फर्श से हरियाणा की सत्ता के शिखर तक मनोहर लाल खट्टर

सामान्य किसान पृष्ठभूमि से आने वाले मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। सादा जीवन और साफ सुथरी छवि वाले खट्टर की ख्याति भाजपा में एक ऐसे व्यक्ति की है जो हर काम पूरी लगन से करते हैं और उतनी ही कुशलता से करवाते भी हैं। इधर-उधर के मुद्दों में उलझे बिना पर्दे के पीछे से पार्टी की मजबूती के लिए लगातार काम करते रहने वाले खट्टर भाजपा में अहम पदों पर रहे और अकसर अपने संगठन कौशल का लोहा मनवाया।

फर्श से हरियाणा की सत्ता के शिखर तक मनोहर लाल खट्टर

रामानुज सिंह

सामान्य किसान पृष्ठभूमि से आने वाले मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। सादा जीवन और साफ सुथरी छवि वाले खट्टर की ख्याति भाजपा में एक ऐसे व्यक्ति की है जो हर काम पूरी लगन से करते हैं और उतनी ही कुशलता से करवाते भी हैं। इधर-उधर के मुद्दों में उलझे बिना पर्दे के पीछे से पार्टी की मजबूती के लिए लगातार काम करते रहने वाले खट्टर भाजपा में अहम पदों पर रहे और अकसर अपने संगठन कौशल का लोहा मनवाया।

आरएसएस के प्रचारक मनोहर लाल खट्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरियाणा में भाजपा की पहली सरकार का नेतृत्व सौंपे जाने से पहले वह 40 साल तक संगठन की जड़ों को मजबूत बनाने के काम में लगे रहे। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीबी उन्हें हरियाणा में सत्ता के शिखर पर पहुंचाने में सहायक मानी जाती है जो स्वयं भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं। पहली बार विधायक बने खट्टर डॉक्टर बनना चाहते थे। वह हरियाणा के पहले पंजाबी मुख्यमंत्री और 18 वर्ष बाद इस पद पर विराजमान होने वाले पहले गैर जाट नेता हैं।

उनका परिवार देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से हरियाणा आया था और रोहतक जिले के निंदाना गांव में बस गया। आजीविका चलाने के लिए उनके पिता और दादा ने मजदूरी की और इससे जमा की गई रकम से एक छोटी सी दुकान खोली। निंदाना गांव में ही 1954 में मनोहर लाल का जन्म हुआ। साल 1980 में आरएसएस में पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में शामिल होने से पहले खट्टर ने दिल्ली के सदर बाजार में एक दुकान चलाई और अपने परिवार का पालन पोषण किया।

स्कूल में खट्टर सभी गतिविधियों में आगे रहे और लिखाई पढ़ाई में भी आगे रहे। वह डॉक्टर बनना चाहते थे और अपने पिता के विरोध के बावजूद कॉलेजों में इसके लिए आवेदन भी किया। हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वह परिवार के अन्य सदस्यों की तरह खेतीबाड़ी करें। उन्होंने अपनी मां से कुछ पैसा लिया और रोहतक स्थित नेकी राम शर्मा सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। वह 10वीं कक्षा से आगे पढ़ाई करने वाले परिवार के पहले सदस्य बने।

मेडिकल कॉलेज में दाखिले की परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली का रूख करने वाले मनोहर लाल ने दिल्ली जाकर वहां के सदर बाजार में दुकान खोलने का इरादा किया और इस मकसद के लिए परिवार से पैसा लिया। उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छा शक्ति रंग लाई और खट्टर ने न सिर्फ अपने मातापिता का पैसा लौटाया, बल्कि अपनी छोटी बहन की शादी कराई और अपने दो भाई बहन को दिल्ली अपने पास बुला लिया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि ली और इस दौरान अपने कारोबार को भी आगे बढ़ाया।

14 वर्ष तक संघ में योगदान देने के बाद वे भाजपा में चले आए और 1994 में हरियाणा में पार्टी महासचिव बनाए गए। खट्टर अपने राजनीतिक कौशल के लिए मशहूर रहे हैं और उन्होंने अपनी पार्टी के लिए कई चुनाव अभियान की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। खट्टर के राजनीतिक कौशल का ताजा उदाहरण 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी हरियाणा में देखने को मिला था जब उन्होंने चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया था। मनोहर लाल खट्टर ने 1996 में हरियाणा में सक्रिय रूप से काम करने के दौरान पहली बार मोदी के साथ काम किया, उस समय हरियाणा के प्रभारी थे। 2002 में मनोहर लाल को जम्मू कश्मीर के प्रदेश चुनाव का प्रभार दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव का प्रचार चार अक्टूबर को करनाल से शुरू किया और इसी सीट से खट्टर ने जबर्दस्त जीत दर्ज कर विधानसभा तक का रास्ता बनाया।

1996 में भाजपा ने बंसी लाल के नेतृत्व वाली हरियाणा विकास पार्टी को राज्य में सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया। बाद में जब उन्होंने पाया कि गठबंधन पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है और सरकार अलोकप्रिय हो रही है तो उन्होंने समर्थन वापसी पर जोर दिया। हरियाणा विकास पार्टी का बाद में कांग्रेस में विलय हो गया था।

भाजपा ने इसके बाद ओम प्रकाश चौटाला को बाहर से समर्थन देने का निर्णय किया। बाद में इनेलो के साथ इस गठबंधन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटें जीत ली। हालांकि 1998 में गठबंधन को दो सीटें ही मिली थीं। पार्टी महासचिव के रूप में खट्टर की छवि एक योग्य और सख्त प्रशासक एवं एक ऐसे रणनीतिकार की बनी जो राज्य की सियासत की एक-एक रग पहचानता था। गुजरात में भुज में आए भूकंप के बाद खट्टर को मोदी ने कच्छ जिले में चुनाव के प्रबंधन के लिए बुलाया था और यहां भाजपा को छह में तीन सीट मिली। हाल के लोकसभा चुनाव में खट्टर को मोदी की सीट वाराणसी के 50 वार्डों का प्रभारी बनाया गया था।

नवगठित राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ में पहले चुनाव में भी खट्टर की महत्वपूर्ण भूमिका देखने को मिली। उन्होंने बस्तर में काम किया जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता था। यहां भाजपा 12 में से 10 सीट जीतने में सफल रही जो राज्य में भाजपा सरकार के गठन के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ में पार्टी की सफलता में अहम भूमिका निभाने के अलावा खट्टर को विभिन्न राज्यों में भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी गईं और वह हमेशा हर कसौटी पर खरे उतरे।

2004 में मनोहर लाल खट्टर के जिम्मे 12 राज्यों का प्रभार था, जिनमें दिल्ली और राजस्थान भी था। इसके बाद उन्होंने आरएसएस विचारक बालासाहेब आप्टे के नेतृत्व में काम किया, जो उस समय चुनाव सहायक योजना का नेतृत्व कर रहे थे। इसके बाद उन्हें जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बनाया गया। इन राज्यों में खट्टर ने अपने शानदार निर्णय कौशल का परिचय दिया।

2014 के लोकसभा चुनाव में खट्टर को हरियाणा में चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जहां पार्टी को जबर्दस्त सफलता मिली और वह आठ सीटों पर चुनाव लड़कर सात सीट जीतने में सफल रही। खट्टर के शब्दों में राजनीति नागरिकों के जीवन में बदलाव लाने और उसे बेहतर बनाने का माध्यम है। उनका मानना है कि एक नेता को दूरदृष्टा होना चाहिए और उसमें लोगों को परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की क्षमता भी होनी चाहिए।

 

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