अ डॉयलॉग विद जेसीः नजमा हेपतुल्ला बोलीं-ग्रास रूट पर काम करने वाले PM हैं मोदी

Last Updated: Thursday, May 18, 2017 - 18:07
अ डॉयलॉग विद जेसीः नजमा हेपतुल्ला बोलीं-ग्रास रूट पर काम करने वाले PM हैं मोदी
अ डॉयलॉग विद जेसीः नजमा हेपतुल्ला बोलीं-ग्रास रूट पर काम करने वाले PM हैं मोदी

नई दिल्लीः  अ डॉयलॉग विद जेसी शो में मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने जी रीजनल चैनल्स के सीईओ जगदीश चंद्रा के धारदार सवालों का बेबाकी से जवाब दिया. राजनीति में कदम रखने के सवाल पर नजमा हेपतुल्ला ने बताया है ये इत्तेफाक है जब एक शिक्षित बेरोजगार को नौकरी दिलाने के मकसद से उनकी मुलाकात इंदिरा गांधी से हुई और उसके बाद राजनीति में कदम रखने का इरादा बन गया. फिर 1980 में राज्यसभा पहुंच गईं.

कांग्रेस से मोहभंग और बीजेपी में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस में बेकद्री से आहत होकर पाला बदलना पड़ा और बीजेपी ने उन्हें काफी सम्मान दिया है. नजमा हेपतुल्ला ने बताया कि मोदी से उनकी पहली मुलाकात राजीव गांधी के पास हुई थी. उन दिनों वे राज्यसभा की डिप्टी स्पीकर थी. फिर गुजरात में आए भूकंप के दौरान भी मोदी जी ने उन्हें वहां देखा था. हालांकि सूरत में एक अखबार के कार्यक्रम में दोनों ने पहली बार मंच साझा किया था. नजमा हेपतुल्ला की नजर में मोदी जी ग्रास रूट पर काम करने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे जिम्मेदारी देकर काम-काज का हिसाब भी पूछते हैं.

उन्होंने कहा कि मैंने लोगों को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक नहीं बल्कि अमीर गरीब के हिसाब से देखा है और यही सोच मोदी जी की भी है. मोदी जी की सबका साथ सबका विकास की सोच ने काफी प्रभावित किया. अल्पसंख्यक और मोदी जी के बीच की दूरी कम नही होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले माहौल बहुत खराब था, लेकिन अब सब शांत हैं. मोदी जी मुस्लिम महिलाओं के हक में बोल रहे हैं. यूपी चुनाव से ठीक पहले तीन तलाक का मुद्दा उठाने के सवाल पर नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को वोट दिया और मैंने उनके पिता और पतियों को मुबारकबाद दी और कहा कि मैंने सारी उम्र इस बात के लिए संघर्ष करती रही कि महिलाओं को उनका हक मिले.

नजमा ने कहा कि तीन तलाक के नाम पर जो अत्याचार हो रहा है उसे बंद होना चाहिए. कुछ लोग 1400 साल की परंपरा की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए की अब जमाना इंटरनेट का है. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि अब महिलाओं को एक जुबान मिल गई है. एक सहारा मिला है. सुप्रीम कोर्ट ये बात कह रहा है. पार्लियामेंट जो कानून बनाता है उसको enforce करने की जिम्मेदारी कोर्ट की होती है. तो अगर सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं करेगा तो कौन करेगा.

मणिपुर में सरकार बनाने को लेकर सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित ना करने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैंने उनको बुलाया जिन्होंने अपना बहुमत साबित किया. उन्होंने कहा कि मणिपुर में अपना लीडरशिप नहीं बना रही हूं. मणिपुर में यातायात सबसे बड़ी तकलीफ है. हालांकि मणिपुर में दुनिया का सबसे ऊंचा ब्रिज बन रहा है. हाईवे बन रहा है जो म्यांमार होते हुए थाईलैंड तक जाएगा. उन्होंने कहा कि मणिपुर में कृषि पर भी काम हो रहा है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब अमित शाह जी ने उन्हें गवर्नर बनाया था तब उन्होंने प्रेसिडेंट या वाइस प्रेसिडेंट के लिए कहा था. प्रेसिडेंट चुनाव में विपक्ष की रणनीति के सवाल पर उन्होंने कहा कि मोदी जी ने जो काम किया है उससे देश और विदेश में एक मैसेज गया है जो वेस्ट नहीं जाएगा. नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि कश्मीर के कुछ युवा गुमराह हो गए हैं हालांकि कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा. उन्होंने खुद के लचीले व्यक्तित्व के सवाल पर कहा कि मैं भारतीय हूं और पूरा भारत मेरा है .  
 
