फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी, यूनिटेक के चंद्रा ब्रदर्स को नहीं मिली सभी मामलों में राहत

यूनिटेक लि. के प्रवर्तकों संजय और अजय चंद्रा पर फ्लैट खरीदारों को समय पर मकान नहीं देने को लेकर कथित धोखाधड़ी के कई मामले हैं. चंद्रा बंधु 15 सितंबर तक पुलिस हिरासत में रहेंगे.

भाषा | Updated: Sep 11, 2017, 09:36 PM IST
फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी, यूनिटेक के चंद्रा ब्रदर्स को नहीं मिली सभी मामलों में राहत
यूनिटेक के चंद्रा ब्रदर्स को दिल्ली की अदालत से दो अन्य मामलों में राहत नहीं मिली है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी यूनिटेक लि. के प्रवर्तकों संजय और अजय चंद्रा को एक मामले में सोमवार (11 सितंबर) को जमानत दे दी. हालांकि, दोनों अन्य मामलों में अभी पुलिस हिरासत में ही रहेंगे. दोनों पर फ्लैट खरीदारों को समय पर मकान नहीं देने को लेकर कथित धोखाधड़ी के कई मामले हैं. चंद्रा बंधु 15 सितंबर तक पुलिस हिरासत में रहेंगे. उनसे एक ही तरह की तीन शिकायतों में पूछताछ की जानी है. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट संदीप गर्ग ने चंद्रा बंधुओं को 85 वर्षीय महिला की शिकायत से जुड़े मामले में 50,000-50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी.

महिला ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ‘यूनिटेक कासकेड्स’ आवासीय परियोजना में 41 लाख रुपये की धोखाधड़ी की. चंद्रा बंधुओं के वकील आर के गोसाई ने कहा कि वे मध्यस्थता के जरिये मामले के निपटान के लिये तैयार हैं और 41.5 लाख रुपये की मियादी जमा रसीद दिखायी. उसके बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूरी कर ली. अधिवक्ता ने कहा कि मामले का निपटान होने के बाद राशि शिकायतकर्ता को भुगतान कर दी जाएगी.

तीन प्राथमिकी के संदर्भ में अदालत ने दोनों को पिछले सप्ताह सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था. इसमें एक प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने ग्रेटर नोएडा में ‘यूनिटेक वर्व’ में फ्लैट बुक कराया था और कंपनी ने 16.77 लाख रुपये की धोखाधड़ी की.

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी राम नारायण अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2006 में कंपनी की रिहायशी परियोजना यूनिटेक वर्व में फ्लैट बुक कराया था. अग्रवाल का आरोप है कि उन्हें फ्लैट दिसंबर 2009 में मिलना था लेकिन उन्हें अब तक नहीं मिला. दो अन्य प्राथमिकी भी फ्लैट की डिलीवरी नहीं होने और धोखाधड़ी से जुड़ी है.