अमेरिका में RSS कार्यकर्ता ने दिए मंत्र, कहा- 'ऐसा करने से आर्थिक वैश्विकरण कोई खतरा नहीं रह जाएगा'

होसबोले ने “एक वैश्वीकृत संसार में संस्कृति और राष्ट्र की भूमिका - भारतीय परिदृश्य” पर प्रमुख नीतिगत भाषण में कहा, “संस्कृति एवं राष्ट्र और उनकी प्रासंगिकता एक वैश्वीकृत विश्व में भी ज्यादा है.

 अमेरिका में RSS कार्यकर्ता ने दिए मंत्र, कहा- 'ऐसा करने से आर्थिक वैश्विकरण कोई खतरा नहीं रह जाएगा'
फाइल फोटो

वॉशिंगटन : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक शीर्ष पदाधिकारी ने कहा है कि संस्कृति और राष्ट्र की प्रासंगिकता एक वैश्वीकृत संसार में ज्यादा से ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सही मायने में वैश्वीकरण होने के लिए सहनशीलता, परस्पर सम्मान और स्वीकार्यता की सार्वभौमिक चेतना का होना जरूरी है. आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने मंगलवार को अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्वीकरण में भारत का योगदान वेदांत के समय से ही है. 

होसबोले ने इन मुद्दों पर दिया जोर
होसबोले ने “एक वैश्वीकृत संसार में संस्कृति और राष्ट्र की भूमिका - भारतीय परिदृश्य” पर प्रमुख नीतिगत भाषण में कहा, “संस्कृति एवं राष्ट्र और उनकी प्रासंगिकता एक वैश्वीकृत विश्व में भी ज्यादा है और वे ज्यादा से ज्यादा महत्त्वपूर्ण होते जा रहे हैं.” होसबोले ने कहा, “सही मायने में वैश्वीकरण होने के लिए यह सार्वभौमिक चेतना - सहनशीलता, सम्मान और मजबूत मानव सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर स्वीकार्यता (कुंजी है). अगर इन चीजों को रेखांकित किया जाए और मजबूत बनाया जाए तो आर्थिक वैश्विकरण कोई खतरा नहीं रह जाएगा. अन्यथा इस तरह का वैश्वीकरण पुरातन काल से मानवता के लिए हासिल की गई सभी चीजों को नष्ट कर देगा.” 

अर्थव्यवस्था के बारे में भी दी जानकारी
उन्होंने कहा कि जब वैश्वीकरण का प्रवेश अर्थव्यवस्था एवं संचार तकनीक में कराया गया था तो यह धारणा या ऐसा अनुमान था कि एक वैश्वीकृत जगत संस्कृति एवं राष्ट्रों की प्रासंगिकता को कमजोर कर देगा.” होसबोले ने अमेरिका में भारत केंद्रित थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा, “इस धारणा के उलट राष्ट्रों की प्रासंगिकता और संस्कृति की ताकत देखने और सभी के लिए महसूस करने लायक है.” इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जॉन्स हॉपकिन्स में साउथ एशिया स्टडीज के सीनियर एडजंक्ट प्रोफेसर वाल्टर एंडर्सन ने की.

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close