सवालः राजनीति में कैसे आना हुआ ?

जवाबः राजनीति में आने का मेरा कोई इरादा नहीं था. मेरी लाइफ में turning point तब आया जब एक पढ़ा लिखा बच्चा मुझसे मिला. मैंने सोचा इसकी नौकरी लगवानी चाहिए और मैं इंदिरा गांधी जी से मिली और उनसे कहा कि सरकार को ऐसे डॉक्टर, इंजीनियर, एग्रीकल्चर एक्सपर्ट यानी पढ़े लिखे बच्चों के लिए कोई प्रोजेक्ट शुरू करना चाहिए. ताकी उनसे डिस्ट्रिक्ट लेवल पर काम कराया जा सके. तो इंदिरा जी को मेरा आइडिया बहुत पसंद आया. उन्होंने मुझे हकसद साहब के पास भेज दिया और मैं हकसद साहब की आभारी हूं कि उन्होंने मेरे लिए ये किया. उन्होंने कहा था यंग लेडी, तुम्हें अपना आइडिया राजनीतिज्ञों को बेचना चाहिए. जिसपर मैंने कहा कि मुझे किसी को कुछ नहीं बेचना है, अगर ऐसा है तो मैं मुझे खुद ही नेता बन जाती हूं. इस तरह मैं राजनीति में आ गई और 1980 में राज्यसभा पहुंच गई. शुरू से मेरा फोकस Grassroot level पर काम करने का रहा है.

सवालः  सारी जिंदगी आप कांग्रेस से जुड़ी रहीं और अब बीजेपी में आ गईं.ऐसे क्यों ?

जवाब : कभी-कभी जिंदगी में ऐसे मोड़ भी आते हैं. जब आपको सोचना पड़ता है. कुछ बातों को लेकर मेरे कांग्रेस से मतभेद हुए. फिर मैंने सोचा कि ऐसी जगह जहां इज्जत ना हो. उससे बेहतर है ऐसी जगह चला जाए जहां इज्जत मिले और बीजेपी ने मुझे बहुत इज्जत दी. मुझे काम करने की इजाजत दी. मैं यहां बहुत खुश हूं. वरना सोचिए 17 साल तक मैं सिर्फ डिप्टी चेयरमैन रही. मुझे कोई एतराज नहीं था उसमें. क्योंकि वहां भी काम करके मैं IPU की प्रेसिडेंट बन गई. पहली महिला 115 साल की हिस्ट्री में जो IPU की प्रेसिडेंट बनी. जो लोग काम करना चाहते हैं. कोई भी माहौल हो. उन्हें कोई रोक नहीं सकता.

सवाल: पीएम नरेन्द्र मोदी से पहली मुलाकात कब हुई और कैसे ?

जवाब: नरेन्द्र मोदी जी ने मुझे बताया कि उन्होंने मुझे देखा था जब में डिप्टी चेयरमैन थी और मैं राजीव जी को मिलने गई थी और वो भी मिलने आए थे वाघेला जी के साथ उनकी बेटी की शादी का कार्ड देने. उन्होंने मुझे बताया कि उस वक्त वो मेरे मानवीय दृ्ष्टिकोण से प्रभावित हुए थे. उसके बाद मेरी बात उनसे तब हुई जब गुजरात में भूचाल आया और मैंने राज्यसभा के सांसदों से 31 करोड़ रुपये जमा किए. हम 40-45 डिग्री तापमान की भरी गर्मी में गुजरात गए तो नरेन्द्र मोदी जी उस वक्त सीएम नहीं थे, केशुभाई पटेल थे. वहां गर्मी में लोगों की हालत खराब थी. केशु भाई पटेल ने हमारे लिए चाय-ठंडे का इंतजाम करा रखा था.

