क्या प्लास्टिक की बोतल में दवाइयां दूषित होती हैं?

Last Updated: Monday, June 19, 2017 - 10:29
क्या प्लास्टिक की बोतल में दवाइयां दूषित होती हैं?
क्या प्लास्टिक बोतलों में दवाईयां प्रदूषित होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: केंद्र ने केंद्रीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) से यह पता लगाने के लिए विस्तृत अध्ययन करने को कहा है कि प्लास्टिक की बोतल में तरल दवाई रखने से क्या उसमें किसी प्रकार की लीचिंग हो रही है. ढाई साल से ज्यादा वक्त पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से प्रारूप निर्देश आए थे जिसमें दवाइयों को प्लास्टिक और पॉलीथीन टेरिफ्थेलैट (पीईटी) बोतलों की बजाय कांच की बोतलों में रखने की बात कही गई है.

क्या होता है लीचिंग?

लीचिंग वह प्रक्रिया है जिसमें बोतल में रखे जल में घुलनशील तत्व बाहर आ जाते हैं और उसमें रखी सामग्री से मिल जाते हैं. पिछले साल सरकारी अध्ययन में यह सामने आया था कि प्लास्टिक की बोतलों में रखे गए खांसी के सीरप और अन्य तरल दवाइयों में लेड सहित विषाक्त सामग्री मिली है. इसने कहा था कि ऐसी बोतलों से खतरनाक सामग्री निकलती है और ऐसी बोतलों में दवाइयों के रखने पर रोक लगाने का सुझाव दिया है.

मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि अध्ययन में सामने आई बातों को दवाइयों के लिए मानक के देश के शीर्ष वैधानिक प्राधिकरण दवा तकनीक सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) ने भी समर्थन किया था. सूत्र ने कहा, डीटीएबी ने यह भी सिफारिश की थी कि प्लास्टिक और पीईटी बोतलों का इस्तेमाल दवाइयों को रखने के लिए नहीं हो खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गो के लिए बनी दवाओं के मामले में.  मई 2016 में सामने आया कि अध्ययन पूर्व जैव प्रौद्योगिकी सचिव एमके भान की अगुवाई में किए गए अध्ययन के विपरीत था.

सर्वे में इंसान की सेहत के लिए खतरा होने की बात सामने आई थी

एमके भान समिति ने उस साल मार्च में राष्ट्रीय हरित अधिकरण को बताया था कि इस तरह के निर्णायक सबूत नहीं है जो यह बताते हैं कि दवाइयों को रखने के लिए पीईटी या सुरमे जैसे योज्य पदार्थ का उपयोग करने से अनुमेय सीमा से अधिक, जल में घुलनशील तत्व बाहर आ सकते हैं और इंसान की सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं. आईसीएमआर ने अब हैदराबाद के नेशनल इंस्ट्टीयूट ऑफ न्यूट्रीशन से अध्ययन की योजना बनाने और अध्ययन करने के लिए कहा है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क

First Published: Monday, June 19, 2017 - 10:29
comments powered by Disqus