1962 के युद्ध पर आधारित उपन्यास, चीनी कैद से भारतीय सैनिकों के बच निकलने की कहानी

उपन्यास में हजारों भारतीय सैनिक युद्धबंदियों की दशा और उनके वहां से भागकर भारत लौटने की गाथा को अभिव्यक्त करते हुए पहली बार कथा रूप में प्रस्तुत किया गया है.

1962 के युद्ध पर आधारित उपन्यास, चीनी कैद से भारतीय सैनिकों के बच निकलने की कहानी
(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: एक उपन्यास रूपी किताब में 1962 में भारत और चीन के सीमा संघर्ष के बाद हजारों भारतीय सैनिक युद्धबंदियों की दशा और उनके वहां से भागकर भारत लौटने की गाथा को अभिव्यक्त करते हुए पहली बार कथा रूप में प्रस्तुत किया गया है.

किताब का लोकार्पण सुप्रसिद्ध वन्य जीव फिल्म निर्माता माइक पाण्डेय द्वारा प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में किया गया Iपाण्डेय ने इस मौके पर किताब की प्रशंसा करते हुए कहा कि निश्चित तौर पर यह किताब युद्ध उपन्यास के बेहतर किताबों में से एक मानी जाएगी.

'कुल 29 अध्यायों को श्रेणीबद्ध तरीके से सजाया गया' 
कर्नल के डी सेंगन (रिटायर्ड) ने अंग्रेजी में लिखित इस किताब में युद्धबंदियों द्वारा विषम हिमालयी परिस्थितियों में पलायन करने का बड़ा रोचक वर्णन प्रस्तुत किया हैI किताब के कुल 29 अध्यायों को श्रेणीबद्ध तरीके से सजाया गया है I कथा में एक चीनी नायिका और सेना के एक अधिकारी मेजर विक्रम को नायक के रूप में प्रस्तुतकिया गया है I

हाल के दिनों में पहली बार अपनी तरह के पहले उपन्यास में भारत और चीन के युद्ध के कटु अनुभवों को एक सुखांत कहानी के तौर पर प्रस्तुत किया गया है जो युद्ध इतिहासों और प्रेम और रोमांच की पुस्तकों के शौक़ीन पाठकों को पसंद आएगी.

कर्नल सेंगन द्वारा रचित दूसरा उपन्यास
कर्नल सेंगन (रिटायर्ड) द्वारा रचित यह दूसरा उपन्यास है. किताब में वर्णन है कि यह युद्ध चीन द्वारा भारत के वृहत क्षेत्र को कब्ज़ा करने की नियत से छेड़ा गया था और हजारों भारतीय सैनिकों को युद्ध बंदी बनाकर तिब्बत में रखा गया था जिसपर चीन का कब्ज़ा पहले ही हो चुका था.

लेखक ने इस बात पर निराशा जताई है कि भारतीय सैनिक युद्धबंदियों ने चीनी सैनिकों के कब्जे से निकलने की कोशिश क्यों नहीं की जबकि उसी दौरान हजारों तिब्बतियों ने अपने साजो सामान के साथ वहां से भारत पलायन करने में सफलता पा ली थी.

(इनपुट - भाषा)