डियर जिंदगी : आपके दोस्‍त भी तो एक जैसे नहीं हैं...

दयाशंकर मिश्र | अंतिम अपडेट: Jun 19, 2017, 04:43 PM IST
डियर जिंदगी : आपके दोस्‍त भी तो एक जैसे नहीं हैं...
अलग-अलग क्षेत्रों के मित्रों से बना दोस्‍ताना एक गुलदस्‍ते की तरह होता है.

यह सवाल पहली नजर में अटपटा लग सकता है, लेकिन जिंदगी के काम का है. अगर मेरे सभी दोस्‍त मेरे जैसे ही हैं, तो इसका मतलब हुआ, मेरे पास दुनिया देखने का बस एक नजरिया है. क्‍योंकि जिनसे मैं मिलता हूं, जिनके आसपास मैं रहता हूं, उनके दिमाग का 'वायरफ्रेम' मोटेतौर पर एक जैसा हुआ. जैसे कोई इंजी‍नियर है तो उसके ज्‍यादातर दोस्‍त इंजीनियर ही होते हैं. कोई डॉक्‍टर है तो उसके अधिकांश दोस्‍त डॉक्‍टर हुए.

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कोई पांच बरस पहले तक मैं भी तब तक इसी लीक पर चल रहा था. लेकिन तभी एक रोज मेरे पूर्व बॉस, अब मित्र ने इस आदत पर प्रहार करते हुए कहा था, 'इससे हम अपने दायरे को बहुत ही छोटा कर लेते हैं. हमारा जीवन इससे एकाकी हो जाता है. उसमें एक ही रस, एक ही रंग रहता है. जिंदगी में रसों के रंग के लिए जरूरी है कि हम जीवन को सबके लिए खोलें. अगर यह सहज न हो पा रहा हो तो इसके लिए प्रयास करें.' इसके मायने यह हुए कि आपके दोस्‍तों की लिस्‍ट में आपके प्रोफेशन के साथ दूसरे प्रोफेशन के जितने अधिक परिचित, मित्र होंगे. आपकी जिंदगी उतनी अधिक अनुभवों से भरी होगी. 

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आपके जीवन की कॉपी में उतने ही रंग बिखरे होंगे. जिंदगी में उतनी ही विविधता होगी. आपके अनुभव उतने ही मजेदार होंगे. आपके पास दूसरों के लिए उतनी ही कहानियां होंगी, हमने डियर जिंदगी में पहले भी इस बात को रेखांकित किया है कि जिसके पास जितनी कहानियां है, वह उतना ही बड़ा व्‍यक्‍ति है. आपके मित्रों की विविधता से बच्‍चों को सबसे अधिक सीखने को मिलता है. वह उन सभी परिवारों से मिलते-जुलते रहते हैं, जो आपके पेशे से नहीं है. इससे वह दूसरों के काम, उनके परिवार के बारे में जानने के साथ ही दूसरे पेशे के बारे में आंशिक रूप से परिचित होते रहते हैं. यह किस्‍म की अनौपरिचारिक पाठशाला हो जाती है, आने वाले जीवन के बारे में. वे अधिक से अधिक बहुआयामी हो सकते हैं. क्‍योंकि उनके पास अपने माता-पिता के अलावा भी बहुत से लोगों का अनुभव होता है. यह बात कई बार उनके करियर, जीवन की दशा, दिशा को बनाने, बदलने में नींव के पत्‍थर का काम करत है.  

अलग-अलग क्षेत्रों के मित्रों से बना दोस्‍ताना एक गुलदस्‍ते की तरह है. जिसमें हर तरह के रंग, गुण हैं. जो इस व्‍यस्‍त जीवन में एक साथ इतनी सारी खूशबू बिखेर सकते हैं, जो गुलदस्‍ते के बिना नामुमकिन नहीं तो बहुत मुश्किल है. सारे दोस्‍त एक जैसे होने का सबसे बड़ा खतरा यह भी होता है कि हम हमेशा अपने प्रोफेशन की बातों से ही घिरे रहते हैं. हमेशा अपने बिजनेस, ऑफि‍स पॉलिटिक्‍स से ही घिरे रहते हैं, जो कि सेहत, दिमाग के लिए घातक है.

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हम हैं क्‍या! वही विचार जो अक्‍सर हमें घेरे रहते हैं. वह सकारात्‍मक हैं तो हम उसी दिशा में बढ़ जाते हैं और निगेटिव हुए तो हमारी सारी ऊर्जा उन बातों में खर्च होती है, जिनसे हमें कोई सुकुन, शांति नहीं मिलने वाली. इसलिए, जरा एक नजर अपने दोस्‍तों पर डालिए. अगर उसमें एक ही रंग है, तो विविधता को बढ़ाइए. यह जीवन राग को समृद्ध करने, खुद को जिंदादिल, दिलचस्‍प बनाए रखने की दिशा में बेहद जरूरी कदम है, भले ही आप उम्र के किसी भी पड़ाव पर क्‍यों न हों. 

(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

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