CJI दीपक मिश्रा के रिटायर होने से पहले उनकी बेंच इन महत्वपूर्ण मामलों पर दे सकती है फैसला

जस्टिस रंजन गोगोई के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने की मीडिया रिपोर्ट्स के बीच वर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा के शेष 19 कार्य दिवसों में सुप्रीम कोर्ट कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला दे सकता है.

CJI दीपक मिश्रा के रिटायर होने से पहले उनकी बेंच इन महत्वपूर्ण मामलों पर दे सकती है फैसला
फाइल फोटो

नई दिल्ली: जस्टिस रंजन गोगोई के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने की मीडिया रिपोर्ट्स के बीच वर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा के शेष 19 कार्य दिवसों में सुप्रीम कोर्ट कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला दे सकता है. इन मुद्दों में आधार, अयोध्या का टाइटिल सूट, सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश, 'भेदभावपूर्ण' व्यस्क कानून और एससी/एसटी के लिए प्रमोशन में आरक्षण शामिल हैं. 

इसके अलावा एक महत्वपूर्ण केस है, जिसमें ये तय किया जाना है कि आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे राजनीतिज्ञों के मुकदमे के किस स्टेज पर उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जाएगा. ये फैसला बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत की राजनीति को स्वच्छ बनाने में बहुत बड़ा योगदान होगा. राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने में बहुत मदद मिलेगी. 

महिला अधिकारों के मसले

ये सभी महत्वपूर्ण मुद्दे उन संविधान पीठ के पास हैं, जिनकी मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा अगुवाई कर रहे हैं. जस्टिस दीपक शर्मा महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं. इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रंजन गोगोई अलगे सीजेआई बनेंगे. रंजन गोगोई उन चार जजों में शामिल हैं, जिन्होंने कुछ महीने पहले प्रेस कॉन्फ्रैंस करके सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए थे.

जस्टिस दीपक शर्मा के कार्यकाल के 19 दिनों में महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश, दाऊदी-बोहरा मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के खतने का मुद्दा और हिंदू से शादी करने पर पारसी महिलाओं के अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल न होने की परंपरा जैसे मुद्दों में सुनवाई पूरी हो सकती है. इस लिहाज से अगले कुछ दिन महिलाओं के धार्मिक अधिकारों के लिहाज से महत्वपू्र्ण होंगे.

इस तरह अयोध्या मामले में इस बात पर फैसला होगा है कि 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई तीन जजों की पीठ करेगी, या कोई बड़ी पीठ. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सुनवाई बड़ी पीठ को करनी चाहिए.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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