DMRC पर आरोप- ट्रेनों को धोने के लिए पानी का हो रहा दुरुपयोग

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को भूजल दोहन के लिए डीएमआरसी को दी गई अनुमति की जिलावार समय-सारणी तैयार करने के लिए आयोजित बैठकों की कार्यवाही का विवरण सौंपने के निर्देश दिये है.

DMRC पर आरोप- ट्रेनों को धोने के लिए पानी का हो रहा दुरुपयोग
दिल्ली निवासी कुश कालरा द्वारा दायर एक याचिका पर एनजीटी सुनवाई कर रही थी.(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को भूजल दोहन के लिए डीएमआरसी को दी गई अनुमति की जिलावार समय-सारणी तैयार करने के लिए आयोजित बैठकों की कार्यवाही का विवरण सौंपने के निर्देश दिये है. न्यायमूर्ति रघुवेन्द्र एस राठौर की एक पीठ ने दिल्ली सरकार को हर जिले के उपायुक्त, दिल्ली मेट्रो रेल निगम ( डीएमआरसी ) और केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण ( सीजीडब्ल्यूए ) को चर्चाओं में शामिल करने के निर्देश दिये और बैठकें जल्द पूरी कराने को कहा.

दिल्ली सरकार के वकील ने दावा किया कि दक्षिणी दिल्ली को छोड़कर सभी जिलों के संबंध में बैठकें आयोजित की गई थीं और वह बैठकों के विवरण को सौपेंगे. पीठ ने कहा ,‘‘ दक्षिण दिल्ली जिले के संबंध में , यह सूचित किया गया है कि बैठक 20 अप्रैल , 2018 को तय की गई है. 

दिल्ली की एनसीटी के वकील बैठकों की कार्यवाही का विवरण रिकार्ड के लिए दे सकते है और वे सभी संबंधित लोगों को इसकी प्रतियां उपलब्ध कराये. ’’ मामले की अगली सुनवाई की तिथि तीन मई तय की गई है. दिल्ली निवासी कुश कालरा द्वारा दायर एक याचिका पर एनजीटी सुनवाई कर रही थी. याचिका में आरोप लगाया है कि डीएमआरसी अपनी ट्रेनों को धोने के लिए अपशिष्ट जल का उपयोग करने के बजाय भूजल दोहन कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप जल स्तर में कमी आई है.  

NGT ने दिल्ली जल बोर्ड को लगाई फटकार
आपको बता दें कि 8 मार्च को राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने इस बात पर दिल्ली जल बोर्ड( डीजेबी) की आलोचना की कि यमुना में अमोनिया के उच्च स्तर के लिए हरियाणा जिम्मेदार है. अधिकरण ने कहा कि यह नदी महानगर में एक नाले में तब्दील होकर रह गई है. न्यायमूर्ति जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने डीजेबी से पूछा कि उसने यमुना का पानी साफ करने के लिए क्या किया है और डीजेबी को स्पष्ट कर दिया कि वह केवल नदी में प्रदूषण को लेकर चिंतित है और दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे के मुद्दे पर नहीं जा रहा है.

यमुना में प्रदूषण 
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘ आप यहां- वहां की बातें क्यों कर रहे हैं? हम केवल यमुना में प्रदूषण को लेकर चिंतित हैं. आप हमेशा एक नई योजना के साथ आ जाते हैं. हम पूरी यमुना की बात कर रहे हैं न कि एक अलग- अलग हिस्से की. हम यमुना को अलग- अलग हिस्से में नहीं बांट रहे हैं, क्योंकि यह पूरी एक पारिस्थितिकी है. ’’ पीठ ने कहा, ‘‘ आप चाहते हैं कि हरियाणा आपको ज्यादा पानी दे ताकि नदी में प्रदूषकों का विलयन हो लेकिन बताइए कि आपने क्या किया है. 

इनपुट भाषा से भी