नायडू ने फैसले पर पुनर्विचार करने के पीएम मोदी के अनुरोध को ठुकराया: टीडीपी सूत्र

टेलीफोन पर बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने नायडू से नई दिल्ली आकर व्यक्तिगत बातचीत करने को कहा लेकिन नायडू ने इस पर कुछ नहीं कहा. 

नायडू ने फैसले पर पुनर्विचार करने के पीएम मोदी के अनुरोध को ठुकराया: टीडीपी सूत्र

अमरावती: कहा जा रहा है कि आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र की एनडीए सरकार से हटने के तेलुगू देसम पार्टी के फैसले पर ‘पुनर्विचार’ करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध को ठुकरा दिया. उन्होंने कहा, ‘‘ चीजें उस चरण से आगे बढ़ चुकी हैं.’’ सूत्रों ने बताया कि मोदी ने गुरुवार शाम फोन पर नायडू से बात की और आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे के मुद्दे पर बुधवार देर रात किए गए टीडीपी के फैसले पर चर्चा की.

टेलीफोन पर बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने नायडू से नई दिल्ली आकर व्यक्तिगत बातचीत करने को कहा लेकिन नायडू ने इस पर कुछ नहीं कहा. राज्य के एक मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने हमारे नेता से व्यक्तिगत रूप से आकर सभी मुद्दों पर चर्चा करने को कहा लेकिन चंद्रबाबू ने कहा कि वह अब नहीं जा सकते.’’ 

नायडू ने मोदी से फोन पर बातचीत के बाद आज रात अपने आवास पर अपने मंत्रियों के साथ बैठक की. टीडीपी प्रमुख ने अपनी पार्टी के सहयोगियों को एनडीए सरकार से हटने के फैसले पर फिर से विचार करने के मोदी के आग्रह के बारे में बताया. कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने टीडीपी नेता से कहा, ‘‘अगर हमने बैठकर बात की होती तो मुद्दा सुलझ सकता था.’’ 

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बताया जाता है कि नायडू ने कहा, ‘‘हमने आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे के लिए चार साल धैर्यपूर्वक इंतजार किया लेकिन अंतत: हमें जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एनडीए छोड़ने का फैसला करना पड़ा.’’ 

टीडीपी मंत्रियों ने दिया इस्तीफा
उधर, आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर एनडीए में पिछले कुछ समय से जारी राजनीतिक उथलपुथल के बीच बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में टीडीपी के दो मंत्रियों अशोक गजपति राजू और वाई एस चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया. अशोक गजपति राजू ने बाद में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है लेकिन हमारी पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन ‘एनडीए’ का हिस्सा बनी रहेगी.’’ 

वाईएस चौधरी ने कहा, ‘‘विशेष श्रेणी का दर्जा राज्य के लिए बहुत भावनात्मक है लेकिन केंद्र ने इसका समाधान नहीं किया. विशेष पैकेज भी पर्याप्त नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि यह कहना अनुचित होगा कि केंद्र ने राज्य के लिए कुछ नहीं किया. हिस्सों में कुछ विषयों पर सहायता प्रदान की गई लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. राजू और चौधरी ने कहा कि आंध्र प्रदेश के लोगों ने काफी बलिदान दिया है और बंटवारे के बाद काफी कुछ सहा है , ऐसे में प्रदेश के लोगों की आशा-आकांक्षा को पूरा किया जाना चाहिए. 

उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय दलों ने आंध्र प्रदेश का बंटवारा किया तब उस समय केंद्र में कांग्रेस नीत संप्रग की सरकार थी और बीजेपी ने बंटवारे का समर्थन किया था. यह बंटवारा न्यायोचित नहीं था और आज जो आंध्र प्रदेश हमारे समक्ष है, वह पूर्व के आंध्र प्रदेश का अवशेष मात्र है . 

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