अपनी नेकदिली से CRPF के इंस्पेक्टर ने दक्षिण कोरियाई मेहमान को बनाया अपना मुरीद

युन के सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि पराए मुल्क में बिना पैसों के उनका गुजारा कैसे होगा.

अपनी नेकदिली से CRPF के इंस्पेक्टर ने दक्षिण कोरियाई मेहमान को बनाया अपना मुरीद
10 घंटे की कवायद के बाद सीआरपीएफ के इंस्‍पेक्‍टर ने दक्षिण कोरियाई नागरिक को खोज निकाला.

नई दिल्ली: CRPF के इंस्पेक्टर ने अपनी नेकदिली से दक्षिण कोरियाई मेहमान को अपना मुरीद बना लिया है. दक्षिण कोरियाई मेहमान के लिए CRPF के नेक दिल इंस्पेक्टर जेपी भोसले उस समय फरिस्ता बनाकर सामने आए, जब पराए देश में परेशानियों ने उन्हें चारों तरह सर घेर लिया था. दरअसल, मूल रूप से दक्षिण कोरिया के निवासी युन सेंघ युन की तैनाती सैमसंग द्वारा नोएडा में शुरू की गई फैक्टरी में की गई है. 

दिल्ली आने के बाद वह ग्रेटर कैलाश इलाके में रह रहे है. भारतीय संस्कृति में गहन रुचि होने के चलते उन्होंने कैलाश कालोनी में हिंदी की क्लास लेना शुरू किया है. मंगलवार सुबह हिंदी की क्लास लेने के बाद जब वह घर जा रहे थे, तभी उनका पर्स रास्ते मे कहीं गिर गया. इस पर्स में 8100 भारतीय रुपए के साथ युन के सभी क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड थे. पर्स खो जाने के बाद युन के सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि पराए मुल्क में बिना पैसों के उनका गुजारा कैसे होगा. 

रुपयों का इंतजाम को लेकर परेशान थे युन
अपने पर्स की तलाश में युन हर उस जगह भटक रहे थे, जहां पर वह सुबह से पर्स खोने तक गए थे. तमाम कोशिशों के बावजूद जब युन को उनका पर्स नही मिला तो वह हताश होकर अपने होटल की तरफ पैदल ही चल पड़े. युन के दिमाग मे यही चल रहा था कि अब वह कहां से और कैसे रुपयों का इंतजाम करें. युन इसी उधेड़ बुन में फंसे थे तभी उनके मोबाइल फोन की घंटी बजी. 

एक फोन कॉल ने दूर किए युन के दुख
मोबाइल फोन की स्क्रीन पर एक अनजान नंबर लगातार फ़्लैश हो रहा था. दिल और दिमाग में भारी बोझ के बीच युन का दिल नही कर रहा था कि वो फ़ोन कॉल रिसीव करे. बावजूद इसके, उन्होंने भारी मन से फोन कॉल रिसीव कर ली. फोन पर दूसरी तरफ से आई आवाज सुनकर अचानक युन के आंखों की चमक वापस आ गई.

चेहरे पर पसरा तनाव फुर्र हो गया. मुंह से अब सिर्फ दो ही शब्द निकल रहे थे, thank you ... thank you. फोन कॉल को काटने के बाद युन ने खुशी से झूम कर दोनों हाथों को झटका दिया और तेज आवाज में बोले यस्ससस... दरअसल, युन को इतनी खुशी देने वाला फ़ोन कॉल CRPF के इंस्पेक्टर जेपी भोसार का था. इंस्पेक्टर जेपी भोसार ने युन को कॉल कर जानकारी दी थी कि उनका खोया हुआ पर्स उनके पास है. 

आगे की कहानी सीआरपीएफ के इंस्‍पेक्‍टर जेपी भोसाल की जुबानी 
मैं सीआरपीएफ के आर्डिनेंस विंग में तैनात हूं. वर्तमान समय में मेरी तैनाती सीजीओ कॉप्‍लेक्‍स स्थित सीआरपीएफ हेडक्‍वाटर्स में है. मंगलवार सुबह मै घर से दफ्तर की तरफ निकला था. कैलाश कालोनी मेट्रो स्‍टेशन के करीब मुझे एक पर्स पड़ा हुआ दिखा. 

पर्स खोलकर देखा तो उसमें नगदी, विदेशी बैंक के क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड थे. मैं यह पर्स लेकर दफ्तर आ गया. इस पर्स के अंदर कोई भी ऐसी चीज नहीं थी, जिससे मैं इस पर्स के मालिक तक पहुंच सकूं. अब मेरे पास पर्स के मालिक तक पहुंचने का एक ही सहारा बचा था, वह था उस पर्स में मौजूद विदेशी बैंक का डेबिट कार्ड. 

आफिस पहुंचने के बाद मैने इंटरनेट पर उस बैंक का कॉल सेंटर नंबर खोजा, लेकिन मुझे नहीं मिला. जिसके बाद मैं इस पर्स को लेकर लोधी कालोनी पुलिस स्‍टेशन गया. जहां पुलिस ने इस पर्स को लेने से मना कर दिया और मुझे ग्रेटर कैलाश पुलिस स्‍टेशन जाने को कहा. दफ्तर पहुंचने के बाद मैने ग्रेटर कैलाश पुलिस स्‍टेशन में फोन किया. 
उन्‍होंने मुझे अमर कालोनी पुलिस स्‍टेशन जाने को कहा. पुलिस के इस रुख को देखकर मैने खुद इस पर्स के मालिक को तलाशने की डान ली. इंटरनेट पर लगातार सर्च करने पर मुझे विदेशी बैंक की गुड़गांव स्थि‍त ब्रांच का नंबर मिल गया. 

मैने ब्रांच में फोन कर सारी बात बताई. करीब आधे घंटे बाद बैंक ने मुझे कार्ड के मालिक का मोबाइल नंबर उपलब्‍ध कराया. जिससे जरिए मैने युन को उसके पर्स के बारे में बताया. मंगलवार शाम युन मेरे दफ्तर आए और पर्स लेकर चले गए.

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