आतंक पर भारी पड़ी बाबा बर्फानी की भक्ति, अमरनाथ में भक्तों ने तोड़ा दो साल का रिकॉर्ड

जम्मू-कश्मीर में आंतकवाद और मौसम की कठिनाइयां भी तीर्थयात्रियों के हौसले तोड़ नहीं पाईं और इसका नतीजा है कि इस साल अमरनाथ यात्रियों की संख्या वर्ष 2017 के रिकॉर्ड को तोड़ चुकी है. 

आतंक पर भारी पड़ी बाबा बर्फानी की भक्ति, अमरनाथ में भक्तों ने तोड़ा दो साल का रिकॉर्ड
फाइल फोटो

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में आंतकवाद और मौसम की कठिनाइयां भी तीर्थयात्रियों के हौसले तोड़ नहीं पाईं और इसका नतीजा है कि इस साल अमरनाथ यात्रियों की संख्या 2017 के रिकॉर्ड को तोड़ चुकी है, जबकि अभी यात्रा में चार सप्ताह बचे हुए हैं. देश भर से शिवशंकर के भक्त अमरनाथ के दर्शन करने आ रहे हैं. इस समय सावन का महीना चल रहा है, जिसे हिंदू परंपरा के अनुसार भगवान शिव का महीना माना जाता है. इसलिए माना जा रहा है कि अमरनाथ में तीर्थयात्रियों की आवक में बनी रहेगी. 

तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि के साथ ही कुछ चुनौतियां भी बढ़ गई हैं. यात्रा के आयोजन से जुड़े एक प्रमुख संगठन ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल और अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष एनएन वोहरा ने कहा है कि अगले साल से यात्रा की अवधि को एक महीने के लिए सीमित कर दिया जाए. 

जलवायु परिवर्तन और तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण अमरनाथ की गुफा में बर्फ के शिवलिंग साल दर साल तेजी से पिघल रहा है. इस साल भी ऐसा ही है. हालांकि धार्मिक भावनाओं के देखते हुए यात्रा की अवधि को कम करना आसान नहीं. 

समाचार पत्र इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार अमरनाथ श्राइन बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'सोमवार को यात्रा के 33वें दिन यात्रियों की संख्या 2017 के आंकड़े को पार कर गई. 2017 में 2.60 लाख लोगों ने अमरनाथ के दर्शन किए थे. 2016 में 48 दिन की यात्रा के दौरान केवल 2.2 लाख तीर्थयात्री ही आए थे.' उन्होंने बताया, 'इस साल हम तीन लाख तीर्थयात्रियों के आंकड़े को पार कर सकते हैं. लेकिन अब यात्रा को सिर्फ एक महीने तक सीमित करने की मांग भी बढ़ रही है.'

बीजेपी इससे पहले यात्रा को सीमित करने का विरोध करती रही है और 2012 में जब यात्रा को 39 दिन के लिए सीमित किया गया था, तो पार्टी ने राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था. बीजेपी के एक मंत्री ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिएं, क्योंकि यात्रा हिंदू कैलेंडर के जेष्ठ पूर्णिमा के दिन शुरू होती है और परंपरा के अनुसार श्रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन) के दिन खत्म होती है.

मंत्री ने कहा कि यात्रा की अवधि इन तिथियों पर निर्भर करती है, लेकिन साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के आदेश का पालन भी करना है. अमरनाथ बर्फानी लंगर संगठन ने श्राइन बोर्ड के सामने पिछले सप्ताह एक प्रजेंटेशन दिया था. इसमें पिछले पांच साल के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि 90% से अधिक तीर्थयात्री शुरुआत के 30 दिन में आते हैं और इसलिए यात्रा को 30 दिन के लिए सीमित कर देना चाहिए. 

श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने एक बयान में कहा, 'इस मांग को ध्यान में रखते हुए बोर्ड का मानना है कि इस विषय पर सार्वजनिक रूप से आगे और चर्चा करने की जरूरत है.'

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