भारत-जापान वार्षिक बैठक आज: रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं दोनों देश

आबे की यात्रा से पहले भारत जापान रक्षा मंत्री स्तरीय वार्षिक वार्ता तोक्यो में हो चुकी है. इसमें सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी और यूएस-2 शिनमायवा विमान खरीदने के नयी दिल्ली के प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी. 

भाषा | अंतिम अपडेट: Sep 14, 2017, 07:29 AM IST
भारत-जापान वार्षिक बैठक आज: रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं दोनों देश
भारत जापान वार्षिक बैठक ऐसे समय में हो रही है, जबकि उत्तर कोरिया द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण और दक्षिण चीन सागर पर चीन के बढ़ते दावे के चलते क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. (फोटो साभार : @MEAIndia)

नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच गुरुवार को गुजरात के गांधीनगर में होने वाली वार्षिक शिखर बैठक में रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चर्चा का मुख्य केन्द्र हो सकता है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जापान से जल-थल-आकाश में चलने में सक्षम यूएस-2 विमान लेने के बहुत समय से लंबित भारतीय प्रस्ताव तथा सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास पर विशेष तौर पर चर्चा हो सकती है. इससे दोनों देशों के बीच सामरिक भागीदारी के साथ रक्षा संबंध भी गहरे हो सकते हैं. इस बात के संकेत हैं कि मोदी आबे वार्ता के बाद दिए जाने वाले संयुक्त वक्तव्य में रक्षा सहयोग के बारे में कुछ अंश हो सकते हैं.

महत्वपूर्ण समय पर हो रही है बैठक
भारत जापान वार्षिक बैठक ऐसे समय में हो रही है, जबकि उत्तर कोरिया द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण और दक्षिण चीन सागर पर चीन के बढ़ते दावे के चलते क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. मोदी एवं आबे इस मुद्दे पर विचार कर सकते हैं.

तोक्यो में हो चुकी है रक्षा मंत्री स्तरीय वार्षिक वार्ता 
आबे की यात्रा से पहले भारत जापान रक्षा मंत्री स्तरीय वार्षिक वार्ता तोक्यो में हो चुकी है. इसमें सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी और यूएस-2 शिनमायवा विमान खरीदने के नयी दिल्ली के प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी.  रक्षा वार्ता के साथ दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए थे कि मानव रहित जमीन पर चलने वाले वाहनों एवं रोबोट के क्षेत्र में अनुसंधान समन्वय के लिए तकनीकी विचार विमर्श शुरू किया जाए।

परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर भी चर्चा की उम्मीद
मोदी एवं आबे के बीच परमाणु ऊर्जा के बारे में सहयोग के मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. जुलाई में भारत एवं जापान के बीच ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार लागू हुआ था जिसके तहत इस क्षेत्र में दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है.