वेंकैया नायडू के 5 मजबूत पक्ष जिससे NDA ने उन्हें चुना उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू को सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुन लिया गया. अब उनका मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी से होगा. नायडू से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जो उनके पक्ष में गयीं. आइए, हम उनकी 5 मुख्य बातों पर नजर डालते हैं जिनसे उन्हें एनडीए के सभी दलों का समर्थन आसानी से हासिल हो गया. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Jul 17, 2017, 08:49 PM IST
वेंकैया नायडू के 5 मजबूत पक्ष जिससे NDA ने उन्हें चुना उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार
अपने राजनीतिक जीवन में विवादों से दूर रहे हैं वेंकैया नायडू. फाइल फोटो

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू को सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुन लिया गया. अब उनका मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी से होगा. नायडू से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जो उनके पक्ष में गयीं. आइए, हम उनकी 5 मुख्य बातों पर नजर डालते हैं जिनसे उन्हें एनडीए के सभी दलों का समर्थन आसानी से हासिल हो गया. 

1-निर्विवाद चेहरा

अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं नायडू का चेहरा निर्विवाद रहा है. भाजपा में ही नहीं वह विपक्षी दलों में भी खासे लोकप्रिय हैं. नायडू कभी विवादों में नहीं रहे. यह एक बड़ी वजह है जिसके चलते वह एनडीए के सर्वमान्य चेहरे के रूप में उभरे.

2. दक्षिण कनेक्शन 

नायडू दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश से आते हैं. भाजपा का ध्यान लंबे समय से दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रही है. राष्ट्रपति पद के लिए उत्तर भारत से उम्मीदवार और उप राष्ट्रपति पद के लिए दक्षिण से उम्मीदवार पेश कर भाजपा ने एक संतुलन साधने का भी प्रयास किया है. 

3. अनुभवी हैं नायडू

नायडू चार बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं. वह राजस्थान से सांसद हैं. भाजपा के पास राज्यसभा में नंबर की भी कमी है, अगर राज्यसभा का कोई अनुभवी नेता इस पद पर चुना जाता है तो सदन चलाने के लिए आसानी होगी. नायडू पहली बार राज्यसभा के लिए 1998 में चुने गए थे, इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने. इसके अलावा भी वेंकैया नायडू कई कमेटियों का हिस्सा रह चुके हैं.

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4. भरोसेमंद चेहरा

संघ और बीजेपी के बीच हुई बैठक के बाद खबरें थे कि भाजपा चाहती है कि कोई ऐसा चेहरा आगे आए जो संघ और भाजपा की विचारधारा को समझता हो. नायडू 1975 के दौरान इमरजेंसी में जेल भी गए थे. 1977 से 1980 के बीच जनता पार्टी के समय में वे यूथ विंग के अध्यक्षभी रहे. 1978 में वह विधायक भी चुने गए थे. इसके अलावा नायडू पार्टी के कई अहम पदों पर भी रह चुके हैं. 1980 से 1983 के बीच नेशनल बीजेपी यूथ विंग के उपाध्यक्ष, आंध्र प्रदेश में 1980 से 85 तक विधानसभा में बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष, 1988 से 1993 के बीच वह आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी बने. 1993 से 2000 तक नायडू भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बने. 2002 में वे पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. वे दिसंबर 2002 तक अध्यक्ष रहे. इसके बाद 2004 में वह दोबारा अध्यक्ष बने.

5. सरकार का बड़ा चेहरा

पार्टी के साथ-साथ वेंकैया नायडू सरकार में भी बड़ा चेहरा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बाद वेंकैया ही सबसे सीनियर मंत्री हैं. वेंकैया अटल सरकार के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री थे, वहीं मोदी सरकार के दौरान उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय की बागडोर संभाली. इसके अलावा नायडू ने संसदीय कार्यमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री का कार्यभार भी संभाला.