पत्नी की हत्या के मुकदमे में आजीवन कारावास के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे इलियासी

पूर्व टीवी प्रस्तोता और धारावाहिक निर्माता सुहैब इलियासी ने 18 वर्ष पहले अपनी पत्नी अंजू की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

पत्नी की हत्या के मुकदमे में आजीवन कारावास के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे इलियासी
वकील राजीव मोहन ने कहा कि धारा 302 के तहत आरोपों में संशोधन के बाद सभी गवाहों से जिरह का मौका नहीं दिया गया.(फोटो- एएनआई)

नई दिल्ली: पूर्व टीवी प्रस्तोता और धारावाहिक निर्माता सुहैब इलियासी ने 18 वर्ष पहले अपनी पत्नी अंजू की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति पी एस तेजी की पीठ के समक्ष इस अपील पर सुनवाई 15 मार्च को होने की संभावना है. निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के अलावा इलियासी ने हाईकोर्ट के समक्ष भी जमानत याचिका दायर की है. मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पिछले वर्ष 16 दिसम्बर को उसे हिरासत में लिया गया था.

 

 

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सभी गवाहों से जिरह का नहीं मिला मौका
इलियासी का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील राजीव मोहन ने बताया कि हत्या के लिए धारा 302 के तहत आरोपों में संशोधन के बाद उन्हें सभी गवाहों से जिरह का अवसर नहीं दिया गया. निचली अदालत ने 20 दिसम्बर, 2017 को पत्नी की हत्या के लिए इलियासी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए कहा था कि इलियासी ने हत्या कर इसे आत्महत्या का रंग दे दिया. अदालत ने उस पर दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था और निर्देश दिया था कि अंजू के परिजन को मुआवजे के रूप में वह दस लाख रुपए का भुगतान करे. 

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गंभीर जख्मों के साथ भर्ती हुई थी आरोपी की पत्नी
गौरतलब है कि इस मामले में इलियासी पर पहले दहेज हत्या के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 304(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था. मामले में अंजू की मां रूक्मा सिंह और बहन रश्मि सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने अगस्त 2014 में फैसला दिया था कि टीवी प्रोड्यूसर पर हत्या के अपराध के लिए आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा चलाया जाए. आपको बता दें कि अंजू को 11 जनवरी, 2000 को गंभीर जख्मों, जो उसे पूर्वी दिल्ली में स्थित उसके घर में लगे थे, के साथ अस्पताल लाया गया था.

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