...तो कारोबार माल्या जैसा न करें

अपनी लाइफ स्टाइल से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले उद्योगपति विजय माल्या का यह हाल होगा, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। माल्या अपने जीवन में कारोबार के लिए कम लेकिन ग्लैमर, चकाचौंध और रंगीन मिजाजी के

माउंटआबू के चारों दिशाओं में विराजमान हैं भगवान हनुमान

माउंटआबू के चारों दिशाओं में विराजमान हैं भगवान हनुमान

राजस्थान का माउंटआबू एक हिल स्टेशन होने के अलावा एक ऐसा शहर है जो जर्रे-जर्रे से अपनी आध्यात्मिकता का एहसास कराता है। यह एक हिल स्टेशन जरूर है लेकिन किसी धर्मनगरी से कम नहीं जहां भगवान शंकर, भगवान

ताकि पेड़ों की छांव बनी रहे

विकास के नाम पर जहां एक तरफ हम पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के लिए 'कुल्हाड़ी' उठाए तत्पर हैं। वहीं, दूसरी तरफ विभिन्न शहरों में कुछ हाथ पेड़ों के संरक्षण के लिए मुठ्ठी बांधे बुलंद हैं। मेरी दिलचस्पी ऐस

आम बजट 2016 : मिडिल क्लास को जोर का झटका

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तीसरी बार सोमवार को आम बजट पेश किया। इस बजट से मध्यम वर्ग को बहुत सारी उम्मीदें थीं लेकिन बजट की घोषणाओं से मध्यम वर्ग को निराशा हाथ लगी है। मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा उम्मीद आय कर स्लैब में बदलाव को लेकर थी लेकिन वित्त मंत्री ने आय कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है बल्कि सर्विस टैक्स में 0.5 फीसदी का इजाफा कर जोर का झटका दिया है। बजट में सर्विस टैक्स 14.5 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी कर दिया गया है। यानी सर्विस टैक्स से जुड़ी सभी सेवाएं महंगी हो जाएंगी। सर्विस टैक्स में 0.5 फीसदी का कृषि कल्याण कर लगाया गया है।    

जाट आरक्षण : आंदोलन या फिर 'साजिश'?

हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। खट्टर सरकार के जाट नेता व मंत्री, पुलिस और सेना को निशाना बनाते हुए यह आंदोलन अब पूरी तरह से समाज विरोधी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। पू

26/11 : हेडली की गवाही से उठे सवाल

डेविड कोलमैन हेडली की गवाही से पाकिस्तान का चेहरा फिर से बेनकाब हुआ है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां के आतंकवादी संगठनों ने 26/11 की साजिश किस तरीके से रची और उसे कैसे अंजाम तक पहुंचाय

गांधी के नाम पर गांधी से ही छल

आज 30 जनवरी है। 68 साल पहले यही तारीख थी जब भारत की आजादी के महानायक (जिसे हम प्यार से 'बापू' कहकर पुकारते हैं) की हत्या कर दी गई थी। जी हां!

पठानकोट हमला: दुश्मन को ऐसी जगह मारो जहां सबसे ज्यादा दर्द हो

पठानकोट एयरबेस पर आतंकवादी हमले के बाद यह बात उठने लगी है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत रद्द कर देनी चाहिए। 15 जनवरी को इस्लामाबाद में होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। कुछ लो

विदेश नीति और 'लाहौर प्रेम'

साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने के बाद से अब तक भारतीय विदेश नीति के मद्देनजर कई अहम कदम उठाए जा चुके हैं। केंद्र में एनडीए शासन के अभी डेढ़ साल से कुछ अधिक समय हु

सम-विषम योजना: केजरीवाल की वोट बैंक की राजनीति?

दिल्ली में एक जनवरी 2016 से सड़कों पर सुबह से शाम रेंगती कारों के काफिले पर 15 दिनों के लिए विराम लग जाएगा क्योंकि हर सांस के साथ हमारे खून में जहर घोल रही प्रदूषित हवा पर ब्रैक लगाने के लिए दिल्ली

दिल से : ये वादा तो करते जाओ बेटी!

कहते हैं कि राष्ट्र नीति, कूटनीति और सिद्धांतों से कहीं ऊपर होती है दिलों के रिश्ते। इसीलिए देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की 'लोगों से लोगों के संबंध' की थ्योरी आज भी टिकी है। विदेश

अनजाना प्रदूषण जो बुन रहा मुश्किलों की दुनिया...

संचार-तकनीकी की क्रांति के इस दौर में महज कुछ क्लिक्स के जरिये हम अपनी बातें दुनिया के सामने रख सकते हैं। फेसबुक, ट्वीटर, ब्लॉगर, व्हाट्सएप्प जैसे प्लेटफॉर्म के रू

बातचीत से पिघलेगी भारत-पाक रिश्ते पर जमी बर्फ!

बैंकॉक में छह दिसंबर को भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच हुई मुलाकात की खबर ने सबको चौंका दिया। मीडिया को इस अहम मुलाकात की भनक तक नहीं लगी। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जा

संसद में बहस 'असहिष्णुता' नहीं 'महंगी दाल' पर हो

विविध वैचारिक रंगों से भरे देश भारत में असहिष्णुता की कोई गुंजाइश नहीं है। यही हमारे संविधान की मूल भावना है और देश के अधिकांश लोगों का भी यही विचार है। मेरे विचार में तो यह महज सियासी मुद्दा है और

ISIS से आर-पार की लड़ाई का वक्त

फ्रांस में 13 नवंबर (शुक्रवार) की रात हुए आतंकवादी हमलों के बाद दुनिया भर में इससे निपटने के लिए संकल्प व्यक्त किए जा रहे हैं। दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्र आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खात्मे के लिए ए

...बदलेगी देश की राजनीति!

बिहार के विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के महागठबंधन की प्रचंड जीत ने देश के राजनीतिक फलक पर एक नई हलचल पैदा कर दी है। महागठबंधन की जीत को यदि विपक्षी एकता के प्रतीक के तौर दे

बिहार में क्यों हारी भाजपा और एनडीए?

बिहार में नीतीश-लालू-कांग्रेस के महागठबंधन की प्रचंड जीत दर्ज करने के साथ ही भाजपा-एनडीए के अंदर और बाहर इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि जिस पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा प्रखर वक्ता ह

क्यों है बिहार में जातिवाद

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बिहार राजनीतिक रूप से देश में सबसे जागरूक राज्य है। यहां का हर व्यक्ति देश, प्रदेश और दुनिया की राजनीति को समझता है और उसका भलीभांति विश्लेषण भी करता है। इतना जागरूक

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