गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना ठीक नहीं : मोहन भागवत

गौरक्षा के नाम पर लोगों की कथित रूप से पीट पीट कर हत्या किए जाने की हालिया घटनाओं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को स्पष्ट रूप से गौरक्षकों का बचाव किया. उन्होंने कहा कि गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना ठीक नहीं है. 

गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना ठीक नहीं : मोहन भागवत
मोहन भागवत ने ही ऐलान किया कि गौरक्षा व गौसंवर्धन का वैध व पवित्र परोपकारी कार्य चलेगा और बढ़ेगा. (फोटो - साभार IANS)

नागपुर : गौरक्षा के नाम पर लोगों की कथित रूप से पीट पीट कर हत्या किए जाने की हालिया घटनाओं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को स्पष्ट रूप से गौरक्षकों का बचाव किया. उन्होंने कहा कि गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना ठीक नहीं है. भागवत ने इसके साथ ही कहा कि गौरक्षकों और गौपालकों को चिन्तित या विचलित होने की आवश्यकता नहीं है. चिंतित आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को होना चाहिए, गौरक्षकों को नहीं.उन्होंने साथ ही ऐलान किया कि गौरक्षा व गौसंवर्धन का वैध व पवित्र परोपकारी कार्य चलेगा और बढ़ेगा और यही इन परिस्थितियों का उत्तर भी होगा.

विजयदशमी के मौके पर आरएसएस चीफ का संबोधन
विजयदशमी के पर्व पर आरएसएस मुख्यालय में यहां एक घंटे के अपने संबोधन में भागवत ने अवैध शरणार्थियों, गौ रक्षकों , जम्मू कश्मीर की स्थिति और आर्थिक हालात जैसे कई विषयों का जिक्र किया. मोहन भागवत ने कहा कि गौरक्षा से जुड़े हिंसा व अत्याचार के बहुचर्चित प्रकरणों में जाँच के बाद इन गतिविधियों से गौरक्षक कार्यकर्ताओं का कोई संबंध सामने नहीं आया है. इधर के दिनों में उलटे अहिंसक रीति से गोरक्षा का प्रयत्न करनेवाले कई कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई है . उसकी न कोई चर्चा है , न कोई कार्रवाई. उन्होंने कहा कि वस्तुस्थिति न जानते हुए अथवा उसकी उपेक्षा करते हुए गौरक्षा व गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना व सांप्रदायिक प्रश्न के नाते गौरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाना ठीक नहीं है. 

गौरक्षा मसले की पृष्ठभूमि में जाते हुए उन्होंने कहा कि कम खर्चे में विषमुक्त खेती करने का सहज सुलभ उपाय गौ आधारित खेती ही है. इसलिये गौरक्षा तथा गौ संवर्धन की गतिविधि संघ के स्वयंसेवक, भारतवर्ष के सभी संप्रदायों के संत, अनेक अन्य संगठन संस्थाएँ तथा व्यक्ति चलाते हैं. गाय अपनी सांस्कृतिक परंपरा में श्रद्धा का एक मान बिंदु है. गौरक्षा का अंतर्भाव अपने संविधान के मार्गदर्शक तत्वों में भी है . कई राज्यों में उसके लिये कानून विभिन्न राजनीतिक दलों के शासन काल में बन चुके हैं.

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और विशेषकर बांग्लादेश के सीमा पार से गौधन की तस्करी एक चिंताजनक समस्या बनकर उभरी है. गौधन के उपरोक्त लाभों में ये गतिविधियाँ और अधिक उपयुक्त हो जाती हैं. ये सभी गतिविधियाँ, उनके सभी कार्यकर्ता कानून, संविधान की मर्यादा में रहकर करते है. उन्होंने कहा कि अनेक मुस्लिम भी गौरक्षा, गौपालन व गौशालाओं का उत्तम संचालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि गौरक्षा के विरोध में होने वाला कुत्सित प्रचार बिना कारण ही विभिन्न संप्रदायों के लोगों के मन पर तथा आपस में तनाव उत्पन्न करता है . यह मैने कुछ मुस्लिम मतानुयायी बंधुओं से ही सुना है.

संघ नेता ने कहा,‘‘ ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी से, सात्विक भाव से, संविधान कानून की मर्यादा का पालन कर चलने वाले गौरक्षकों को, गौपालकों को चिन्तित या विचलित होने की आवश्यकता नहीं. यह हिंसा में लिप्त आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिये चिन्ता का विषय होना चाहिये.’’ उन्होंने कहा कि शासन प्रशासन को भी स्वार्थी तत्वों द्वारा ऐसे वाक्यों के गलत अर्थ लगाकर, सभी के दृष्टिकोणों को प्रभावित करने की साजिश के प्रति सजग रहना चाहिए. प्रशासन यह चिंता करे कि अपराधी को अवश्य दंड मिले लेकिन निर्दोष लोगों को इससे कोई कष्ट नहीं होना चाहिए . उन्होंने कहा कि गौरक्षा व गौसंवर्धन का वैध व पवित्र परोपकारी कार्य चलेगा और बढ़ेगा. यही इन परिस्थितियों का उत्तर भी होगा.

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