मैंने कहा केशु भाई जी मेरे हलक से एक बूंद भी नहीं उतरेगी. मैं देखकर आई हूं कैसे छोटे-छोटे बच्चे पानी के टैंक से हथेली पर पानी रखकर चाट रहे हैं. ऐसे में मैं तो कुछ नहीं खा-पी सकती. तो शायद यही मोदी जी ने देखा. उसके बाद गुजरात के एक अखबार का सूरत में कोई कार्यक्रम था. जिसमें पहली बार मैंने नरेन्द्र भाई के साथ स्टेज शेयर किया.

सवाल: आज देश में विदेश में हर जगह मोदी जी की चर्चा है... आप as a citizen उन्हें पीएम के तौर पर कैसे रेट करती हैं ?

जवाब: इस देश में बहुत से अच्छे पीएम रहे हैं. आजादी के बाद बहुत से अच्छे पीएम आए लेकिन नरेन्द्र मोदी जी ग्रासरूट पर काम कर रहे हैं. जो बेहद जरूरी है, मैं हमेशा से ग्रासरूट के लोगों को ऊपर लाने की बात करती थी. विकास ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर होता है. मुझे उनका काम इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि उन्होंने सबको जिम्मेदारी बांट दी है और जिम्मेदारी देकर पूछते हैं कि तुमने जिम्मेदारी निभाई कि नहीं निभाई. दुनिया में सिर्फ रुपये का ऑडिट नहीं होता, रुपये से ज्यादा काम का ऑडिट होता है. क्योंकि अगर आपने रुपये खर्च किए और काम नहीं हुआ तो ये ज्यादा बड़ी बेईमानी है,  उसमें निष्ठा दिखाना जरूरी है.

जब मैंने ज्वाइन किया तब माहौल मोदी जी के खिलाफ था. लोग कह रहे थे अल्पसंख्यक मंत्रालय खत्म हो जाएगा. मैंने उन्हें कहा मुझे 2014 में पता चला है कि मैं अल्पसंख्यक हूं, मैं तो अपने आप को भारतीय समझती हूं.  मैं हमेशा से महिलाओं के लिए काम करती आई थी. लेकिन मैंने लोगों को बहुसंख्यक-अल्पसंख्क नहीं बल्कि अमीर और गरीब के हिसाब से देखा है और यही सोच मोदीजी की है. उनका कहना है सबका साथ, सबका विकास. ये मुझे बहुत प्रभावित करता है. जो हमारी प्रस्तावना है. हमारे यहां जाति, धर्म, संप्रदाय और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है. इसको ट्रांसलेट करें,  तो अर्थ निकलता है सबका साथ, सबका विकास.

सवाल: क्या कारण है कि पीएम मोदी और अल्पसंख्यकों के बीच का अंतर कम नहीं हो पाया है. पहले से कम हुआ है. लेकिन अब भी काफी गैप बाकी है ?

जवाब: मैं जब आई थी तो माहौल बहुत खराब था. दो साल पहले मैं गर्वनर बनकर चली गई, अब माहौल एकदम शांत है. कोई नरेन्द्र मोदी पर आरोप नहीं लगा रहा कि वो अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हैं. ट्रिपल तलाक के मामले में किसी ने मुझसे कहा कि मोदी जी मुस्लिम औरतों के मामले में दखल दे रहे हैं. तो मैंने कहा कि कभी तो तुम ये कहते हो कि मोदी जी, RSS अल्पसंख्यकों के खिलाफ है. तो अब क्यों कह रहे हो कि वो मुस्लिम महिलाओं के हक में बोल रहे हैं. नरेंद्र मोदी जी सबका साथ, सबका विकास चाहते हैं. इसलिए वो कैसे किसी समुदाय की 50 फीसदी आबादी के साथ हो रहे अन्याय पर चुप रह सकते हैं. इसलिए वो बोल रहे हैं...

सवाल: कुछ लोगों का कहना है यूपी चुनाव से ठीक पहले ये मुद्दा इसलिए उठाया गया ताकि मुस्लिम महिला वोटर्स को उनकी पार्टी की तरफ खींचा जा सके. आपको ऐसा लगा कुछ ? 

जवाब: मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को वोट दिया है. मैंने उनके पिता और पतियों को मुबारकबाद दी और कहा कि मैं सारी उम्र इस बात के लिए संघर्ष करती रही कि महिलाओं को उनका हक मिले, उन्हें उनका प्रतिनिधि चुनने का हक मिले. जिसे आज उन महिलाओं से संबंधित मर्दों ने पूरा किया. इसलिए मैंने उन महिलाओं की जगह, मर्दों को मुबारकबाद दी. आज कितने मर्द हैं जो बाहर आकर कह रहे हैं, कि जो महिलाओं के साथ तीन तलाक के नाम पर अत्याचार हो रहा है, वो नहीं होना चाहिए.

