आरुषि केस: सीबीआई की जांच में कमी, तलवार दंपति को संदेह का लाभ- HC

लवार दंपति की वकील रेबेका जॉन ने कहा कि कोर्ट ने हमारी दलील को माना और हमने यह साबित कर दिया कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए साक्ष्‍य गलत थे.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Updated: Oct 12, 2017, 03:54 PM IST
आरुषि केस: सीबीआई की जांच में कमी, तलवार दंपति को संदेह का लाभ- HC
फाइल फोटो

इलाहाबाद: आरुषि और हेमराज मर्डर केस में राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की जांच में कई खामियां हैं. इसलिए संदेह का लाभ देते हुए तलवार दंपति को बरी किया जाता है. इस पर तलवार दंपति की वकील रेबेका जॉन ने कहा कि कोर्ट ने हमारी दलील को माना और हमने यह साबित कर दिया कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए साक्ष्‍य गलत थे. फैसले के बाद सीबीआई ने पहली प्रतिक्रिया में कहा कि वह आरुषि मामले में हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन करेगी और भविष्य का कदम तय करेगी. तलवार दंपति इस वक्‍त गाजियाबाद की डासना जेल में हैं. उनके शुक्रवार को रिहा होने की संभावना है.

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इससे पहले इस मामले में न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ने दोपहर करीब तीन बजे अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषी नहीं माना. खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सीबीआई की जांच में कई कमियां थीं. मामले में तलवार दंपति को संदेह का लाभ मिला. न्‍यायालय ने अपने फैसले में कहा कि मां-बाप राजेश और नूपुर तलवार ने आरुषि को नहीं मारा. इस मामले में दोषी दंपती डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत की ओर से उम्रकैद की सजा के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी.

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उल्‍लेखनीय है कि डॉ. तलवार की बेटी आरुषि की हत्या 15 एवं 16 मई 2008 की दरम्यानी रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी. घर की छत पर उनके घरेलू नौकर हेमराज का शव भी पाया गया था. इस हत्याकांड में नोएडा पुलिस ने 23 मई को डॉ. राजेश तलवार को बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. सीबीआई की जांच के आधार पर गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद से तलवार दंपति जेल में बंद थे.