अब इंसानों में ट्रांसप्लांट किए जा सकेंगे सुअर के अंग

दूसरे जानवरों के अंगों को इंसानों में प्रत्यारोपित करने की कोशिशें वैज्ञानिक काफी सालों से कर रहे हैं.

अंतिम अपडेट: शनिवार अगस्त 12, 2017 - 11:19 AM IST
अब इंसानों में ट्रांसप्लांट किए जा सकेंगे सुअर के अंग
सूअर के डीएनए में पोरसिन इंडोजीनस रेट्रोवायरसेज (पर्व्स) पाए जाते हैं, जिनकी वजह से ह्यूमन सेल को खतरा होता है. (फाइल फोटो)

वाशिंगटन: अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में वैज्ञानिकों के हाथ एक नई सफलता हाथ लगी है. अमेरिकी चिकित्सा विज्ञानियों को दावा है कि अब से इंसानों में सुअर के अंग आसानी से ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं. वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग टूल क्रिस्पर कास-9 की सहायता से सूअर(पिग) के डीएनए में मिलने वाला वह वायरस हटा दिया है, जिसके चलते अभी तक उसके ऑर्गन को इंसान में ट्रांसप्लांट करने में मुश्किल आ रही थी. सूअर के डीएनए में पोरसिन इंडोजीनस रेट्रोवायरसेज (पर्व्स) पाए जाते हैं, जिनकी वजह से ह्यूमन सेल को खतरा होता है. 

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने सबसे पहले 25 सूअर में पर्व्स की मैपिंग की. फिर सूअर की उन सेल्स को टेस्ट किया जो ह्यूमन सेल्स को संक्रमित करती हैं. इसके बाद वैज्ञानिकों ने इन पर्व्स को 100% तक हटाने में कामयाबी हासिल की है. इससे सूअर के किडनी, हॉर्ट और अन्य ऑर्गन को इंसान में ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा.

बायोटेक कंपनी ई-जेनेसिस के को-फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट डॉ. लुहान यांग कहते हैं कि यह रिसर्च ऑर्गन ट्रांसप्लांट में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के लिहाज से काफी अहम है. साथ ही क्रास स्पीसीज वायरल ट्रांसमिशन से होने वाले खतरे को बताया गया है. हमारी टीम आने वाले समय में जीन एडिटिंग के माध्यम से पर्व्स फ्री सूअर के ऑर्गन डिलीवर करेगी. पर्व्स फ्री सूअर की यह रिपोर्ट पहली बार प्रकाशित हुई है. 

नहीं पड़ेगी डोनर की जरूरत 
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर इयान मेककोननेल का कहना है कि मॉर्डन मेडिकल साइंस के लिए यह पिछले 20 साल की सबसे बड़ी कामयाबी है. इससे आने वाले समय में जानवरों के ऑर्गन और टिश्यू इंसान में ट्रांसप्लांट करने में सफलता मिलेगी. साथ ही ऑर्गन डोनर की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी. दुनिया में मेडिकल साइंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्रांसप्लांट्स के लिए ऑर्गन की उपलब्धता है. इसके चलते हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है. इसलिए अमेरिकी वैज्ञानिकों की इस सफलता को काफी अहम माना जा रहा है. 

काफी सालों से हो रहा है इस दिशा में प्रयास 
दूसरे जानवरों की हॉर्ट, लिवर और किडनी को इंसानों में प्रत्यारोपित करने की कोशिशें वैज्ञानिक 1960 के दशक से कर रहे हैं, लेकिन यह कभी सफल नहीं हुआ. 2015 में सूअर के ऑर्गन को लंगूर में ट्रांसप्लांट किया गया था, लेकिन दो साल में ही उसकी मौत हो गई थी. सूअर के हॉर्ट, किडनी और लिवर इंसान से काफी मिलते-जुलते हैं वैज्ञानिकों ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए बाकी जानवरों की तुलना में सूअर को बेहतर विकल्प पाया, क्योंकि उसके किडनी और हॉर्ट का आकार इंसान की ही तरह होता है. साथ ही उसमें बीमारियों का खतरा भी कम है. इनका विकास भी कम समय में हो जाता है और ये आसानी से उपलब्ध भी हैं.