दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 सिख दंगा मामले में अपीलों की सुनवाई 3 सप्ताह में पूरी करने का जताया इरादा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपीलों की सुनवाई तीन सप्ताह में पूरा करना चाहता है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 सिख दंगा मामले में अपीलों की सुनवाई 3 सप्ताह में पूरी करने का जताया इरादा
मई 2013 में मामले में निचली अदालत द्वारा उसे दोषी ठहराये जाने के बाद खोखर यहां तिहाड़ जेल में बंद है.(फाइल फोटो)
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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपीलों की सुनवाई तीन सप्ताह में पूरा करना चाहता है. अपीलों में सिख विरोधी दंगे मामले में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किया गया था. न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने सीबीआई,दंगा पीड़ितों और दोषियों द्वारा दायर अपीलों की सुनवाई शुरू की और कहा कि वह सुनवाई को 20 दिनों में पूरा करना चाहता है. अदालत ने कल से दिन-प्रतिदिन सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध किया. मामले के एक दोषी कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर की जमानत याचिका जब सुनवाई के लिए आई तो अदालत ने वकील से कहा कि यदि तीन सप्ताह में अपीलों पर फैसला नहीं किया जाता है तो वह जमानत याचिका पर जोर दे सकते है.

मई 2013 में मामले में निचली अदालत द्वारा उसे दोषी ठहराये जाने के बाद खोखर यहां तिहाड़ जेल में बंद है.  खोखर ने राहत दिये जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसे दंगा मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों के लंबित रहने तक नियमित जमानत दी जानी चाहिए. गौरतलब है कि निचली अदालत ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को मामले में बरी कर दिया था लेकिन खोखर,एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल को आजीवन कारावास की सजा और दो अन्य पूर्व विधायक महेन्द्र यादव और किशन खोखर को तीन वर्ष जेल की सजा सुनाई थी. दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपनी अपीलें दायर की थी. 

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1984 का सिख दंगा: अदालत ने दोषी ठहराए गए व्यक्ति की याचिका पर CBI से मांगा जवाब
आपको बता दें इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक व्यक्ति की याचिका पर शुक्रवार को सीबीआई से अपना पक्ष रखने को कहा. कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर की याचिका को न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया. पीठ ने मामले को 11 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया. खोखर ने यह कहते हुए राहत की मांग की कि दंगे के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अर्जियों के लंबित होने तक उन्हें नियमित जमानत दी जाए.

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सीबीआई की ओर से अधिवक्ता तरन्नुम चीमा ने कहा कि अपील पर 11 सितंबर को सुनवाई की जाएगी. निचली अदालत द्वारा मई, 2013 में दोषी ठहराये जाने के बाद से खोखर तिहाड़ जेल में बंद हैं. सेवानिवृत्त नौसैनिक खोखर, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और दो अन्य को एक नवंबर, 1984 को दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. उन्होंने मई, 2013 में निचले अदालत के फैसले को चुनौती दी थी.  

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