मां की मौत के बाद अब नुस्ली वाड़िया लड़ेंगे जिन्ना हाउस का मुकदमा

बाम्बे हाई कोर्ट ने उद्योगपति नुस्ली वाडिया को अपनी मां दीना वाडिया की मृत्यु के बाद जिन्ना हाउस केस का मुकदमा लड़ने की इजाजत दे दी है.

मां की मौत के बाद अब नुस्ली वाड़िया लड़ेंगे जिन्ना हाउस का मुकदमा
जिन्ना हाउस मुंबई के पॉश इलाके में 2.5 एकड़ में फैला हुआ है.

नई दिल्ली: बाम्बे हाई कोर्ट ने उद्योगपति नुस्ली वाडिया को अपनी मां दीना वाडिया की मृत्यु के बाद जिन्ना हाउस केस का मुकदमा लड़ने की इजाजत दे दी है. जिन्ना हाउस पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का घर है, जिस पर उनकी बेटी दीना वाडिया ने अपना दावा किया था.  

जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने नुस्ली वाडिया द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया. इस याचिका में उन्होंने कहा था कि पिछले साल उनकी मां की मृत्यु के बाद इस मामले में उन्हें याचिकाकर्ता बनने की अनुमति दी जाए. इस तरह अब जिन्ना हाउस पर नुस्ली वाडिया अपना दावा कर सकेंगे. केंद्र सरकार ने नुस्ली वाडिया की याचिका का विरोध किया था.

लंबे वक्त से चल रहा है मुकदमा 
मोहम्मद अली जिन्ना ने दक्षिण मुंबई के मालाबार हिल्स पर एक बंगले का निर्माण कराया था. इस बंगले के लिए लंबे वक्त से दीना वाडिया और भारत सरकार के बीच मुकदमा चल रहा था. दीना वाडिया की मृत्यु दो नवंबर 2017 को हुई. दीना ने अपनी वसीयत में नुस्ली वाडिया को अपना वसीयत प्रबंधन बनाया. नुस्ली वाडिया को वकील ने कहा कि वाडिया अपनी मां के कानूनी उत्तराधिकार हैं और इसलिए बेटे को मां की जगह याचिकाकर्ता बनने की इजाजत दी जानी चाहिए.

जिन्ना हाउस मुंबई के पॉश इलाके में 2.5 एकड़ में फैला हुआ है. सरकार ने इसे 'निष्क्रांत संपत्ति' घोषित किया है, यानी ऐसे व्यक्ति की संपत्ति जो एक मार्च 1947 के बाद भारत छोड़कर पाकिस्तान चला गया हो. सरकार का कहना है कि जिन्ना ने ये प्रॉपर्टी अपनी बहन फातिमा के नाम 30 मई 1939 को कर दी थी. हालांकि दीना और उनके वकील इस बात से इनकार करते रहे हैं.

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