AIIMS के डॉक्टर ने बनाया देश का सबसे छोटा और सस्ता वेंटिलेटर, स्मार्टफोन से होगा ऑपरेट

स्मार्टफोन से ऑपरेट होने वाले वेंटिलेटर 'एग्वा' की कीमत केवल 35 हजार रुपए है.

AIIMS के डॉक्टर ने बनाया देश का सबसे छोटा और सस्ता वेंटिलेटर, स्मार्टफोन से होगा ऑपरेट
यह वेंटिलेटर हवा में मौजूद ऑक्सीजन को ही फिल्टर करके मरीज तक पहुंचाता है.

नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित अस्पताल एम्स के न्यूरोसर्जन डॉ दीपक अग्रवाल ने रोबोटिक्स इंजीनियर दिवाकर वैश्य के साथ मिलकर देश का सबसे छोटा वेंटिलेटर ईजाद किया है. 'एग्वा' नाम के वैंटिलेटर के जरिए देश के हेल्थकेयर सिस्टम में क्रांति आ सकती है. स्मार्टफोन से ऑपरेट होने वाले वेंटिलेटर 'एग्वा' की कीमत केवल 35 हजार रुपए है, जबकि औसतन प्राइवेट अस्पताल में वेंटिलेटर वाले मरीज का एक दिन का बिल ही 50 हजार से लेकर डेढ लाख तक आता है. दूसरी बड़ी बात इस वेंटिलेटर को ऑक्सीजन सप्लाई की जरूरत नहीं होती है. ये वेंटिलेटर हवा में मौजूद ऑक्सीजन को ही फिल्टर करके मरीज तक पहुंचाता है.

एम्स में कामयाब हुआ सबसे छोटे वेंटिलेटर का टेस्ट
एम्स में वेंटिलेटर को कामयाबी के साथ मरीजों पर चेक कर लिया गया है. मरीज के तीमारदार को थोड़ी जानकारी देकर इसे घर पर ही लगाया जा सकता है. सांस की बीमारी के मरीज, स्पाइनल इंजरी या सिर पर चोट लगने वाले मरीज, कोमा के मरीज जिन्हें कुछ महीनों से लेकर कई सालों तक वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है, वो इसके इस्तेमाल से घर पर रह सकते हैं.

एम्स के न्यूरोसर्जन डॉ दीपक अग्रवाल के मुताबिक, अगर वेंटिलेटर की पावर कट जाए तो ये वार्निंग सिग्नल देने लगता है. बैटरी खत्म होने वाली हो तो भी ये वार्निंग देने लगता है. इसे बनाने वाले रोबोटिक्स इंजीनियर दिवाकर वैश्य के मुताबिक जल्दी ही इसका नया वर्जन बाजार में होगा जिससे डॉक्टर के पास इस वेंटिलेटर का डेटा भी पहुंचने लगेगा और वो इसे रिमोट के जरिए कहीं भी बैठे कंट्रोल भी कर सकेंगे.

चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में भी इस्तेमाल
अस्पताल में लगे वेंटिलेटर की कीमत 15 से 20 लाख रुपए होती है, जबकि इसकी कीमत 35 हजार रखी गई है. इस वेंटिलेयरका इस्तेमाल एम्स के अलावा चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में भी किया जा रहा है. आर्मी और नेवी के अस्पतालों ने एंबुलेंस में मरीजों को ट्रांसपोर्ट करने के लिए इस वेंटिलेटर के इस्तेमाल में दिलचस्पी दिखाई है. अब ये वेंटिलेटर 'एग्वा' के नाम से बाजार में मौजूद है. डॉ दीपक अग्रवाल के नाम से-एग्, और दिवाकर वैश्य के नाम से-व, लेकर इसका नाम 'एग्वा' रखा गया है.

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