8 नोबेल विजेताओं सहित 93 अर्थशास्त्रियों ने किया इमरान खान के इस फैसले का विरोध

आठ नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने आतिफ मियां को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से हटाए जाने का विरोध किया है.

8 नोबेल विजेताओं सहित 93 अर्थशास्त्रियों ने किया इमरान खान के इस फैसले का विरोध
फाइल फोटो

नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा कट्टरपंथियों के दबाव में आकर किया गया एक फैसला अब उनके लिए मुसीबत बनता जा रहा है. आठ नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने आतिफ मियां को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से हटाए जाने का विरोध किया है. इन आठ नोबेल विजेताओं सहित कुल 93 जानेमाने अर्थशास्त्रियों ने अपने हस्ताक्षर के साथ एक बयान जारी कर इस फैसले पर निराशा और असहमति जताई है.

आठ नोबेल पुरस्कार विजेताओं के आतिफ मियां के समर्थन में आने के कारण पाकिस्तान पर अब दबाव बढ़ गया है और अगर वो अपना फैसला वापस नहीं लेते है, तो दुनिया में पाकिस्तान की किरकिरी तय है. दुनिया में ये साबित हो जाएगा कि पाकिस्तान धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला देश है. आतिफ मियां दुनिया के जानेमाने अर्थशास्त्री हैं और उन्हें पाकिस्तान में पीएम की सलाहकार परिषद से सिर्फ इसलिए हटा दिया गया क्योंकि वो अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय से आते हैं और मुस्लिम कट्टरपंथी उनकी नियुक्ति का विरोध कर रहे थे.

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फैसले पर जताया दुख
तुर्की के अर्थशात्री और फोर्ड फाउंडेशन के प्रोफेसर दानी रो़ड्रिक ने कहा, 'ये बहुत दुखद है कि प्रिसंटन के आतिफ मियां, जो फिनांस और माइक्रोइकनॉमिक्स के बेहतरीन विद्वानों में हैं, उन्हें पाकिस्तान की आर्थिक सलाहकार परिषद से उनके धार्मिक विश्वास के कारण हटा दिया गया. हम आतिफ मियां का समर्थन में एक बयान जारी कर रहे हैं. इसमें 93 दिग्गज अर्थशात्रियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें से 26 पाकिस्तान में काम कर रहे हैं और आठ नोबेल पुरस्कार विजेता हैं.'

उन्होंने कहा कि आतिफ मियां की योग्यता को देखते हुए उन लोगों का विश्वास है कि ईएसी में उनकी भागीदारी से नीति-निर्माण में मदद मिलेगी और उनकी सलाह से पाकिस्तान की बड़ी आबादी के जीवन में सुधार आएगा.

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कट्टरपंथियों का दबाव
इससे पहले कट्टरपंथी मौलानाओं के दबाव में आतिफ मियां को प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी ईएसी से हटा दिया था. इस फैसले के विरोध में ईएसी में शामिल कई अन्य सदस्यों ने भी अपने इस्तीफे दे दिए थे. आतिफ मियां को उनके अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय से संबंधित होने के कारण हटाया गया है. अहमदिया समुदाय को भारत में इस्लाम का हिस्सा माना जाता है, लेकिन पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के दबाव में उनसे मुसलमान होने का दर्जा छीन लिया गया है.

पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र डॉन ने भी सरकार की आलोचना करते हुए एक संपादकीय लिखा था. डॉन का कहना है कि 'आतिफ मियां को ईएसी से हटाने के साथ ही एक सहिष्णु और समावेशी पाकिस्तान के जिन्ना के विजन को एक और झटका लगा है.'

अहमदिया के साथ अन्याय
पाकिस्तान के संविधान में अहमदिया को गैर मुस्लिम घोषित किया गया है और उनकी मान्यताओं को कई प्रमुख इस्लामिक स्कूलों में ईशनिंदा माना जाता है. अक्सर कट्टरपंथी उनको निशाना बनाते रहे हैं और उनके धार्मिक स्थलों पर भी तोड़-फोड़ की जाती रही है. मियां को हाल ही में 18 सदस्यीय ईएसी के सदस्य के तौर पर नामित किया गया था.

आतिफ मियां ‘शीर्ष 25 सबसे प्रतिभाशाली युवा अर्थशास्त्री' की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सूची में शामिल अकेले पाकिस्तानी हैं. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी से शिक्षित आतिफ मियां प्रतिष्ठित प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं और पाकिस्तानी अमेरिकी हैं. नामांकन वापस लेने की पुष्टि करते हुए संचार मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि सामाजिक स्तर पर किसी भी तरह के बंटवारे से बचने के लिए सरकार ने ईएसी के लिए मियां का नामांकन वापस लेने का फैसला किया है.

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