चीन-पाक से कैसे निपटेंगे! सेना के 68% हथियार पुराने, संसदीय समिति ने जताई चिंता

भाजपा सांसद मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर) की अध्यक्षता वाली समिति की संसद में पेश रिपोर्ट में चिंता जाहिर की गई है.

चीन-पाक से कैसे निपटेंगे! सेना के 68% हथियार पुराने, संसदीय समिति ने जताई चिंता
सेना के 68% हथियार पुराने. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

नई दिल्‍ली : भारतीय सेना के पास मौजूद हथियारों के आधुनिकीकरण का मुद्दा एक बार फिर गर्म हुआ है. संसद की स्‍थायी समिति ने मंगलवार को सदन में रिपोर्ट पेश करते हुए जानकारी दी की हमारी सेना के पास मौजूदा हथियारों में से 68% हथियार पुराने हैं. पाकिस्‍तान और चीन द्वारा लगातार अपनी-अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण करने और सैन्‍य क्षमता बढ़ाने के संबंध में भारतीय सेना की इस स्थिति पर स्‍थायी समिति ने चिंता भी जाहिर की है. भाजपा सांसद मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (रिटायर) की अध्यक्षता वाली समिति की संसद में पेश रिपोर्ट में यह चिंता जाहिर की गई है. यह स्थिति तब है जब भारत दुनिया का सबसे अधिक हथियार खरीदने वाला देश है. 

बजट को भी नाकाफी बताया
स्‍थायी समिति ने साल 2018-19 के दौरान सरकार द्वारा सेना को आवंटित बजट की जांच की. इस दौरान बजट को नाकाफी पाया. समिति के मुताबिक सेना को आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। जबकि आपातस्थिति के लिए खरीद समेत पहले से चल रही 125 स्‍कीमों की जरूरत भी इससे पूरी नहीं होगी. समिति ने आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ रुपये के आवंटन को भी नाकाफी बताया. साथ ही टिप्‍पणी की कि यह तो पहले से चिह्नित 29,033 करोड़ रुपये के खर्च को भी पूरा नहीं करता. इसलिए सेना अपने आधुनिकीकरण के लिए कुछ भी नहीं कर सकती.

8% ही बेहतरीन श्रेणी के हथियार
समिति के मुताबिक भारतीय सेना के पास महज 8% हथियार ही स्‍टेट ऑफ आर्ट या बेहतरीन श्रेणी के हैं. वहीं कुल मिलाकर सेना के पास 24% हथियार आधुनिक हैं. यही 24% साजोसामान मौजूदा समय में इस्‍तेमाल के लायक है. लेकिन यह आंकड़ा नाकाफी है. क्‍योंकि मौजूदा समय में किसी भी सेना के लिए आदर्श स्थिति यह है कि उसके पास औसतन एक तिहाई साजोसामान विंटेज श्रेणी, एक तिहाई मौजूदा जरूरत के मुताबिक, एक तिहाई साजोसामान आधुनिक और एक तिहाई स्‍टेट ऑफ आर्ट श्रेणी का साजोसामान हो.

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पाक-चीन से जंग के खतरे पर जताई चिंता
संसदीय समिति के सामने सेना ने कहा कि देश को दो मोर्चे पर खतरा है. पाकिस्तान और चीन अपनी-अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण का कार्य तेजी से कर रहे हैं. साथ ही चीन भारत से लगी सीमा के आसपास अवैध निर्माण कर रहा है. इनमें सड़कें और अन्‍य निर्माण शामिल हैं. लेकिन भारतीय सेना के पास अपने मौजूदा कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए भी बजट नहीं है. सेना ने पठानकोट और कश्मीर में आतंकी शिविर पर हमले, नियंत्रण रेखा पर पाक की बढ़ती फायरिंग और डोकाला में चीन के आक्रामक रुख का जिक्र करते हुए कहा कि उसे संसाधनों की अधिक जरूरत है.

14% बजट ही आधुनिकीकरण के लिए उपलब्‍ध
समिति ने सेना को आवंटित बजट को बेहद कम बताते हुए कहा कि सेना को मिला सिर्फ 14% बजट ही आधुनिकीकरण के लिए उपलब्ध है. दूसरी ओर 63% वेतन देने में खर्च होता है. 20% सामान्य रखरखाव पर खर्च होता है. जबकि 3% ढांचागत सेवाएं स्थापित करने पर खर्च होता है. समिति ने रिपोर्ट में प्रस्‍ताव दिया है कि सेना के आधुनिकीकरण का बजट कुल बजट का 22-25% के बीच ही होना चाहिए.

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार
सोमवार को स्‍टॉकहोम के थिंकटैंक इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत दुनिया का सबसे अधिक हथियार खरीदने वाला देश है. देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने और सेना को मजबूत करने के लिए भारत ने 2013-17 के बीच विश्‍व में खरीदे जाने वाले हथियारों में सर्वाधिक 12% हथियार खरीदे. 2008-12 और 2013-17 दौरान भारत का हथियार आयात 24% बढ़ा है. भारत को हथियार सप्‍लाई करने वाले देशों में पहला स्‍थान रूस का है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने हथियार खरीदने में पिछले 10 साल में करीब 100 अरब डॉलर खर्च किए हैं.

चीन 5वें और पाकिस्‍तान 9वें स्‍थान पर
दुनिया के अलग-अलग देशों से हथियार खरीदने के मामले में भारत के बाद दूसरे स्‍थान पर सऊदी अरब है. तीसरे और चौथे स्‍थान पर क्रमश: मिस्र और संयुक्‍त अरब अमीरात है. भारत के साथ सीमा विवाद को बढ़ावा देने वाला चीन इस सूची में पांचवें स्‍थान पर है. छठे और सातवें स्‍थान पर क्रमश: ऑस्‍ट्रेलिया और अल्जीरिया हैं. आठवें स्‍थान पर इराक है. भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्‍तान इस सूची में 9वें स्‍थान पर है.

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