आज पाकिस्तान और बांग्लादेश ने शरीयत के नाम पर जो महिलाओं पर अत्याचार हो रहे थे, उन्हें बंद कर दिया है. उन्होंने तीन तलाक प्रथा को बंद कर दिया है, कुछ लोग हैं जो दलील दे रहे हैं कि ये 1400 साल से चली आ रही प्रथा है. मैं उनसे कहना चाहती हूं कि आप 1400 साल पुराने वक्त में नहीं रह रहे हैं, आप इस्तेमाल तो करते हैं इंटरनेट और औरत के लिए 1400 साल पुरानी प्रथा को चलाने की बात कह रहे हैं. अगर कुछ 1400 साल से गलत हो रहा है तो क्या वो कभी नहीं सुधरेगा. 

सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने अगर तीन तलाक को अवैध बता दिया तो क्या सरकार नया कानून लाएगी ?

जवाब: कितनी महिलाओं को तलाक दिए जा रहे हैं. अगर बीवी बच्चे को दूध पिला रही है और पति को खाना देने में देरी हो गई. तो तलाक दे दिया जाता है. शादी को मजाक बना दिया गया है. कुरान शरीफ में इसपर सख्त लानत हैं. कुरान में कहा गया है शादी को संजीदगी से लो. शादी नई नस्ल को पैदा करने का तरीका है. तो आप इसका मजाक नहीं बना सकते. बेटी होती है तो तलाक दे दिया जाता है. महिलाओं को मर्द से तलाक लेना चाहिए और कहना चाहिए कि तुम बेटा पैदा नहीं कर सके. इसलिए मैं तुम्हें तलाक दे रही हूं. मुझे खुशी है कि अब महिलाओं को एक जुबान मिल गई है, एक सहारा मिला है.

सुप्रीम कोर्ट ये बात कह रही है, पार्लियामेंट जो कानून बनाती है, उसको लागू करने की जिम्मेदारी कोर्ट की होती है. तो अगर सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं करेगा तो कौन करेगा. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तो सिर्फ एक एनजीओ है. आप खुद मान रहे हो कि तीन तलाक पाप है, अगर पाप है तो ये पाप क्यों करने दे रहे हो. आप अल्लाह का नाम लेकर आलीम बनते हो, तो पाप क्यों करने दे रहे हो, आप सीधे-सीधे जुल्म कर रहे हो. 

सवाल. आज आप मणिपुर की राज्यपाल हैं. कहा जाता है कि जब मणिपुर की सरकार बनी तो आपने सबसे बड़े दल सरकार बनाने का न्योता न देकर BJP को इनवाइट किया ?

जवाबः ऐसा किसी ने नहीं कहा जिन्होंने अपना बहुमत साबित किया मैने उनको बनाया और वहां अब स्थिर सरकार बनी है. वहां पिछले साल नवम्बर से नाकाबंदी थी, वहां राजभवन में मैने कई मीटिंग की कॉन्फ्रेसं की उनको समझाया. आज वहां विकास सही रास्ते पर चल रहा है. हमें मणिपुर में कुछ करना है, उत्तर पूर्व में कुछ करना है. आज मैं संतुष्ट हूं. 

सवाल. कुछ लोग कहते हैं आप मुख्यमंत्री जैसा काम कर रहीं हैं?

जवाबः  मैं उन्हीं की मदद कर रही हूं, अपनी लीडरशिप तो बना नहीं रही. तो मेरा विवाद किसी मुख्यमंत्री से नहीं है बल्कि मेरा विवाद किसी से नहीं है.

सवालः मणिपुर में क्या चैलेंज है सरकार के सामने, आपके सामने एक राज्यपाल के तौर पर ?

