जीएसटी व्यवस्था में अल्कोहल, तंबाकू उद्योगों पर लगेगा 'सिन टैक्स'

प्रस्तावित जीएसटी ढांचे में अल्कोहल (शराब) और तंबाकू जैसी नुकसानदेह चीजें बनाने वाले उद्योग को अनिष्ट कर के रूप में अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा। जीएसटी में देश भर में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था होगी।

नयी दिल्ली : प्रस्तावित जीएसटी ढांचे में अल्कोहल (शराब) और तंबाकू जैसी नुकसानदेह चीजें बनाने वाले उद्योग को अनिष्ट कर के रूप में अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा। जीएसटी में देश भर में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था होगी।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमले अल्कोहल और तंबाकू जैसे उद्योगों के लिये अतिरिक्त कर लगाने के प्रावधान को रखा है। हालांकि अधिकारी ने यह नहीं बताया कि प्रस्तावित जीएसटी व्यवस्था में किस दर से इन पर कल लगेगा। अनिष्ट कर उत्पाद कर है जो मुख्य रूप से उन वस्तुओं पर लगाया जाता है जो समाज के नजरिये से हानिकारक या स्वास्थ्य के हिसाब से नुकसानदायक मानी जाती हैं। इनमें शराब और सिगरेट जैसे उत्पाद आते हैं।

अनिष्ट कर की व्यवस्था वैश्विक स्तर पर प्रचलित है जिसमें शराब और तंबाकू उत्पादों आदि पर अत्यधिक कर लगाया जाता है। अतिरिक्त कर लगाने का मकसद लोगों को ऐसे उत्पादों या सेवाओं के उपयोग को लेकर हतोत्साहित करना है। इसके अलावा, इन उत्पादों पर अधिक दर से कर लगाना कर राजस्व बढ़ाने का एक सामान्य तरीका है क्योंकि आमतौर पर लोग इस प्रकार के शुल्क का विरोध नहीं करते। इसका कारण इसका प्रभाव केवल उन लोगों पर होता है जो इसका उपयोग करते हैं। वित्त मंत्रालय फिलहाल उद्योग एवं अन्य संबद्ध पक्षों से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के बारे में सुझाव ले रहा है।

अधिकारी ने कहा, हर किसी को हमसे बातचीत का मौका मिल रहा है ताकि इस बारे में उनकी धारणा स्पष्ट हों..। उसने कहा, अगर हमें कुछ कमियां लगी और कुछ चिंता के क्षेत्र नजर आयें तो हम निश्चित रूप से उस पर गौर करेंगे। अभी कुछ भी अंतिम नहीं है और सभी प्रस्ताव मसौदे के रूप में हैं। अधिकारी ने कहा, हम टिप्पणी और सुझाव का इंतजार कर रहे हैं और उद्योग से मिले सुझाव को देखेंगे। जीएसटी कानून तैयार करने से पहले उन सुझावों के आधार पर जरूरी बदलाव के बाद परिषद के समक्ष अंतिम रिपोर्ट रखी जाएगी।

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