एक साल तक बच्चे को कलेजे से लगाकर पाला, पुलिस जब छीनने आई तो पता चला चोरी का है

उस महिला का रो-रोकर बुरा हाल था, जो कभी मां नहीं बन सकती थी और मां बनने की ख्वाहिश में एक बच्चे को खरीदा था.

एक साल तक बच्चे को कलेजे से लगाकर पाला, पुलिस जब छीनने आई तो पता चला चोरी का है
मिशनरी ऑफ चैरिटी में बच्चों की तस्करी की घटनाएं थम नहीं रही है.

सन्नी शरद, रांची: मिशनरी ऑफ चैरिटी से बेचे गए बच्चे लगातार बरामद हो रहे हैं. पुलिस ने बुधवार को तीसरे बच्चे को भी कोकर इलाके से बरामद कर लिया. करीब एक साल तक कलेजे से लगा कर बच्चे को पालने वाली मां से जब पुलिस बच्चे को छीनकर ले जाने लगी तो मां के आंसू और शब्द सुनकर सबकी आंखें भर आई. आखिर में रोते हुए कह रही है 'बच्चे क्या होते हैं उनसे पूछिये जो औरत मां नहीं बन पाती.'

उस महिला का रो-रोकर बुरा हाल था, जो कभी मां नहीं बन सकती थी और मां बनने की ख्वाहिश में एक बच्चे को खरीदा था. सिमडेगा की रहने वाली इस महिला ने मिशनरी ऑफ चैरिटी के अनिमा इंदुवार के जरिए एक साल पहले एक बच्ची को खरीदा था. उस वक्त इसे नहीं पता था कि बच्ची के नाम पर जो खुशियां वह घर ला रही है एक दिन यही दुख का बड़ा कारण बन जाएगा. 

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दरअसल, बच्चों को गोद लेने कि एक कानूनी प्रक्रिया होती है और रांची के मिशनरी ऑफ चैरिटी निर्मल हृदय से बच्चों के सौदे का जो मामला उजागर हुआ है, उसमें यही बात निकलकर सामने आई है कि इस कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर बच्चों का सौदा किया गया है. एक शिकायत पर पुलिस ने जब मिशनरी ऑफ चैरिटी की अनिमा इंदुवार और सिस्टर कॉंसेलिया को गिरफ्तार किया था तो उसने चार बच्चे को बेचने की बात कबूली थी. 

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दो बच्चे पहले ही बरामद हो चुके हैं. बुधवार को पुलिस ने कोकर इलाके से इस तीसरी बच्ची को बरामद किया था. बरामद करने के बाद पुलिस ने बच्ची को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया. बाल कल्याण समिति जब बच्ची को शेल्टर होम भेजने लगी तो बाल कल्याण समिति के ही दफ्तर में ही काफी हंगामा हुआ. बच्ची को खरीदने वाली मां उसे देना नहीं चाहती थी और जिस मां ने बच्ची को जन्म दिया था वह भी चाहती थी कि उनकी बच्ची उसी महिला के पास रहे, जिसके पास से पुलिस ने बरामद किया है. देर रात तक सीडब्ल्यूसी और शेल्टर होम के बाहर हंगामा होते रहा पुलिस आई और कानूनी दायरे के सामने मां की ममता हार गई. 

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अधिकारियों ने कहा कि वह नियम से बंधे हैं और यदि वह सीडब्ल्यूसी के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है तो डीसी के पास अपील कर इस बच्ची को फिर से प्राप्त कर सकते हैं. बच्चे बेचने के मामले उजागर होने के बाद यह मामला अपने आप में अनोखा था. इसलिए अब ऐसी परिस्थिति ना बने या फिर ऐसी परिस्थिति से कैसे निपटा जाए इस पर विभाग और प्रशासन को जरूर सोचना होगा.

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