे हैं.

(लेखिका वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक विषयों पर टिप्पणीकार हैं)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखिका के निजी विचार हैं)