भारत-जापान ने एक सुर में कहा; मुंबई-पठानकोट हमले में शामिल आतंकियों को सजा दे पाक

नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे अलकायदा, आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा और इनसे संबंधित आतंकवादी संगठनों के खतरे के खिलाफ आपसी सहयोग मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं.

IANS | अंतिम अपडेट: Sep 15, 2017, 07:38 AM IST
भारत-जापान ने एक सुर में कहा; मुंबई-पठानकोट हमले में शामिल आतंकियों को सजा दे पाक
गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित 12वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे. (IANS/PIB/14 Sep, 2017)

गांधीनगर: भारत और जापान ने गुरुवार (14 सितंबर) को पाकिस्तान से वर्ष 2008 में हुए मुंबई और वर्ष 2016 में पठानकोट के वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं को सजा देने की मांग की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान से मुंबई और पठानकोट आतंकवादी हमले में शामिल साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने की अपील की गई है. दोनों नेता अलकायदा, आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा और इनसे संबंधित आतंकवादी संगठनों के खतरे के खिलाफ आपसी सहयोग मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं.

मोदी और आबे ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक-दूसरे की सदस्यता का समर्थन करते हुए बयान में कहा, "दोनों देश ढृढ़ता से इस बात पर सहमत हैं कि सुरक्षा परिषद विस्तार में भारत और जापान स्थायी सदस्य के लिए वैध उम्मीदवार हैं." चीन की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना की आलोचना करते हुए बयान में देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को ध्यान में रखते हुए एक खुली, पारदर्शी और अखंडित तरीके से संचार-संपर्क व आधारभूत संरचना को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया. भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का विरोध किया है, क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू एवं कश्मीर से होकर गुजरती है.

मोदी, आबे की चर्चा में शामिल डोकलाम विवाद; 75 दिनों तक चला था चीन से तनाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच गुरुवार (14 सितंबर) को बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में हालांकि डोकलाम विवाद का जिक्र नहीं हुआ लेकिन उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई होगी. विदेश सचिव एस जयशंकर से जब डोकलाम मुद्दे सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा, "दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे पर चर्चा हुई." उन्होंने कहा, "डोकलाम का बयान में विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया है."

जयशंकर ने दोनों नेताओं के बीच बंद दरवाजे में हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा, "मुझे लगता है दोनों नेताओं के बीच व्यापाक समझ के अंतर्गत चर्चा हुई है." भारत और चीन की सेनाएं डोकलाम में ढाई महीने तक आमने-सामने आ गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था. ब्रिक्स सम्मेलन से पहले 28 अगस्त को हालांकि दोनों देशों ने अपनी-अपनी सेनाओं को हटाने का फैसला किया था जिसके बाद यह विवाद समाप्त हो गया था.