बिहारः बेगूसराय मॉब लिंचिंग मामले में मुख्य सचिव और डीजीपी को NHRC की नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस भेजा है.

बिहारः बेगूसराय मॉब लिंचिंग मामले में मुख्य सचिव और डीजीपी को NHRC की नोटिस
बेगूसराय में ग्रामीणों ने अपराधियों को पीट-पीट कर मार डाला. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली/पटनाः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस भेजा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार के बेगूसराय जिले में भीड़ ने तीन अपराधियों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. वहीं, पुलिस ने इस मामले में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाई है.

बेगूसराय में मॉब लिंचिंग के मामले में मुख्य सचिव और डीजीपी को एनएचआरसी के द्वारा नोटिस जारी किया गया है. आयोग ने सरकार को भी इस तरह की घटना को रोकने को कहा है. वहीं, बेगूसराय के मामले में भी कार्रवाई कर 6 हफ्तों में रिपोर्ट पेश करने को कहा है. आयोग ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है.

Bihar NHRC Notice to Chief secreatary and DGP in Begusarai Mob lynching case

दरअसल बेगूसराय जिले के छौड़ाही थाना क्षेत्र के नारायण पीपर गांव में ग्रामीणों ने बीते शुक्रवार (7 सितंबर) को तीन अपराधियों की जमकर पिटाई की. जिससे उनकी मौत हो गई. बताया गया था कि अपराधी छात्रा का अगवा करने पहुंचे थे. लेकिन अपराधी ग्रामीणों के हाथ पकड़े गए और उनकी जमकर पिटाई की गई.

ग्रामीणों ने अपराधियों को लाठी और डंडों से पीटा था. जिससे तीनों अपराधियों की मौत हो गई. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि अपराधी हथियार लेकर बच्ची को अगवा करने आए थे. लेकिन समय रहते उसे पकड़ लिया गया.

इस मामले में बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक आदित्य कुमार ने थाना प्रभारी सिंटू झा को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी की लापरवाही की वजह से उन्हें निलंबित किया गया है. साथ ही पूरे मामले की जांच की जा रही है.

Bihar NHRC Notice to Chief secreatary and DGP in Begusarai Mob lynching case

इस मामले में अब एडीजी मुख्यालय एस के सिंघल ने बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि बेगूसराय की घटना मॉब लिचिंग नहीं है. लोगों ने सेल्फ डिफेंस में ये कदम उठाया है. साथ ही उन्होंने कहा है कि मारे गए लोगों का लंबा अपराधिक इतिहास रहा है.

अपराधी रिवाल्वर के साथ लड़की का अपहरण करने आए थे. सेल्फ डिफेंस में लोगों ने यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा है कि मॉब लिचिंग और सेल्फ डिफेंस के बीच के अंतर को समझने की जरूरत है. 

अब इस मामले में डीजीपी और मुख्य सचिव को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी कर कार्रवाई के संदर्भ में जवाब मांगा है. साथ ही इस तरह की घटना को लेकर नाराजगी भी जताई है. लोगों द्वारा कानून को हाथ में लेने को लेकर कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून को किसी भी हाल में हाथ में लेने का अधिकार नहीं दिया गया है.

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