रिजर्व बैंक गवर्नर के अधिकारों में कटौती से पीछे हटी मोदी सरकार रिजर्व बैंक गवर्नर के अधिकारों में कटौती से पीछे हटी मोदी सरकार

रिजर्व बैंक के गवर्नर के नीतिगत ब्याज दर पर वीटो अधिकारों में कटौती का दांव उलटा पड़ने के बाद आज सरकार ने कहा कि अभी केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अधिकार में कटौती पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) ने कहा है कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर के अधिकारों में कटौती का मसौदा उसका नहीं है। इसके बाद वित्त सचिव राजीव महर्षि ने जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह मसौदा न तो वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग का है और न ही सरकार का, बल्कि देश के लोग इस मसौदा रिपोर्ट के मालिक हैं।

रिजर्व बैंक पर नीतिगत दरों में कटौती का बढ़ रहा दबाव रिजर्व बैंक पर नीतिगत दरों में कटौती का बढ़ रहा दबाव

रिजर्व बैंक पर मौद्रिक नीति की कल होने वाली तीसरी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती का दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ इस मुद्दे पर बंटे हुए हैं और उनका कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति उंची बनी हुई है जो कि रिजर्व बैंक को ऐसा करने से रोक सकती है। ज्यादातर बैंकरों और विशेषज्ञों का मानना है कि चार अगस्त को केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती की संभावना कम है क्योंकि फिलहाल खुदरा मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर है और ऋण का उठाव कम है। इधर, उद्योग जगत नीतिगत दरों में कटौती की मांग कर रहा है क्योंकि थोकमूल्य आधारित मुद्रास्फीति कम है और औद्योगिक वृद्धि में नरमी है। यहां तक कि सरकार भी चाहती है कि नीतिगत दर कम रहे ताकि वृद्धि को प्रोत्साहन मिले।