मंदिरों के सोने से बाढ़ प्रभावित केरल के पुनर्निर्माण में मिल सकती है मदद : BJP सांसद

Zee News Desk Thu, 13 Sep 2018-12:41 am,

केरल में पिछले महीने बाढ़ से 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और इस समय व्यापक स्तर पर पुनर्निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं.

नई दिल्ली: भाजपा सांसद उदित राज ने सलाह दी है कि पिछले महीने बाढ़ से तबाह हुए केरल के लोगों की मदद के लिए वहां के तीन प्रमुख मंदिरों के ‘सोने एवं धन’ का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,‘पदमनाभ, सबरीमला, गुरूवायूर के पास एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का सोना एवं धन है ओर 21 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी धन इन मंदिरों की संपत्ति से काफी कम है. इस तरह के धन का और क्या इस्तेमाल हो सकता है. लोग मर रहे हैं और दुख में हैं.’


उत्तर पश्चिम दिल्ली के सांसद ने लोगों से यह मांग करने की अपील की. गौरलतब है कि केरल में पिछले महीने बाढ़ से 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और इस समय व्यापक स्तर पर पुनर्निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं.


केरल में बाढ़ के बाद नदियां और कुएं सूख रहे हैं
वहीं बाढ़ प्रभावित केरल में तापमान बढ़ने के साथ नदियों और कुओं के अप्रत्याशित तौर पर सूखने की खबरों ने राज्य सरकार को फिक्रमंद कर दिया है. सरकार ने बाढ़ के बाद के घटनाक्रम पर वैज्ञानिक अध्ययन कराने का निर्णय किया है. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद को घटनाक्रम का अध्ययन करने और समस्या का संभावित समाधान बताने का निर्देश दिया है.


बीजेपी सांसद उदित राज द्वारा किया गया ट्वीट

पिछले महीने बाढ़ आने के बाद तापमान का बढ़ना, अप्रत्याशित तौर पर नदियों का जल स्तर घटना, अचानक से कुओं का सूखना, भूजल, जलाशयों में गिरावट आना और केंचुओं के सामूहिक खात्मे समेत कई मुद्दों ने केरल के विभिन्न हिस्सों को चिंतित किया है.


केरल में पिछले दिनों बारिश और बाढ़ ने भारी ताबाही मचाई थी. (फाइल फोटो)

सैलाब ने समृद्ध जैव विविधता के लिए मशहूर वायनाड जिले को तबाह कर दिया. बड़े पैमाने पर केंचुओं के मरने से किसान चिंतित हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस वजह से धरती तेजी से सूख रही है और मृदा की संरचना में बदलाव हो रहा है. पेरियार, भारतपुझा, पंपा और कबानी समेत कई नदियां बाढ़ के दिनों में उफान पर थी लेकिन अब उनका जलस्तर असामान्य तौर पर घट रहा है. कुओं के सूखने के अलावा उनके ढहने की भी खबरें हैं.


बाढ़ ने कई स्थानों पर भूमि की स्थलाकृति बदल दी है और खासतौर पर, इदुक्की और वायनाड जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में जमीन में किलोमीटर लंबी दरारें आ गई हैं. विशेषज्ञों ने सैलाब के बाद कई जिलों में सूखा पड़ने की आशंका व्यक्त की है.


विजयन ने फेसबुक पर डाले गए एक पोस्ट में कहा,‘ जल स्तर में गिरावट, भूजल में परिवर्तन और जमीन में पड़ी दरारों के अध्ययन का काम जल संसाधन प्रबंधन केंद्र को सौंपा गया है.’


(इनपुट - भाषा)

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