ऐसा लगता है कि FIIT-JEE आईआईटी के नाम को भुना रहा है : दिल्ली हाई कोर्ट

 पीठ ने कहा,‘अगर आप (FIIT-JEE) कह रहे हैं कि आप उनसे (IIT) जुड़े हो तो वे जो कहते हैं वह सही है. आप उनका नाम भुना रहे हो.’

ऐसा लगता है कि FIIT-JEE आईआईटी के नाम को भुना रहा है : दिल्ली हाई कोर्ट
(फाइल फोटो)
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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने यहां एक मेट्रो स्टेशन के नामकरण के संबंध में एक आदेश के खिलाफ एफआईआईटी-जेईई की अपील को खारिज करते हुए कहा कि अगर उनके कोचिंग सेंटर का संबंध आईआईटी से है तो ऐसा लगता है कि वह इंजीनियरिंग संस्थान के नाम को ‘भुना’ रहा हैं. न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ ने कहा,‘अगर आप (एफआईआईटी-जेईई) कह रहे हैं कि आप उनसे (आईआईटी) जुड़े हो तो वे जो कहते हैं वह सही है. आप उनका नाम भुना रहे हो.’ एकल पीठ ने डीएमआरसी को निर्देश दिया था कि वह अपने एक मेट्रो स्टेशन पर डिस्क्लेमर्स लगाए कि ये दोनों संस्थान एक-दूसरे से संबद्ध नहीं हैं.

एकल न्यायाधीश के खिलाफ एफआईआईटी-जेईई और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली की अपीलों को खारिज करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की.  गौरतलब है कि दिल्ली मेट्रो 2014 से राजस्व जुटाने के लिए अपने कई स्टेशनों के नाम के अधिकारों की नीलामी कर रहा है. 

पीठ ने आगे कहा कि डिस्क्लेमर लगाने का एकल पीठ का फैसला ‘उचित’ था और उसने आईआईटी को सुझाव दिया कि अगर वह संतुष्ट नहीं है तो पेटेंट के लिए मुकदमा दायर करें.

अदालत ने कहा,‘डिस्कलेमर लगाया गया. हर कोई जानता है कि एफआईआईटी-जेईई का क्या मतलब है. उचित आदेश पारित किया गया. अगर आपको लगता है कि नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है तो पेटेंट या ट्रेडमार्क के लिए मुकदमा दायर करें. हम हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे.’

बहरहाल, एफआईआईटी-जेईई ने कहा कि उसके आईआईटी के साथ कोई व्यापारिक संबंध नहीं है, वह संस्थान से जुड़ा है. इसके बाद पीठ ने कहा कि वह अपने आदेश पर उचित निर्देश पारित करेगा.  

एफआईआईटी-जेईई ने इस आधार पर एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी कि डिस्क्लेमर में यह नहीं कहा जा सकता कि वह आईआईटी से ‘जुड़ा नहीं’ है क्योंकि कोचिंग सेंटर का इससे संबंध है. उसने मांग की कि डिस्क्लेमर में सुधार कर यह कहा जाए कि उसके आईआईटी से कोई ‘व्यापारिक संबंध नहीं’ है. 

आईआईटी ने अपनी अपील में दलील दी कि वह नहीं चाहता कि उसके नाम का इस्तेमाल संस्थान के सामने स्थिति मेट्रो स्टेशन पर कोचिंग सेंटर के संबंध में किया जाए. उसने दावा किया कि स्टेशन के नाम की सह-ब्रांडिंग संस्थान के नाम पर ‘‘प्रचार पाने की कोशिश’’ है. उसने कहा कि ‘‘सह-ब्रांडिंग’’ से लोगों को यह भ्रम होता है कि दोनों साझेदार हैं.

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