साहित्य अकादमी : लेखकों के प्रदर्शन के जवाब में जवाबी प्रदर्शन

साहित्य अकादमी के खिलाफ लेखकों की शांतिपूर्ण मौन रैली के विरोध में लोगों के एक अन्य वर्ग ने जवाबी प्रदर्शन का आयोजन किया। उनका आरोप था कि लेखकों की पुरस्कार लौटाने की कार्रवाई ‘उनके निहित स्वार्थों से प्रेरित’ है और कहा कि साहित्य संगठन को ‘दबाव’ में नहीं आना चाहिए।

नई दिल्ली : साहित्य अकादमी के खिलाफ लेखकों की शांतिपूर्ण मौन रैली के विरोध में लोगों के एक अन्य वर्ग ने जवाबी प्रदर्शन का आयोजन किया। उनका आरोप था कि लेखकों की पुरस्कार लौटाने की कार्रवाई ‘उनके निहित स्वार्थों से प्रेरित’ है और कहा कि साहित्य संगठन को ‘दबाव’ में नहीं आना चाहिए।

ज्वाइंट एक्शन ग्रुप ऑफ नेशनलिस्ट माइंडेड आर्टिस्ट्स एंड थिंकर्स, जनमत द्वारा प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसने अकादमी को एक ज्ञापन भी सौंपा और लेखकों की मंशा पर सवाल उठाए। इनका आरोप था कि इनमें से बहुत सारे लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जनादेश नहीं देने के लिए मतदाताओं से अपील की थी।

भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इसके साथ ही विभिन्न भाषाओं के लेखकों ने सफदर हाशमी मार्ग के श्री राम सेन्टर से साहित्य अकादमी भवन तक रैली निकाली। इनकी मांग थी कि लेखकों की अभिव्यक्ति की आजादी और विरोध प्रकट करने के अधिकार की रक्षा के लिए अकादमी द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाए।

जनमत ने कहा, ‘हम साहित्य अकादमी से अपील करते हैं कि वह अपना स्वायत्त स्वरूप बनाए रखे और उन कुछ लेखकों के दबाव में नहीं आए जो इससे पहले देश के लोगों से प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी को जनादेश नहीं देने की अपील कर चुके हैं।'

ज्ञापन में कहा गया है, ‘ये लोग किस चीज से असहमति जता रहे हैं? सचाई यह है कि उनके बीच में एक कवि है, जो साहित्य अकादमी के पद के लिए प्रयासरत थे और बुरी तरह विफल रहे। उनका सुझाव था कि अध्यक्ष पद के चुनाव कराने की बजाय इस पद पर नियुक्ति सीधे सरकार द्वारा होनी चाहिए।’

नचिमुतू ने कहा, ‘हत्याओं की निन्दा करने के लिए सभी लेखक अपने सर्वसम्मत फैसले में साथ खड़े हैं।’ ‘बढ़ती असहिष्णुता’ की निन्दा करने की लेखकों की मांग पर उन्होंने कहा, ‘हां हमने उसका भी समाधान किया है।’ उन्होंने कहा कि जल्द ही विस्तृत बयान जारी किया जाएगा।

अकादमी की बोर्ड बैठक 17 दिसंबर को होगी जहां पुरस्कार लौटाने से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा होगी।

नयनतारा सहगल, अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, केकी एन दारूवाला, के. वीरभद्रप्पा सहित कम से कम 35 लेखक अपने अकादमी पुरस्कार लौटा चुके हैं और पांच लेखकों ने साहित्यिक इकाई के अपने आधिकारिक पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके चलते अकादमी ने आज एक आपातकालीन बैठक की।

इससे पूर्व आज दिन में, अकादमी की बैठक से पहले लेखकों और उनके समर्थकों ने काली पट्टी बांधकर यहां एकजुटता मार्च आयोजित किया ।

एक दूसरे समूह ने प्रदर्शन के विरोध में यह कहते हुए जवाबी प्रदर्शन किया कि लेखकों का पुरस्कार लौटाना ‘उनके निहित स्वार्थों से प्रेरित है’ तथा साहित्य अकादमी को ‘दबाव’ के सामने झुकना नहीं चाहिए।

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