जवाबः पिछड़ापन, यातायात सबसे बड़ी तकलीफ है. मणिपुर में दुनिया का सबसे ऊंचा ब्रिज बना रहे हैं. नितिन गडकरी अंतर्राष्ट्रीय हाईवे बना रहे हैं जो म्यानमार होते हुए थाईलैंड तक जाता है. मैंने गृह मंत्री साहब को बोला है एक हाईवे पैट्रोल फोर्स बनाने के लिए तो गृह मंत्री साहब बना रहे हैं. कृषि में मैं बहुत काम कर रही हूं. सारी जैविक यानि organic चीजें हम बनाने की कोशिश कर रहे हैं. सुभाष गोयल साहब से बात की है. सरकार ने हमें 300 करोड़ का प्रोजेक्ट दिया है. लोकल क्लिनिंग का. अब वहां कोई नाकाबंदी नहीं है, अंडरग्राउंड मूवमेंट नहीं है, कोई बम ब्लास्ट नहीं, कुछ नहीं है. चुनाव में हमारे सुरक्षा दलों  ने बहुत बढ़िया काम किया.  87% वोट पड़े हैं मणिपुर में, जो कहीं नहीं पड़े.

सवालः मणिपुर राजभवन में आपका मन लग गया था दिल्ली आने का मन होता है कभी-कभी ?

जवाबः मैं जो काम करती हूं उसमें दिल लगा रहता है

सवालः मैने सुना है कि आपने अमित शाह से कहा है प्रेसिडेंट या वाइस-प्रेसिडेंट के लिए ?

जवाबः मैने अमित शाह जी से कुछ नहीं कहा अमित शाह जी ने जब मुझे राज्यपाल बनाया था तब उन्होंने पूछा था, तब मैने कहा था. मैंने अनसारी साहब के सामने चुनाव लड़ा था अटल जी के कहने पर. अटल जी ने ये भी कहा था कि मुझे मालूम है कि हम हार जायेंगे. मगर मैं ये दिखाना चाहता हूं कि हमारे पास अच्छा प्रत्याशी है. मुझे मणिपुर की जिम्मेदारी दी ये सोच कर कि मैं कर पाऊंगी, मैने उनके भरोसे और विश्वास को पूरा करके दिखाया है.

सवालः राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष एकजुट हो रहा है क्या लगता है, कामयाब होंगे वो लोग ?

जवाबः ये निर्भर करता है प्रत्याशी कौन है. देश के पास दो पोजिशन है जो बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए ऐसा व्यक्ति राष्ट्रपति बने कि देश को मैसेज जाए. नरेन्द्र मोदी जी ने जो भी काम किया उससे एक मैसेज गया देश में ही नहीं विदेश में भी. इसलिए इन पोस्ट को वो वेस्ट नहीं करेंगे. ऐसे बनाएंगे कि दुनिया में मैसेज जाए और मुझे यकीन है ऐसा उम्मीदवार उन्हें जरूर मिल जायेगा. आज नरेन्द्र मोदी का कद इतना ऊंचा हो गया है.

ये वो ही नरेन्द्र मोदी हैं जिनको अमेरिका ने वीज़ा नहीं दिया था. अब मुझे लगता है कि वो 15 बार अमेरिका जा चुके हैं अमेरिका के प्रेसिडेंट यहां आ चुके हैं इतना ही नहीं साउदी अरब में उन्हे इतना अच्छा  रिसेप्शन मिला जहां कहा जाता है कि वो बहुत कट्टरपंथी हैं. सर्वोच्च नागारिक सम्मान उन्हें दिया. तो वो जहां जाते हैं वहां अपनी छाप छोड़ कर आते हैं. वो किसी एक समुदाय के पीएम नहीं हैं. उन्होने खुद कहा मैं पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता हूं.

सवालः कश्मीर में यूथ बहुत नाराज हैं कैसे हैंडल करेंगे?

जवाबः जो टीवी पर दिखा रहे हैं कि जैसे लगता है पूरे कश्मीर में पत्थरबाज़ी हो रही है ये गलत है. मुझे कश्मीर का चप्पा-चप्पा मालूम है मैं वहां रहकर आई हूं...तो मुझे लगता है जो मिसगाइडेड इलाके हैं बस वही हैं. जो थोड़े समय में संभल जायेंगे.'

सवाल. आपका व्यक्तित्व इतना लचीला कैसे है?

जवाबः क्योंकि मैं भारतीय हूं, पूरा भारत मेरा है. मैं जहां रही वहीं के हिसाब से ढल गई.ये जेंडर बजटिंग मैंने पेश किया है इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन यानि आईपीयू के अंदर.

 



First Published: Thursday, May 18, 2017 - 17:59
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