RBI ने एसबीआई पर लगाया बड़ा जुर्माना, पढ़िए क्या रहा इसका कारण

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एसबीआई पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना आरबीआई के उस आदेश के बाद लगाया गया है, जिसमें आरबीआई ने नकली नोट का पता लगाने और उनको जब्त करने के मामले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर लगाया है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Mar 8, 2018, 03:56 PM IST
RBI ने एसबीआई पर लगाया बड़ा जुर्माना, पढ़िए क्या रहा इसका कारण

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एसबीआई पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना आरबीआई के उस आदेश के बाद लगाया गया है, जिसमें आरबीआई ने नकली नोट का पता लगाने और उनको जब्त करने के मामले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर लगाया है. आरबीआई की तरफ से जारी अधिसूचना में कहा गया कि रिजर्व बैंक ने एक मार्च 2018 को एसबीआई पर 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना नकली नोट का पता लगाने तथा उसे जब्त करने के मामले में निर्देशों का पालन नहीं करने पर लगाया गया है.

आरबीआई के निर्देशों का पालन नहीं हुआ
आरबीआई ने कहा कि एसबीआई ने नकली नोटों से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया. नियामक ने देश के सबसे बड़े बैंक की दो शाखाओं के ‘करेंसी चेस्ट’ की जांच में पाया कि नकली नोट का पता लगाने और उसे जब्त करने को लेकर जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया. केंद्रीय बैंक ने इस बारे में 5 जनवरी 2018 को एक नोटिस देकर जारी किए गए निर्देशों का पालन नहीं करने का कारण पूछा था. एसबीआई की तरफ से दिए गए जवाब के बाद आरबीआई ने जुर्माना लगाया है.

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516 करोड़ को एनपीए में डाला
इससे पहले आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वालों पर बकाया 516 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते में डाल दिया है. आरबीआई के अनुसार 2017-18 की अप्रैल-सितंबर छमाही में ऐसे 38 ऋण खातों को बट्टे खाते में डाला गया. इसका मतलब है कि बैंकों ने इन खातों के सिलसिले में अपनी कमाई में से 100 प्रतिशत का प्रावधान कर दिया है.

एसबीआई की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से अधिक
ऐसी इकाइयों को जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाली इकाई कहा जाता है जो कर्ज को उसके घोषित उद्येश्यों पर नहीं लगाया हो, क्षमता होते हुए भी कर्ज चुकाया न हो या फिर धन का गबन कर दिया हो या गिरवी रखी संपत्ति को बैंक की जानकारी के बगैर निस्तारित कर दिया हो. वित्त मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार ऐसे कर्जों के मार्च 2017 तक के आकड़ों में सबसे बड़े बैंक एसबीआई की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से अधिक है.

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आंकड़े के अनुसार 31 मार्च 2017 तक एसबीआई का जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाले कुल 1,762 चूककर्ताओं के ऊपर 25,104 करोड़ रुपये बकाया है. दूसरे स्थान पर पीएनबी है जिसका 1,120 चूककर्ताओं पर 12,278 करोड़ रुपये बकाया है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल 8,915 चूककर्ताओं पर 92,376 करोड़ रुपये बकाया है.